कल बावन जिनालय कार्तिक पूर्णिमा महोत्सव का हुआ भव्य आयोजन- लाभार्थी परिवारों ने किया वार्षिक ध्वजारोहण
कल बावन जिनालय कार्तिक पूर्णिमा महोत्सव का हुआ भव्य आयोजन- लाभार्थी परिवारों ने किया वार्षिक ध्वजारोहण
प्रभुजी की गाजे बाजे एवं हर्षो उल्लास से निकली भव्य रथ यात्रा
झाबुआ।संजय जैन-सह संपादक। कार्तिक पूर्णिमा के मंगल दिवस पर श्री शत्रुंजय पावन तीर्थ पर अनगिनत मुनियों ने अनशन करके मोक्षगति प्राप्त की थी। इस पावन पूर्णिमा के उपलक्ष्य प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी नगर के प्राचीन एवं भव्य तीर्थ स्वरूप श्री ऋषभदेव बावन जिनालय के सभी शिखरों पर विधिपूर्वक ध्वजारोहण का कार्यक्रम गच्छापति राष्ट्रसंत आचार्य श्रीमद विजय हेमेंद्र सूरीश्वरजी मसा की समुदाय वर्तिनी विदुषी साध्वी श्री पुष्पा श्रीजी मसा की सुशिष्या प.पूज्य साध्वी रत्नरेखा श्रीजीमसा के सानिध्य में किया गया। सुश्रावक ओएल जैन ने शिखरों के विधिपूर्वक ध्वजारोहण हेतु विधि कारक के रूप में अपना पूरा सहयोग दिया।
मंगल अयोजन कुछ इस तरह किया गया
1-सर्वप्रथम कल सुबह प्रातः 6.30 बजे श्री भक्ताम्बर स्त्रोत एवं गुरु गुण इक्कीसा के पाठ कार्यक्रम की शुरुआत की गयी।
2-प्रातः 7 बजे सत्तर भेदी पूजन का आयोजन लाभार्थी जितेंद्र रुनवाल परिवार के साथ विधिकारक ओएल जैन और जैन संगीत मंडल के सहयोग से की गयी।
3-प्रातः 9 बजे बावन जिनालय के सभी शिखरों पर ध्वजारोहण लाभार्थी परिवारों द्वारा किया गया।
4-प्रातः 10 बजे प्रभुजी की रथयात्रा गाजे बाजे के साथ बावन जिनालय से प्रारंभ होकर नगर के मुख्य मार्गो से भृमण करते हुए पुनः बावन जिनालय पर पहुची।
5-प्रातः 11 बजे से साध्वी जी के व्याख्यान के पश्चात श्री शत्रुंजय तीर्थ पट के समक्ष देवनंदन 21 खमासने सहित सभी समाजजनों द्वारा किया गया। अंत मे लाभार्थी परिवार पंकज कोठारी द्वारा आरती उतारी गयी साथ ही लाभार्थी परिवार दिलीपकुमार केसरीमल जैन द्वारा भाते की प्रभावना वितरित की गई।
प्रभुजी की गाजे बाजे एवं हर्षो उल्लास से निकली भव्य रथ यात्रा
संघ प्रवक्ता संजय जगावत ने बताया कि प्रभुजी की भव्य रथ यात्रा बावन जिनालय से प्रारंभ होकर नगर के मुख्य मार्गो से भृमण करते हुए पुनः बावन जिनालय पर पहुची। रथ यात्रा के दौरान जगह जगह प्रभुजी की समक्ष समाज जनों ने गहुली की। प्रभुजी के विशाल चांदी के रथ को हर बार की तरह स्वतः श्रावकों द्वारा खेचा गया।
साधर्मी वात्सल्य रखा गया
देववन्दन के पश्चात साधर्मी वात्सल्य का आयोजन श्री संघ द्वारा रखा गया था। इसके पश्चात दोपहर 2 बजे श्री सिद्धाचल नवांणु प्रकार की पूजन का आयोजन लाभार्थी यतीन्द्र नवलखा परिवार ने किया।

