कल प्राचीन चमत्कारिक श्री जिनदत्तसूरी,श्री जिनकुशलसूरी दादावाड़ी मंदिर के शिखरों पर ध्वजारोहण का कार्यक्रम हुआ संपन्न

दादा गुरूदेव की अष्टप्रकारी पूजन पढ़ाई गई, शहर में निकाली गई शोभायात्रा
 

झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक। शहर के प्राचीन चमत्कारिक श्री जिनदत्तसूरी, श्री जिनकुशलसूरी दादावाड़ी मंदिर पर ध्वजारोहण महोत्सव का आयोजन कल मंगलवार को किया गया। महोत्सव अंतर्गत सभी आयोजन परम् पूज्य साध्वीरत्ना रत्नरेखा श्रीजी मसा आदि ठाणा-3 की पावनकारी निश्रा में संपन्न हुए। सभी आयोजनों में समाजजनों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रहीं। जानकारी देते हुए श्री संघ के प्रवक्ता संजय जगावत ने बताया कि निर्धारित कार्यक्रम अंतर्गत कल  सुबह 7 बजे से श्री दादा गुरूदेव की अष्टप्रकारी पूजन पढ़ाई गई। जिसकी विधि,विधिकारक ओएल जैन ने संपन्न करवाई। पूजन का लाभ अर्पित अशोककुमार सकलेचा परिवार ने लिया। 8 बजे दादा गुरूदेव की वेदी के शिखरों पर ध्वजारोहण का लाभ लाभार्थी परिवारों ने लिया। विधि-विधान से मंत्रोच्चार के साथ शिखरों पर ध्वजारोहण सपंन्न हुआ। इस दौरान मुख्य दादा श्री जिनदत्तसूरी की ध्वजा का लाभ सुरेन्द्रकुमार उदयलाल कांठी परिवार एवं दादा जिनकुशलसूरीजी की ध्वजा का लाभ अशोककुमार प्रेमचंद सकलेचा परिवार ने लेते हुए शिखरों पर ध्वजा चढ़ाई गई। 8.15 बजे से मंदिर में आरती का आयोजन हुआ। आरती में श्री संघ एवं समाज के श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दादा गुरू मंदिर की वार्षिक बोलियां भी बोली गई। 8.30 बजे ध्वजारोहण निमित्त भाता की प्रभावना का वितरण लाभार्थी हेमराज कांठी परिवार, उदेयलाल, पुखराजमल, विमलचंद, चन्द्रशेखर, सुरेन्द्र, अमित, अंकुश कांठी परिवार एवं अर्पितकुमार अशोककुमार सकलेचा, प्रेमचंद सकलेचा सकलेचा परिवार ने लिया।

बैंड-बाजों के साथ शोभायात्रा निकाली गई

दादावाड़ी से सुबह करीब 10 बजे बैंड-बाजों पर धार्मिक गीतों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें दादा श्री जिनदत्त सूरीजी मसा की प्रतिमा के सम्मुख जगह-जगह समाजजनों ने गहूली करने का लाभ लिया। शोभायात्रा में आगे पुरूष वर्ग बाद साध्वी भंगवतों के साथ बड़ी संख्या में श्राविकाएं शामिल हुई। यह शोभायात्रा शहर के दादावाड़ी से जगमोहनदास मार्ग, राजवाड़ा, लक्ष्मीबाई मार्ग, जैन मंदिर होते हुए पुनः दादावाड़ी पहुंची। जहां साध्वी भगवंत द्वारा जिन शासन में मंदिर के शिखरों पर ध्वजारोहण के महत्व को प्रतिपादित किया एवं परमात्मा और गुरू की पूजन-भक्ति का महत्व समझाया। सभी आयोजन में श्वेतांबर जैन श्री संघ के पदाधिकारियों के साथ समाजजन उत्साह के साथ सम्मिलित हुए।