नगर परिषद अध्यक्ष की  सराहनीय पहल से,अब शासन को मिलेगा लाखों का राजस्व और निकाय का भी होगा फायदा

क्या जिला पंजीयक करेगा,लीज-डीड पंजीयन नहीं कराने वाले लिजी पर कार्यवाही?

झाबुआ/रानापुर। संजय जैन-सह संपादक।   नगर परिषद रानापुर ने नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 109 के अंतर्गत बने नियमों और आरक्षण नियमों के तहत दुकानें लीज पर मासिक किराए से दे रखी है। नगर परिषद रानापुर ने वर्ष 2022-23 तक स्थानीय बस स्टैंड और अन्य जगह बनाकर लीज पर मासिक किराए पर नीलाम की है। मिली जानकारी अनुसार उनका अभी तक उप-पंजीयक कार्यालय में लीज-डीड का पंजीयन नहीं कराया गया है,जो गंभीर त्रुटि होकर सरकार को लाखो रुपए की क्षति पहुंचाने का कार्य किया गया है।

नगर परिषद अध्यक्ष की सराहनीय पहल

नगर परिषद रानापुर ने पशु गुजरी मैदान में स्थित जो दुकानें वर्ष 2024-25 में मासिक किराए पर लीज पर दी गई है,उनका नगर परिषद अध्यक्ष सुश्री दीपमाला नलवाया द्वारा शासन के नियमानुसार रजिस्ट्रेशन-पंजीयन करवाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इससे अब शासन को लाखो का राजस्व तो प्राप्त होगा ही,वहीं नगर परिषद को भी1 प्रतिशत मुद्रांक शुल्क की प्राप्ति होगी।

सरकार को लाखो रुपए की क्षति

नगर परिषद की लीज-डीड नाम मात्र के स्टांप पर ही हुई है,जबकि उसको शासन नियमानुसार विधिवत स्टांप पर रजिस्ट्रेशन करवाना था। जो कराया ही नहीं गया है,परिणाम स्वरूप इस त्रुटि के कारण शासन के साथ -साथ  नगर परिषद को भी लाखों की हानि हुई है,जो कि अभी भी हो रही है,जबकि कई लीज की दुकानों का क्रय-विक्रय भी कई बार भी हो चुका है। जबकि नगर परिषद द्वारा जो दुकानें मासिक किराए पर लीज पर नीलाम कर दी जाती है,उनकी लीज-डीड रजिस्ट्रेशन के नियम बने है जो इस प्रकार है।

लीज-डीड रजिस्ट्रेशन-पंजीयन नहीं होने पर,वसूली दंड सहित करनी चाहिए

नगर परिषद रानापुर के तत्कालीन अधिकारियों की गंभीर त्रुटि के कारण लीज-डीड का पंजीयन नहीं हुआ है,साथ ही कई दुकानों का विक्रय कई बार भी हो चुका है। जिला पंजीयक को इसे तुरंत संज्ञान में लेकर उक्त दुकानों का लीज-डीड के रिकॉर्ड जब्त कर,शासन को जो लाखों रुपए की हानि हुई है,उसकी वसूली दंड सहित करनी चाहिए,ऐसा हमारा मानना है।

दोनों पक्षों को कानूनी वैधता और सुरक्षा मिले

लीज डीड का पंजीयन अनिवार्य है,खासकर 12 महीने से अधिक अवधि के लिए। यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है ताकि दोनों पक्षों को कानूनी वैधता और सुरक्षा मिले। पंजीकरण के लिए, निष्पादन की तारीख से 4 महीने के भीतर पंजीकरण करवाना आवश्यक है। नगरीय निकायों और विकास प्राधिकरणों द्वारा दिए गए एक साल या अधिक अवधि के पट्टा विलेखों पर भी स्टांप शुल्क अनिवार्य है। पट्टा अवधि खत्म होने पर नवीनीकरण विलेख पर भी स्टांप शुल्क लागू होगा। लीज होल्ड को फ्री होल्ड में बदलने या लीज राइट्स के हस्तांतरण पर भी शुल्क देना होगा,बिना पंजीयन के नामांतरण मान्य नहीं होगा। इस कदम से दस्तावेजों में पारदर्शिता आएगी और शासन को राजस्व हानि नहीं होगी।

लिज किराए पर दी गई दुकानों का लीज डिड का रजिस्ट्रीशेन पंजीयन

मध्य प्रदेश रजिस्ट्रीकरण नियम-1939 और स्टाम्प शुल्क अधिनियम,2014 के तहत होता है,जिसमें लीज डीड-पट्टा विलेख के नवीनीकरण के लिए पंजीकरण क राना पड़ता है।

आवश्यक नियम और प्रक्रिया
पंजीकरण नियम

मध्य प्रदेश रजिस्ट्रीकरण नियम-1939 यह नियम संपत्ति के पंजीकरण से संबंधित प्रक्रिया निर्धारित करता है।

स्टाम्प शुल्क अधिनियम-2014

इस अधिनियम में लीज नवीनीकरण के लिए स्टाम्प शुल्क की गणना से संबंधित नियम शामिल हैं।

पंजीकरण प्रक्रिया

रजिस्ट्री के लिए लीज डीड और आवश्यक दस्तावेजों के साथ उप-रजिस्ट्रार के कार्यालय में आवेदन करना होता है। पंजीकरण के लिए लीज-डीड की प्रति, पहचान पत्र और पते का प्रमाण जैसे दस्तावेजों की आवश्यकता होती है।।

शुल्क

पंजीकरण के लिए निर्धारित शुल्क देना होता है,जिसमें स्टाम्प ड्यूटी और अन्य सरकारी शुल्क शामिल हो सकते हैं।

रजिस्ट्री करानी ही होगी

संक्षेप में लीज दुकानों के पंजीकरण के लिये रजिस्ट्रीकरण नियमों के तहत उप-रजिस्ट्रार के पास रजिस्ट्री करानी ही होगी। इसका पूर्ण आदेश मध्यप्रदेश राजपत्र पर रजिस्ट्री नियम 1939 और स्टाम्प अधिनियम 2014 के तहत साफ -साफ  उल्लेखित भी है। उनकी पीडीएफ  फाइलों में पंजीकरण और स्टाम्प शुल्क से संबंधित विस्तृत जानकारी भी उपलब्ध हैं। इन नियमों और अधिनियमों के अनुसार, राज्य सरकार के आदेशानुसार संपत्ति के पंजीकरण से संबंधित नियमों का पालन करना अनिवार्य है। यह डिजिटल प्रणाली के माध्यम से भी किया जा सकता है।

मध्यप्रदेश रजिस्ट्री पंजीयन नियम 1939

-यह नियम पंजीकरण अधिनियम-1908 की धारा 69 के तहत जारी किया गया है।
-नियम 35 और 36 के अनुसार,उप-पंजीयक के पास पंजीकरण से इनकार करने का अधिकार है।
यदि कोई दस्तावेज सम्यक रूप से स्टाम्पित नहीं है,तो रजिस्ट्रीकरण अधिकारी उसे जब्त कर सकता है और कलेक्टर के पास भेज सकता है।

स्टाम्प अधिनियम 2014

-यह अधिनियम पंजीकरण अधिनियम-1908 को संशोधित करता है।
-यह अधिनियम स्टाम्प शुल्क के संग्रह के लिए ई-स्टांपिंग प्रणाली,जिसे सम्पदा कहा जाता है,का उपयोग अनिवार्य करता है।

राशि राजसात कर दी जाएगी

मेरे कार्यकाल के पूर्व जो नगर परिषद की दुकानें मासिक किराए पर लीज पर दी गई है,उनका विधिवत लीज-डीड का रजिस्ट्रेशन-पंजीयन हेतु सूचना पत्र संबंधित को दिए जा रहे है और पंजीयन नहीं कराने पर,लीज निरस्ती की कार्यवाही नियमानुसार आवश्यक होगी की जायेगी। मेरे समय लिज पर दी गई दुकानों का विधिवत रजिस्ट्रेशन पंजीयन कराया जा रहा है,अगर कोई पालन नहीं करेगा तो जमा राशि राजसात कर दी जाएगी।

सुश्री दीपमाला नलवाया-नगर परिषद अध्यक्ष,रानापुर

पंजीयन जल्द से जल्द करवाये
नगर परिषद रानापुर द्वारा समस्त लीज पर दी गई दुकानों की लीज-डीड रजिस्ट्रेशन-पंजीयन नहीं होने की बात मेरे संज्ञान में आयी है। ऐसे सभी लिजी को रजिस्ट्रेशन पंजीयन कराने का सूचना पत्र दिया जा रहा है। आगे कार्यवाही से बचने के लिए,सभी ऐसे लीज धारी पंजीयन जल्द से जल्द करवाये और उसकी कॉपी नगर परिषद में आवश्यक रूप से जमा करवाये।

एल एन शर्मा सीएमओ