नामावली के पुनरीक्षण कार्य सर्वे-शादी होकर आईं महिलाओं को देना पड़ेगा,माता-पिता के प्रमाण का रिकॉर्ड
नामावली के पुनरीक्षण कार्य सर्वे-शादी होकर आईं महिलाओं को देना पड़ेगा,माता-पिता के प्रमाण का रिकॉर्ड
झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक। निर्वाचक नामावली के पुनरीक्षण कार्य सर्वे में सबसे ज्यादा परेशानी शादी होकर आईं उन महिलाओं की बनी हुई है,जो बाहर से आई हैं। ऐसे में उन महिलाओं को स्थानीय रहने का प्रमाण देना होगा। वर्ष 2003 की मतदाता सूची में उनके माता-पिता के नाम सूची में हैं,तो उनका प्रमाण का रिकॉर्ड देना होगा,तब उनकी वर्ष 2025 की मतदाता सूची से सत्यापन होना माना जाएगा। यदि माता-पिता का भी रिकॉर्ड नहीं है ,तो ऐसे में किसी भी परिवार के सदस्यों का वोटर सूची में नाम मिलने पर मैपिंग की जा सकेगी,नहीं तो नाम कट जाएगा। वहीं कई लोग एड्रेस पर नहीं मिल रहे हैं,पलायन की स्थिति होने पर भी समस्या आ रही है।
महिलाओं की परेशानी बढ़ गई
गणना पत्रक में मतदाताओं को पहले बने कॉलम में 2025 की मतदाता सूची के अनुसार जानकारी भरना है,जिसमें उस मतदाता का फोटो चस्पा होगा। नीचे बने कॉलम में 2023 की मतदाता सूची की जानकारी अपडेट करना होगी। इसी कॉलम में उन महिलाओं की परेशानी बढ़ गई है,जो ससुराल में रह रहीं है,जब मायके में थी,तब नाबालिग थीं। ऐसे में माता-पिता का वहां रहने यानि मतदाता सूची के नाम का प्रमाण देने के बाद कॉलम पूरा होगा।
सर्वे कार्य गति नहीं पकड़ पा रहा
इस वजह से समय पर सत्यापन नहीं हो पा रहा है,जिस कारण से सर्वे कार्य गति नहीं पकड़ पा रहा है। हालांकि निर्वाचन आयोग ने सर्वे कार्य को सरल बनाने के लिए 2003 की मतदाता सूची को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया है,जिसे हर आम दी गई साइड खोलकर देख सकता है कि उनका नाम 2003 की मतदाता सूची में है या नहीं,जिससे बीएलओ को भी आसानी हो गई है। इसके बाद भी सर्वे को लेकर गति धीमी बनी हुई है। सर्वे दल यानि बीएलओ ने घर घर पहुंचकर गणना पत्रक वितरित किए हैं।

