यां बी सकना नी बठि रया,शुक्ल जी!- यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलवे पुलिस की पहल मेरी सवारी,भरोसे वाली

झाबुआ में 3-डी अभियान चलाने के बाद,अब रेलवे में पटरी की पाठशाला,चलाएंगे पूर्व झाबुआ पुलिस अधीक्षक शुक्ल

झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक।  भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी व झाबुआ के पुर्व पुलिस अधीक्षक पद्म विलोचन शुक्ल का नाम,उनके काम से अधिक पहचाना जाता है। मालवी भाषा का एक शब्द है सकना नहीं बैठना  यानी वो व्यक्ति जो जहां भी जाए,कुछ ना कुछ तो करता ही रहता है। झाबुआ में पुलिस अधीक्षक रहते 3-डी अभियान चलाकर उन्होंने जिले में अपनी अलग ही छाप छोड़ी थी। जिले से ट्रांसफर होकर पुलिस अधीक्षक रेल-इंदौर पदस्थ होते ही यहां भी समाज हित से जुड़कर और कल14 नवम्बर से रेल यात्रियों को जागरुक करने वाला अभियान पटरी की पाठशाला शुरु कर रहे हैं।

यां बी सकना नी बठि रया,शुक्ला जी!

जब वे झाबुआ पदस्थ में थे,तब आदिवासी समाज में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध 3-डी यानी दहेज,दारू और डीजे से दूरी, वाला जागरूकता अभियान चला चुके हैं । एसपी रेल का पदभार ग्रहण करने के बाद शुक्ल ने रेल यात्रियों के साथ स्टेशन क्षेत्र के आसपास रहने वालों को जागरूक करने के लिये रेलवे स्टेशन परिसर से पटरी की पाठशाला एवं हमारी सवारी,भरोसे वाली नामक अभियान की प्लानिंग कर डाली है।

आखिर है क्या ये पटरी की पाठशाला और हमारी सवारी,भरोसे वाली- अभियान?

इस पटरी की पाठशाला अभियान में बच्चों के लिए रेल सुरक्षा कक्षाएं, कहानी,पोस्टर व खेल के माध्यम से शिक्षा देना,गुड टच-बैड टच की जानकारी देना आदि शामिल है। रेलवे स्टेशन और उसके आसपास भिक्षावृत्ति,व्यावसायिक गतिविधियों में लगे व लावारिस घूमने वाले बच्चों की पहचान कर,उन्हें संरक्षण,शिक्षा और पुनर्वास की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा ताकि वे देश के भविष्य निर्माण में सहभागी बन सकें।

हमारी सवारी,भरोसे वाली

साथ ही रेल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए शासकीय रेलवे पुलिस-जीआरपी इंदौर का हमारी सवारी,भरोसे वाली अभियान में रेलवे स्टेशन परिसर से चलने वाले सभी आटो पर क्यूआर कोड होंगे। इसे स्कैन कर यात्री ड्राइवर की पूरी जानकारी अपने पास रख सकेंगे। यही नहीं, ड्राइवर की पहचान और विश्वसनीयता को लेकर आश्वस्त हो सकेंगे। यह पहल विशेषकर महिला एवं लड़कियों को सुरक्षा प्रदान करेगी। इसमें रेलवे स्टेशन से चलने वाले सभी आटो चालक की पहचान के लिए क्यू आर कोड बनवाए जा रहे हैं। इसमें परिसर सहित आसपास संचालित आटो चालकों का सत्यापन एवं पंजीकरण कर उनके विवरण,नाम,मोबाइल नंबर,वाहन संख्या, फोटो, पुलिस सत्यापन स्थिति आदि को आनलाइन डेटाबेस से जोड़ा जा रहा है।  प्रत्येक सत्यापित आटो पर विशेष क्यूआर कोड स्टिकर व नंबर लगाया जाएगा। इसे स्कैन कर यात्री यह जान सकेंगे कि जिस आटो से वह सफर कर रहे ह,उसका ड्राइवर कौन है....? यही नही,संदिग्ध गतिविधि या शिकायत या सामान छूट जाने की स्थिति में इसी क्यूआर कोड से आटो चालक की तत्काल पहचान संभव होगी। यह कदम स्मार्ट पुलिसिंग और डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा परिवर्तनकारी प्रयास होगा।

जागरूक समाज का निर्माण करना

महिला एवं साइबर सुरक्षा सत्र में हेल्पलाइन नंबर 139,112,1930,की जानकारी के साथ आत्मरक्षा एवं आत्मविश्वास पर भी चर्चा होगी। जीआरपी इंदौर का उद्देश्य केवल कानून- व्यवस्था बनाए रखना नहीं,बल्कि जनसहभागिता और तकनीक के माध्यम से सुरक्षित व जागरूक समाज का निर्माण करना है। हमारी सवारी,भरोसे वाली और पटरी की पाठशाला इसी दिशा में ठोस कदम हैं।

विशेष महानिदेशक रेलवे पुलिस रवि गुप्ता ने स्लोगन और क्यू आर कोड का किया विमोचन

पुलिस मुख्यालय में विशेष महानिदेशक रेलवे पुलिस रवि गुप्ता-आईपीएस से पद्म विलोचन शुक्ल ने सोमवार की दोपहर पटरी की पाठशाला और हमारी सवारी,भरोसे वाली के स्लोगन,क्यू आर कोड के पोस्टर का विमोचन करावाया। रवि गुप्ता ने विमोचन करते हुए विश्वास व्यक्त किया है कि पुलिस अधीक्षक रेलवे पीवी शुक्ल द्वारा आरम्भ किये गए दोनों अभियान भविष्य में सामाजिक चेतना के साथ-साथ अपराध की रोकथाम में भी सहायक होंगे। इस अवसर पर पुलिस उप महानिरीक्षक पंकज श्रीवास्तव भी उपस्थित थे।

पटरी की पाठशाला- अभियान से किया जा सकेगा

पटरी की पाठशाला अभियान का उद्देश्य रेल सुरक्षा,महिला सुरक्षा, साइबर जागरूकता, नैतिक शिक्षा,स्वच्छता को आदत में लाना एवं नशामुक्त जीवन के संदेश को आमजन तक पहुंचाना है। इससे स्थानीय बच्चों में नैतिक शिक्षा,अनुशासन और समाज एवं राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित होगा। इससे लावारिस घूमने वाले बच्चों का संरक्षण किया जा सकेगा।

पद्म विलोचन शुक्ल- पूर्व पुलिस अधीक्षक, झाबुआ