प्रदेश में शिक्षकों का होगा ट्रांसफर और मर्जर-3 साल तक नहीं हटाए जाएंगे शिक्षक
प्रदेश में शिक्षकों का होगा ट्रांसफर और मर्जर-3 साल तक नहीं हटाए जाएंगे शिक्षक
प्रदेश में टेक्स्ट बुक को लेकर एनसीईआरटी के साथ समझौता-बच्चों को अंजीर,काजू खिलाओ तो कोई अब्दुल कलाम निकल सकता है
झाबुआ/भोपाल। संजय जैन-सह संपादक। प्रदेश सरकार प्रदेश में पदस्थ उर्दू सहित तमाम टीचर्स की स्कूलों में उपयोगिता को देखकर उन्हें दूसरे स्कूलों में भेजने की तैयारी कर रही है।दूरस्थ स्कूलों के तबादला किए जाने के बाद शिक्षकों को कम से कम 3 साल तक नहीं हटाया जाएगा। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब में इसकी जानकारी दी है। स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि इसकी समीक्षा की जा रही है कि कहां-कहां स्टूडेंट्स की संख्या कम है और टीचर्स अधिक है। एक अन्य सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि प्रदेश में जनजातीय विभाग के 1881 स्कूलों को बंद कर दिया है या तो फिर मर्ज कर दिया गया है। प्रदेश में टेक्स्ट बुक को लेकर एनसीईआरटी के साथ समझौता हो गया है। जल्द से जल्द स्कूल शिक्षा विभाग एनसीईआरटी के साथ बैठकर इस दिशा में काम पूरा करेगा ।
पूरे प्रदेश में हो समीक्षा
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक अमर सिंह यादव ने राजगढ़ जिले में उर्दू शिक्षकों को लेकर सवाल पूछा था। उन्होंने कहा कि राजगढ़ जिले में कई स्कूलों में स्टूडेंट्स नहीं हैं,जबकि उर्दू शिक्षक तो मौजूद हैं। संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि राजगढ़ ही नहीं,बल्कि पूरे प्रदेश में पदस्थ उर्दू शिक्षकों को लेकर समीक्षा की जानी चाहिए। कई स्थानां पर उर्दू शिक्षक तो पढ़ाने के लिए तो हैं, लेकिन वहां उर्दू के विद्यार्थी ही मौजूद नहीं है।
3 साल तक नहीं हटाए जाएंगे शिक्षक
3 साल शिक्षक हटाए नहीं जाएंगे,इसके जवाब में स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि राजगढ़ जिले में 15 स्कूलों में 20 उर्दू शिक्षक हैं,जबकि छात्रों की संख्या 200 है। इस तरह छात्रों के मान से ही शिक्षक उपलब्ध भी हैं लेकिन सिर्फ उर्दू शिक्षक ही नहीं,बल्कि सभी शिक्षकों को लेकर समीक्षा की गई है। जहां भी जीरो स्टूडेंट्स वाले स्कूल हैं,वहां से शिक्षकों को निकालकर दूरस्थ स्कलों में भेजा जाएगा,इसके बाद उन्हें 3 साल तक रखा जाएगा। प्रदेश सरकार द्वारा सभी विषयों के शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। पिछले साल ही करीबन 20 हजार शिक्षकों को नए स्थानों पर भेजा गया है। शिक्षकों को ऐसे स्कूलों में पदस्थ किया जहा रहा है,जहां स्टूडेंट्स अधिक हैं और शिक्षक कम है। इसी तरह 10 से कम स्टूडेंट्स वाले स्कूलों को पड़ोस के स्कूलों में शिफ्ट किया जा रहा है। इसके बाद शिक्षकों को दूसरे स्थानों पर पदस्थ किया जा रहा है।
प्रदेश में बंद और मर्ज हुए 1881 स्कूल
झाबुआ कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि प्रदेश में पिछले 10 सालों में जनजाति विभाग के 1881 स्कूलों को या तो बंद कर दिया गया है या तो फिर मर्ज कर दिया गया है। इनमें खरगोन जिले में 933 स्कूलों को जीरो इनरॉलमेंट के कारण मर्ज भी कर दिया गया है। मंडला में 728 प्राथमिक स्कूलों में छात्र संख्या 10 से कम होने के कारण उन्हें भी मर्ज कर दिया गया है। खंडवा में में 88 स्कूलों को एक शाला एक परिसर योजना के तहत मर्ज कर दिया गया है। इसी तरह छिंदवाड़ा में 11,उमरिया में 4,सिवनी में 20,बुरहानपुर में 1, बालाघाट में 96 स्कलों को मर्ज कर दिया गया है
एनसीईआरटी के साथ करें किताबें तैयार
कुशाभाऊ ठाकरे सभागार,राजधानी भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर आयोजित एक कार्यक्रम में केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि प्रदेश में टेक्स्ट बुक को लेकर एनसीईआरटी के साथ समझौता हो चुका है। अब आप एनसीईआरटी की किताबों को अडॉप्ट करें। जल्द से जल्द स्कूल शिक्षा विभाग एनसीईआरटी के साथ बैठकर इस दिशा में काम पूरा करें। एनसीईआरटी इस बार शिशु वाटिका, बाल वाटिका से लेकर कक्षा 8वीं तक की पूरी किताबें छाप चुका है। विज्ञान और गणित की किताबों का काम पूरा कर लिया जाएगा। इतिहास और सामाजिक विज्ञान में काम बाकी है। मेरा सुझाव है कि आगामी सत्र से सभी किताबें एनसीईआरटी की लागू कर लेंगे। उन्होंने कहा कि परख में मध्य प्रदेश के 60 फीसदी बच्चे औसत आए हैं,40 फीसदी बच्चे अभी भी बाकी हैं।
बच्चों को अंजीर,काजू खिलाओ तो कोई अब्दुल कलाम निकल सकता है
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि मैं जिम्मेदारी से कह सकता हूं कि मध्य प्रदेश के डेढ़ करोड़ स्टूडेंट्स में से 50 लाख बच्चों ने 5 वीं कक्षा तक तो सेबफल देखे ही नहीं होंगे,देखे भी होंगे,तो सिर्फ बाजार में लेकिन उन्हें खा नहीं सके होंगे। अंजीर तो उनकी जिंदगी में कक्षा 10वीं के बाद शायद ही आई हो,बच्चों को अंजीर, काजू खिलाओ तो उसके न्यूट्रिशनल इंपैक्ट से कोई अब्दुल कलाम निकल सकता है
दी जाती है,गुजरात में गुलदस्ता के स्थान पर फलों की टोकरी
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव,राज्यपाल मंगू भाई पटेल,स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह,उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, राज्यमंत्री कृष्णा गौर, विधायक रामेश्वर शर्मा सहित कई अधिकारी मौजूद थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने गुजरात के कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि वहां एक बहुत अच्छी पहल शुरू हुई है। गुजरात में गुलदस्ता के स्थान पर फलों की टोकरी दी जाती है। सोशल मीडिया पर फोटो पोस्ट करने के लिए गुलदस्ता भेंट किया जाता है,लेकिन इसकी लाइफ सिर्फ 20 सेकंड होती है। जबकि इस गुलदस्ता की कीमत कम से कम 500 रुपए होती है। उन्होंने रामेश्वर शर्मा की तरफ इशारा करते हुए कहा कि रामेश्वर शर्मा बड़े-बड़े भंडारे करते हैं,लेकिन भंडारे के स्थान पर विधानसभा क्षेत्र में हफ्ते में एक बार बच्चों को एक पीस अंजीर,दो काजू और एक बेसन का लड्डू ही मिल जाए।

