प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक नोक-झोक पर अलग हट कर,संघर्ष से सिद्धि की विशेष पेशकश संजय जैन-सह संपादक की कलम से

सीएम को उलझाने वाली लैंड पुलिंग,स्कीम वापस लेना पड़ी प्रशासन को, सीएम को गोपी नेमा ने मुद्दे समझा दिए, धमक-चमक वाली समझदारी, नादां की दोस्ती जी का जंजाल, सिंधिया ने समझाइश दी बेटे महाआर्यमन को

सीएम को उलझाने वाली लैंड पुलिंग,स्कीम वापस लेना पड़ी प्रशासन को

झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक।  आखिरकार महाकाल ने सरकार को सदबुद्धि दे ही दी कि उनकी बनाई लैंडपुलिंग स्कीम भले ही कितनी भी अच्छी हो,लेकिन भारतीय किसान संघ के विरोध का मतलब है सीएम के खिलाफ  किसानों को नाराज करना। इसी कॉलम में पहले लिखा भी था कि अधिकारियों के कारण सरकार के गले की फांस बनी लैड पुलिंग स्कीम को वापस लेना ही पड़ेगा। जैसा लिखा था,वैसा ही हुआ यह योजना वापस ले ली गई है। किसानों की जमीन पर सिंहस्थ संबंधी स्थायी निर्माण कार्य नहीं होंगे। उज्जैन में जितने भी सिंहस्थ हुए मेला क्षेत्र के किसान खुशी-खुशी जमीन देते थे,सरकार मुआवजा देने के साथ ही मेला समाप्ति के बाद किसानों को जमीन भी  सौंप देती थी।

शिवराज सिंह चौहान भी बहुत खुश होंगे

इस बार मुख्यमंत्री की नजर में नंबर बढ़ाने के लिए भोपाल और उज्जैन के अधिकारियों ने मेला क्षेत्र के किसानों की जमीन पर स्थायी निर्माण कार्य के लिए लैंड पुलिंग में जमीन लेने की योजना बना डाली। सोचा था कि सीएम शाबासी देंगे,लेकिन भूल गए थे कि भारतीय किसान संघ पर उसी आरएसएस का हाथ है,जिसकी सलाह पर सीएम सफलता की सीढ़ियां चढ़ना सीख रहे हैं। पहले लैंडपुलिंग में जमीन लेने के लिए अड़े प्रशासन को पीछे हटना पड़ा है,अब उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह भी कह रहे हैं कि अगर किसी जमीन की जरूरत सड़क,सार्वजनिक सुविधा या निर्माण कार्य के लिए पड़ेगी,तो वह जमीन कानूनी प्रक्रिया के तहत और उचित मुआवजा देकर ही ली जाएगी। लैंड पुलिंग स्कीम वापस लेने से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी बहुत खुश होंगे।

सीएम को गोपी नेमा ने मुद्दे समझा दिए

गौरतलब है कि एक ओर तो भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी में गौरव रणदिवे को महामंत्री बना कर प्रदेश अध्यक्ष हेमन्त खंडेलवाल ने इंदौर के बाहुबली नेताओं को चौंका तो दिया है,वही दूसरी ओर कहीं सीएम भी अब निगम मंडलों की नियुक्ति में भी ऐसा ही कुछ ना कर दे। इंदौर विकास प्राधिकरण अध्यक्ष पद के लिये हरिनारायण यादव और जीतू जिराती का नाम खूब चल भी रहा है,लेकिन दोनों पर कैलाश विजयवर्गीय खेमे का ठप्पा भी है। अब तो पूर्व विधायक गोपी नेमा का नाम भी चल पड़ा है। बीते सप्ताह जब मुख्यमंत्री के आगमन पर उनसे नेमा ने शहर हित के मुद्दों पर चर्चा की और सीएम ने उनकी बातों को तवज्जो दी है, तब से माना जा रहा है कि गोपी नेमा को भी सीएम खेमा किसी सम्मानजनक पद के लायक समझने लगा है। ऐसा होता है तो फिर एक और झटका कई स्थानीय नेताओं को लगेगा ।

धमक-चमक वाली समझदारी

इंदौर नगर भाजपा कार्यकारिणी की घोषणा के बाद विरोध का विस्फोट करने वाले नेताओं ने माफी जरूर मांग ली है,लेकिन पार्टी में यह तो मैसेज चला ही गया है कि इंदौर में ऐसा विरोध नगर अध्यक्ष के लिये चुनौती तो हो ही गया है। किसी भी नाराज नेता पर कार्रवाई नहीं करने की घोषणा कर के नगर अध्यक्ष ने गंभीरता का परिचय जरूर दिया है,लेकिन विरोधी इसे भी अपनी धमक-चमक बता रहे हैं।

नादां की दोस्ती जी का जंजाल

खाती समाज की अनदेखी के नाम पर भाजपा कार्यालय में हुए हंगामे,नगर अध्यक्ष के पोस्टर पर कालिख पोतने वाले कार्यकर्ताओं से पूर्व विधायक जीतू जिराती को यह सबक तो मिल ही गया कि नादां की दोस्ती जी का जंजाल ही होता है। राऊ क्षेत्र से खुद की अपेक्षा मधु वर्मा के नाम पर सहमति व्यक्त करने वाले जिराती उन बड़े पदों का दायित्व निभा चुके हैं,जहां सुमित मिश्रा को पहुंचना है। ऐसे में कोई बड़ा नेता समझ ही नहीं पा रहा है कि जिराती ने किसी कार्यकर्ता को छू किया होगा। खुद जिराती भी भोपाल-दिल्ली तक स्पष्ट कर चुके हैं कि मेरा कोई लेना-देना नहीं है।

सिंधिया ने समझाइश दी बेटे महाआर्यमन को

क्रिकेट की राजनीति में पिता ज्योतिरादित्य सिंधिया की अंगुली पकड़ कर सीढ़ी चढ़ते-चढ़ते महाआर्यमन को यह भ्रम हो गया था कि मप्र क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष बनते ही,वो चाहे जो निर्णय ले सकते हैं। एसोसिएशन की प्रशासकीय समिति में अपनी पसंद के रिपुदमन सिंह तोमर-ऊर्जामंत्री प्रद्युम्न सिंह के बेटे और धीरज पाराशर-पुरुषोत्तम पाराशर के बेटे को नियुक्त करने का मनमाना फैसला ले लिया था। बेटे के इस निर्णय को शह देने की अपेक्षा पिता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस फैसले को चार दिन बाद ही खारिज कर दिया,अब ये दोनों प्रशासकीय समिति सदस्य नहीं हैं। महाआर्यमन को भी सीख मिल गई है कि जब तक पिता हैं,तब तक कोई भी निर्णय लेने के लिये वे स्वतंत्र नहीं हैं।