अब तो प्रशासन ही बताये,क्या कुछ शेष बचा है...?सीएमओ पेटलावद को निलंबित करने की कार्यवाही में,जबकि श्वान मारने पर तो थांदला सीएमओ को निलंबित किया था,यह दोहरा मापदंड क्या कहलाता है?

जिले में गुड-गवर्नेंस कहा है और कहा है जीरो-टॉलरेंस?जबकि जिले में दो आइएस और संसदीय क्षेत्र से तीन मंत्री पदस्थ भी है-आमजन

पेटलावद/झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक। थांदला रोड पर नरसिंह दास बैरागी के द्वारा अवैध रूप से मल्टी फ्लेक्स सह शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण कार्य नगर परिषद की बगैर अनुमति के छत गिरने के पहले से,विगत 6 माह से अधिक समय से किया जा रहा था। उक्त अवैध निर्माण 23 मार्च 2025 रविवार को दोपहर 12.30 से 12.45 के बीच बजे के आसपास,छत भराई का कार्य चल रहा था,जिसमें करीब 50 से अधिक मजदूर कार्य कर रहे थे। दोपहर को भोजन के वक्त मजदूर खाना खाने चले गए थे,उसमें से कुछ मजदूर जो छत भराई हुई थी,उसके नीचे कार्य कर रहे थे। अचानक से उक्त अवैध निर्माण स्थल की ताजा तारीन भरी हुई छत भड़भड़ा कर गिर गई,जिसके नीचे दो श्रमिक दब गए और उनकी मौत हो गई थी।

जांच समिति ने सीएमओ आशा भंडारी को लापरवाह माना

इस दर्दनाक घटना के बाद कलेक्टर ने एक जांच समिति का गठन किया था। जिसने स्थल निरीक्षण किया और अन्य दस्तावेजों की जांच कर नगर परिषद के कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए थे। तत्कालीन समय में एसडीएम तनुश्री मीणा आइएएस ने भी मौका निरीक्षण कर उक्त निर्माण को अवैध बताया था। कलेक्टर द्वारा गठित जांच टीम ने जो प्रतिवेदन तैयार कर जांच रिपोर्ट में संलग्न किया,उसमें नगर परिषद पेटलावद की सीएमओ आशा भंडारी की लापरवाही माना है,साथ ही उनका मुख्यालय पर न रहते हुए अन्यत्र स्थान से अपने घर से आना-जाना करना भी जांच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा संबंधित अवैध निर्माणकर्ता के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं करना,मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 293, 305,308 का उल्लंघन एवं अधिनियम की आदेशात्मक उपेक्षा की गई है,यह भी माना गया। गौरतलब है कि नरसिंह दास बैरागी के द्वारा बिना अनुमति के निर्माण कार्य किया जा रहा था और नक्शा भी स्वीकृत नहीं कराया गया था,जो कि मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम की धारा 187/8 का उल्लंघन भी  है। उल्लेखनीय है मुख्य नगरपालिका अधिकारी का दायित्व है कि वह समय-समय नगर में जाकर वैध-अवैध निर्माण कार्यों की जांच करें एवं उन पर कार्रवाई भी करे। प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश शासन नगरीय विकास एवं आवास विभाग भोपाल के द्वारा एक पत्र क्रमांक- 3667/4836/2019-18/2 भोपाल 25-10- 2019 से जारी करते हुए सभी सीएमओ को निर्देशित किया गया था कि वह प्रात: 6 बजे से 9 बजे तक नगर में भ्रमण करें,साथ ही उल्लेखित 10 बिंदुओं का पालन करे।

मुख्यालय में नही रहती,करती है अन्यत्र जगह से रोजाना अप-डाउन

जानकारी नुसार लापरवाह सीएमओ पेटलावद अपने मुख्यालय में न रहते हुए अपने घर राजगढ़- सरदारपुर से रोजाना अवकाश दिन छोड़कर आना-जाना करती है और 10 बजे बाद कार्यालय में उपस्थित होती है। फिर वह प्रात: नगर भ्रमण कैसे करती होगी? यह तो वे ही जाने। इस तथ्य का भी उल्लेख जांच समिति के प्रतिवेदन में किया गया है। आपको बता दे कि लगातार इसी संघर्ष से सिद्धि समाचार पत्र में प्रकाशित खबरे इस बात की भी पुष्टि कर रही है कि सीएमओ मुख्यालय पर न रहते हुए प्रमुख सचिव के आदेश के विपरीत नगर में भ्रमण ही नहीं करती है।

जान कर भी अनजान बनी रही,लेकिन क्यो, यह तो वे ही जाने?

जांच समिति के द्वारा जो जांच प्रतिवेदन कलेक्टर झाबुआ को प्रेषित किया गया की सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मीडिया ने जो जानकारी प्राप्त की है, उसमें उक्त अवैध निर्माण कार्य को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है कि अनुभाग स्तरीय गठित जांच टीम के समक्ष दीपक वास्केल उपयंत्री,नगर परिषद पेटलावद एवं बद्रीलाल सेफ्टा सहायक राजस्व निरीक्षक ने अपने कथन में बताया है कि निर्माण शाखा में कार्य विनोद परमार के साथ उक्त निर्माण स्थल का मौका मुआयना मुख्य नगर पालिका अधिकारी आशा जितेंद्र भंडारी द्वारा किया गया है। उक्त अवैध निर्माण की जानकारी पूर्ण रूप से मुख्य नगर पालिका अधिकारी आशा भंडारी के संज्ञान में थी। लेकिन वह जानकर भी अनजान क्यों बनी रही ? यह तो वे ही जाने उनकी इस लापरवाही के चलते दो निर्दोषों की जान चली गई और अन्य 5 बुरी तरह से घायल भी हुए थे।

करे कोई और भरे कोई

हादसे के बाद सीएमओ ने संबंधित को नोटिस तो जारी किया,लेकिन अपने को पाक साफ  दिखाने के उद्देश्य षड्यंत्रपूर्वक,इसका दोष नगर परिषद पेटलावद के उपयंत्री ओर सहायक राजस्व निरीक्षक के माथे नोटिस देकर मढ़ने का भरपूर प्रयास किया परन्तु मीडिया की सतर्कता ओर जांच समिति के कारण इनके मनसूबों में यह कामयाब नहीं हुई और इनकी लापरवाही जांच प्रतिवेदन में उजागर हो गई। इस घटना को लेकर मीडिया के द्वारा एक नहीं अनेकों बार समाचार प्रकाशित किए,लेकिन न तो जिला प्रशासन ने कोई कार्यवाही की न ही नगरीय आवास एवं विकास विभाग भोपाल ने कोई कार्यवाही की। केवल जिला मुख्यालय से एक ही जवाब मिलता है कि जांच प्रतिवेदन कार्यवाही हेतु नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग भोपाल को भेज दिया गया है।

क्या प्रशासन की नजरों में श्वान की जान की कीमत,इंसान से भी ज्यादा है ?

आपको बता दे की नगर परिषद थांदला में दैनिक वेतन पर कार्यरत कर्मचारियों ने एक श्वान को पीट पीट कर मार डाला था। तब आयुक्त नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग भोपाल ने तत्काल इस बात का संज्ञान लेकर तत्कालीन सीएमओ राजकुमार ठाकुर को निलंबित कर दिया था। अकल्पनीय बात तो यह है कि पेटलावद शहर में हुए इस हादसे में 2 निर्दोष श्रमिकों की असमय दर्दनाक मौत हो गयी लेकिन  लापरवाह सीएमओ के विरुद्ध आज दिनांक तक कोई कार्यवाही तक नहीं हुई है। क्या प्रशासन की नजरों में श्वान की जान की कीमत,इंसान से भी ज्यादा है? यदि नहीं,तो अब तक सीएमओ अंगद के पैर की तरह,अब तक पद पर कैसे जमी हुई है? यह तो प्रशासन ही जाने।

जिले में गुड-गवर्नेंस कहा है और कहा है जीरो-टॉलरेंस? जबकि जिले में दो आईएएस और संसदीय क्षेत्र से तीन मंत्री भी है-आमजन

सूत्रों की माने तो नगर में यह चर्चा भी आम है कि इनके राजनीतिक रसूख के कारण,भाजपा के कतिपय नेताओं का संरक्षण प्राप्त होने से इनके खिलाफ  होने वाली कार्यवाही को सतत दबाया जा रहा है। इसकी हम पुष्टि तो नहीं करते लेकिन जो चर्चा हो रही है,उसके आसरे ही हम लिख रहे है। नगर के लोगों का प्रशासन से यह सवाल है कि क्या इसे ही गुड-गवर्नेंस कहते है और जीरो-टॉलरेंस वाली बात भी नदारद क्यों है.......? जबकि जिले दो-दो आईएएस नेहा मीना-कलेक्टर,तनुश्री मीना-एसडीएम और संसदीय क्षेत्र से तीन मंत्री भी है। खैर.....वैसे तो आयुक्त संकेत भोंडवे की सख्त अधिकारी के रूप में पहचान बनी हुई है। क्या वे अब इस प्रकरण को तुरन्त संज्ञान में लेकर,लापरवाह सीएमओ पर कार्यवाही करते हैं या नहीं.......? यह  बात तो अब आगे देखने वाली होगी। अब तो हमे मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव से ही आस है। यदि जरूरत पड़ी तो,हम हस्ताक्षर अभियान चलाकर मुख्यमंत्री के नाम से ज्ञापन भी प्रेषित करेंगे।