मौसम का सेहत पर असर त्वचा, आंखों और सांस के रोगी बढ़े

कैविटीज की गिरफ्त में जिला,लगातार बढ़ रही दंत रोगियों की संख्या

झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक।  कल दिसंबर से मौसम में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। दिन में धूप तेज और रात ठंडी हो गई है। तापमान गिरने के साथ हवा में नमी यानी आर्द्रता भी घट रही है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में वातावरण और शुष्क होगा,जिससे स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। खासतौर पर त्वचा,आंखें और श्वसन तंत्र पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल रहा है। त्वचा और सर्दी की समस्या से जुड़े रोगियों और दंत रोगियों की संख्या तीन से चार दिन में ही दोगुनी हो गई है। इसलिए सावधानी जरूरी है। ताकि रोगों से बचा जा सके।

घट-बढ़ रही आर्द्रता,सेहत को समस्या

बारिश के मौसम में आर्द्रता उच्च स्तर पर रही,इसका स्तर 95 से लेकर 98 तक रहा। हालांकि इसमें भी उतार-चढ़ाव बना रहा। मौसम की विदाई के साथ ही इसका स्तर घट रहा है। अब सुबह की आर्द्रता 70 से 75 के बीच अटकी हुई है। वहीं शाम के समय की आर्द्रता 40 से 50 के बीच में बनी रहती है। यानी नमी कम हो रही है और शुष्की बढ़ रही है।

रोगियों की सख्ंया बढ़ गई

मौसम में आए बदलाव की वजह से त्वचा रोग,सर्दी,खांसी सहित अन्य रोगियों की सख्ंया बढ़ गई है। तीन से चार दिन पहले तक त्वचा रोगियों की ओपीडी 20 से 25 थी। अब यह बढ़कर 40 से 45 हो गई है। वहीं मेडिसिन ओपीडी में 70 से 80 मरीज आ रहे थे। यह आंकड़ा भी दोगुना हो गया है।

स्वास्थ्य पर असर क्या पड़ेगा?
त्वचा और आंखें

कम आर्द्रता से हवा में मौजूद नमी घटने लगती है, जिससे त्वचा की ऊपरी परत रूखी और खुरदरी हो जाती है। यह स्थिति एलर्जी और खुजली का कारण बन सकती है। आंखों में जलन,सूखापन और लालपन भी बढ़ जाता है,ड्राई आई सिंड्रोम जैसी समस्या हो सकती है।

श्वसन तंत्र

हवा सूखने पर श्वसन तंत्र की श्लेष्मा झिल्ली पर भी असर पड़ता है। इससे गला सूखना, खांसी, सर्दी-जुकाम और लू जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। कम आर्द्रता के समय हवा में मौजूद बैक्टीरिया और धूलकण आसानी से फेफड़ों में जा सकते हैं,जिससे संक्रमण और एलर्जी का खतरा दोगुना हो जाता है।

पुराना दर्द और साइनस

कम आर्द्रता शरीर में पानी की कमी यानी निर्जलीकरण को बढ़ाती है। इससे जोड़ों में अकड़न और पुराने दर्द वाले मरीजों को अधिक परेशानी होती है। साथ ही,साइनस वाले लोगों को नाक और सिर में दबाव या जलन महसूस हो सकती है।

बैक्टीरिया से लड़ने डाइट में ये शामिल करें

कैल्शियम और फॉस्फेट रिच फूड्स जैसे दूध,पनीर,दही और अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स। ड्राई फ्रूट्स और हरी पत्तेदार सब्जियां। हर्बल टी भी पी सकते हैं,क्योंकि इसमें मौजूद पॉलीफेनोल प्लाक बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है।

सर्दियों में दांतों का ख्याल कैसे रखें?

-दिन में दो बार ब्रश करें
-बहुत ज्यादा ठंडा या गर्म खाने-पीने से बचें
-हाइड्रेटेड रहें और दांतों के लिए जरूरी डाइट लें
-शुगरी फूड्स और ड्रिंक्स से परहेज करें
-सॉफ्ट टूथब्रश का इस्तेमाल करें
-रोजाना दांतों को क्लॉस करें
-मेडिकेटेड माउथवॉश का इस्तेमाल करें
-समय-समय पर डॉक्टर से चेकअप कराएं

एलर्जी और खुजली का कारण

कम आर्द्रता से हवा में मौजूद नमी घटने लगती है, जिससे त्वचा की ऊपरी परत रूखी और खुरदरी हो जाती है। यह स्थिति एलर्जी और खुजली का कारण बन सकती है। हर्बल टी भी पी सकते हैं,क्योंकि इसमें मौजूद पॉलीफेनोल प्लाक बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है।

डॉ.एम किराड़- जिला अस्पताल, झाबुआ

सर्दियों में बढ़ता है दांत का दर्द

सर्दियों में दांतों की समस्या बढ़ती है और झनझनाहट महसूस होती है। खाने के बाद एक मिनट तक कुल्ला करें। बच्चों को मीठा खाने से रोकें और उन्हें दिन में दो बार ब्रश कराएं।

डॉ.गर्ग- दंत चिकित्सक-जिला अस्पताल,झाबुआ