प्रदेश की प्रशासनिक हल-चल पर अलग हट कर,संघर्ष से सिद्धि की विशेष पेशकश संजय जैन-सह संपादक की कलम से

कर्मचारी संगठनों की किराये से आय पर सख्ती साक्षी का आईएएस बनने का सपना पूरा होगा,हाईकोर्ट से रजवाड़ों की रेल लाइन की शताब्दी
एम देट गर्ल-से पन्ना की आशा गौड़ को मिली वैश्विक ख्याति जेएसजेबी में खंडवा जिला नंबर वन

कर्मचारी संगठनों की किराये से आय पर सख्ती

झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक।   सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों से उनके जिले में कर्मचारी संगठनों को दी गई संपत्तियों की जानकारी मांगी हैं। अब सरकारी संपत्तियों का इस्तेमाल निजी व्यक्ति या संगठन द्वारा आय अर्जित करने के लिए नहीं किया जाएगा। ऐसी संपत्तियों को लेकर सक्रिय हुई सरकार सबसे पहले कर्मचारी यूनियन या संघों को दी गई,संपत्तियों की जांच कर रही है। सबसे प्रभावी मध्य प्रदेश में तृतीय वर्ग के मप्र शासकीय कर्मचारी संघ, लघु वेतन कर्मचारी संघ एवं लिपिक वर्ग से लेकर कर्मचारी कांग्रेस और शिक्षक संघ के पास बड़े पैमाने पर सरकार द्वारा दी गई संपत्तियां हैं। इन्हें यू तो संगठन ने कार्यालय संचालित करने के उद्देश्य से जमीन या सरकारी आवास उपलब्ध कराए गए थे,लेकिन वहां संगठन कार्यालय के अलावा बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियां हो रही है। ज्यादातर में दुकानें बनाकर,उन्हें किराये पर दिया गया है। इन्हें कर्मचारी संघ नेताओं के रिश्तेदार या फिर नजदीकी लोग किराये पर चला रहे हैं । मप्र तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ में तो छिंदवाड़ा, बैतूल,हरदा,भिंड, मुरैना सहित अनेक क्षेत्रों में कार्यालय के साथ-साथ दुकानों का संचालन हो रहा है। लघु वेतन कर्मचारी संघ के प्रदेश स्तरीय कार्यालय में दुकानों का संचालन हो रहा है। मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के पुष्पा नगर स्थित बड़ा बहु मंजिला कार्यालय भवन है। पहले इसी में नीचे कार्यालय संचालित होता था,दूसरी मंजिल पर लोग किराये से रहते थे। अब बताया जा रहा है कि दूसरे लोगों ने उस पर कब्जा भी कर लिया है। लिपिक वर्ग में भी बड़े पैमाने पर संपत्तियां हैं,तो शिक्षक कांग्रेस कर्मचारी कांग्रेस सहित अन्य संगठनों के कार्यालयों में भी कई जिलों में व्यावसायिक उपयोग करना सामने आया है।

साक्षी का आईएएस बनने का सपना पूरा होगा,हाईकोर्ट से

आईएएस बनने का सपना लेकर घर से निकली साक्षी की इच्छा का सम्मान करते हुए,मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उन्हें महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। इसके तहत पटना- ;बिहार में साक्षी की आगे की पढ़ाई की सुविधा दे दी है। अब वे बिहार सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट की सचिव 2003 बैच की बिहार कैडर की वरिष्ठ अधिकारी आईएएस वंदना प्रेयसी की निगरानी में आईएएस बनने तैयारी को गति देगी। आईएएस वंदना प्रेयसी ने बिहार में महिलाओं के उत्थान के लिए काफी काम किया है, जिसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति भी प्राप्त की है। उनके मार्गदर्शन में साक्षी की पढ़ाई से लेकर सभी सुविधाओं का ध्यान रखा जाएगा। आपको बता दे कि साक्षी की पढ़ाई को रोक कर,उनका परिवार उसकी शादी करना चाहता था। उनका परिवार बिहार से आकर भोपाल के बजरिया में रह रहा था। इसी दौरान वह घर से निकल कर इंदौर आई गयी,यहां प्राइवेट नौकरी के साथ आईएएस की तैयारी कर रही थी। वह आईएएस बनने के लिए घर पर नोट छोड़ कर निकली थी,जिसमें लिखा था कि 2030 में आईएएस बन कर ही घर लौटूंगी। साक्षी की गुमशुदगी के बाद पिता ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ  की युगलपीठ ने युवती को कहा था कि वह चार-पांच दिनों तक अभिभावक के साथ रहकर देखे,अगर माहौल बेहतर नहीं लगे तो,कलेक्टर को आदेश देंगे कि वह उसकी बाहर रहने और पढ़ाई की समुचित व्यवस्था कराए।

रजवाड़ों की रेल लाइन की शताब्दी

ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन रतलाम के 100 वर्ष पूरे होने पर शताब्दी महोत्सव और रतलाम स्टेशन के इतिहास से आम लोगों और नई पीढ़ी से परिचित करवाने के लिए ऐतिहासिक फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया गया । इतिहास को समेटे इस 100 वर्ष के सफर में रतलाम स्टेशन ने प्राइवेट रेल लाइन से लेकर भारतीय रेलवे के महत्वपूर्ण जंक्शन बनने तक का सफर तय किया है। प्राइवेट रेल लाइन जो होलकर और सिंधिया राजघराने के साथ ही,राजस्थान के रजवाड़ों की बदौलत अस्तित्व में आई थी। इसके बाद भारतीय रेलवे में यह ऐतिहासिक रेलवे लाइन और रतलाम,इंदौर,नीमच और नसीराबाद जैसे ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन शामिल हुए हैं। रतलाम रेल मंडल के डीआरएम अश्विन कुमार के मुताबिक रतलाम रेलवे स्टेशन का वैसे तो 100 वां वर्ष पूर्ण हो रहा है,लेकिन यहां रेलवे लाइन 150 वर्ष से भी अधिक पुरानी है। रियासत काल में मीटर गेज रेलवे लाइन के इस नेटवर्क को होलकर, सिंधिया,राजपूताना रेलवे लाइन और मालवा राजपूताना रेलवे लाइन के नाम से भी जाना जाता था। मालवा क्षेत्र में सबसे पहले खंडवा-इंदौर रेलवे लाइन पर मीटर गेज लाइन बिछाने के लिए तुकोजीराव होलकर द्वितीय ने अंग्रेज सरकार को फाइनेंस कर 1869 में इस रेलवे लाइन का निर्माण करवाया था,बाद में इस रेल लाइन को होलकर स्टेट रेलवे कहा जाने लगा।

एम देट गर्ल-से पन्ना की आशा गौड़ को मिली वैश्विक ख्याति

पन्ना के गांव जनवार की आशा गौड़ अंतरराष्ट्रीय स्केटिंग खिलाड़ी के रूप में शहर को पहचान दिलाने के बाद अब अंग्रेजी रैप सॉंग एम देट गर्ल से दुनिया में धूम मचा रही हैं। लंदन अवार्ड फंक्शन में इस गाने को बेस्ट म्यूजिक वीडियो का सम्मान मिला है। आशा गौड़ बताती हैं कि यह रैप पूरी तरह उनके जीवन की सच्ची कहानी पर आधारित है। इस रैप के विजुअल,लेखन और निर्देशन का कार्य मुंबई के प्रसिद्ध निर्देशक इंद्रजीत नट्टोजी और उनकी टीम ने किया,जबकि वीडियो को अनुराग गुप्ता ने प्रोड्यूस किया। आशा गौड़ ने स्केटिंग की दुनिया में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिताब भी जीते हैं। वे बेयरफुट स्केटबोर्डर्स  नामक गैर-लाभकारी संस्था भी चलाती हैं,जो ग्रामीण बच्चों को स्केटिंग और शिक्षा से जोड़ रही है। नेटफ्लिक्स की फिल्म स्केटर गर्ल भी उनकी ही प्रेरक कहानी पर आधारित है। उलरिके ने उसके जीवन पर आधारित आशा स्केट गर्ल किताब अंग्रेजी भाषा में लिखी। वे एशियाई खेलों में हिस्सा लेने चीन तक गई हुई हैं। अंग्रेजी की पढ़ाई करने आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी भी गई थीं। यह नई उपलब्धि न केवल उनके संघर्ष की जीत है,बल्कि उन सभी ग्रामीण बेटियों के लिए उम्मीद की रोशनी है,जो सपने देखने का साहस रखती हैं।

जेएसजेबी में खंडवा जिला नंबर वन

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने खंडवा कलेक्टर ऋषभ गुप्ता और जिला पंचायत सीईओ नागार्जुन गौड़ा को सम्मानित किया। जल शक्ति मंत्रालय की राष्ट्रीय पहल जल संचय-जनभागीदारी-जेएसजेबी के तहत घोषित अवार्ड्स में खंडवा ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। इस अभियान के तहत देश को 5 जोन में बांटा गया था,जिनमें से वेस्टर्न जोन में खंडवा ने 1 लाख 29 हजार 20 जल संरचनाएं बनाकर शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।