चातुर्मास पूरा होने पर धर्म सभा का आयोजन हुआ, व्यवहार में यदि शुद्धता होगी, तो हमारा आचरण शुद्ध होगा        

झाबुआ।संजय जैन-सह संपादक। शहर के बावन जिनालय के पौषध भवन में निर्विघ्न रूप से और शांतिपूर्वक चातुर्मास पूरा होने पर धर्म सभा का आयोजन कल मंगलवार को सुबह हुआ। इस दौरान पौषध भवन में विराजित साध्वी रत्न रेखा जी, साध्वी अनुभव दृष्टा जी और साध्वी कल्पदर्शित जी मौजूद रही। श्री संघ के श्रावक – श्राविकाओं की उपस्थिति में श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता द्वारा विदाई समारोह की अध्यक्षता करते हुए अपने विचार प्रकट किए गए। कमलेश कोठारी ने संघ की ओर से आभार मानते हुए चार माह की अवधि में जाने अनजाने से हुई अवज्ञा अवमानना के लिए मिच्छामी दुकड़म कहा।

व्यवहार में यदि शुद्धता होगी, तो हमारा आचरण शुद्ध होगा     

धर्म सभा में साध्वी कल्पदर्शिता जी ने प्रभु की स्तुति करते हुए स्तवन प्रस्तुत किया। जिसे श्रवण कर उपस्थित श्रावक– श्राविकाएं भाव विभोर हो उठे। साध्वी श्री ने कहा कि जैन वह है, जो सदा जागृत रहे। जैन शब्द जिन शब्दों से आया है,उन्होंने स्वयं को जान लिया है। कहा गया है कि अपने सभी भय को जिन्होंने जान लिया, उन्हें हमें अपना गुरु मानना चाहिए। हमें अपनी उन कमियों को खोजना होगा, जो हमारे भीतर मौजूद है। हमें पर कल्याणक की भावना रखी जाना चाहिए, ताकि स्वकल्याण की कामना स्वतः: पूर्ण हो जाए। अपने भीतर ज्ञान प्रकट करो। मोह का छय होना ही मोक्ष का घटित होना है। सम्यग दृष्टि अपनाने से ही हमें अपने जीवन में, जीवन जीने की कला का ज्ञान प्राप्त होगा। साध्वी अनुभवदृष्टा जी ने कहा कि हमारे व्यवहार में यदि शुद्धता होगी, तो हमारा आचरण शुद्ध होगा। आचरण शुद्ध होगा तो धार्मिक अनुष्ठान करने में हमारी प्रवृत्ति पड़ेगी। इसके फल स्वरूप हमारे कर्मों की निर्जरा करने का मार्ग प्रशस्त होगा। इस दौरान साध्वी भगवंत ने भी अपने स्थिर काल में हुई किसी प्रकार की त्रुटि के लिए क्षमा मांगी।

यह थे उपस्थित

संघ प्रवक्ता संजय जगावत ने बताया कि धर्म सभा में वरिष्ठ श्रावक धर्मचंद मेहता, हमीरमल कासवा, अशोक कटारिया, डॉ. यशवंत भंडारी, डॉ. प्रदीप संघवी, कमलेश भंडारी, निखिल भंडारी, कमलेश कोठारी, मनोज खाबिया, महेंद्र कोठारी, इंद्रमल संघवी, हेमेंद्र बाबेल, राजेश मेहता, मनोहर लाल छाजेड़, हस्तीमल संघवी, निमेष मालवी, रमेश छाजेड़, महेश कोठारी, सुनील राठौर, सुरेंद्र काठी आदि उपस्थित रहे थे।