प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक नोक-झोक पर अलग हट कर,संघर्ष से सिद्धि की विशेष पेशकश संजय जैन-सह संपादक की कलम से

भील समाज को भूले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल, इंदौर नगर अध्यक्ष के बाद सीधे प्रदेश महामंत्री, आष्टा में सीएम की भावना की अनदेखी, गडकरी को शिवराज की चिट्ठी, अब जस्टिस श्रीधरन इलाहाबाद हाईकोर्ट जाएंगे, मंडी बोर्ड पर लोन लेने का सरकारी दबाव

भील समाज को भूले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। टंट्या मामा के नाम पर कॉलेज,मूर्ति स्थापना सहित योजनाएं संचालित करने वाली सरकार के मंत्रियों को जवाब देते नहीं बन रहा है कि भाजपा की नई प्रदेश कार्यसमिति में भील समाज को किसी पद लायक क्यों नहीं समझा गया....? उल्लेखनीय है कि मप्र में भील समाज 22 फीसदी है। आपको बता दे कि 2018 में छह आदिवासी सीटों पर कहीं भी भाजपा नहीं जीती थी और 2023 के लोकसभा चुनाव में भी इन सीटों पर भाजपा की स्थिति बहुत अच्छी भी नहीं थी। मप्र भाजपा कार्यसमिति की घोषणा तो हुई,लेकिन प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल इस समाज को प्रतिनिधित्व देना भूल गए। भील लैंड की मांग उठाने वाली बाप पार्टी-भारतीय आदिवासी पार्टी को बैठे ठाले मुद्दा हाथ लग गया है। अभा भील महासंघ के लक्ष्मण बारिया,कैलाश नेनामा जैसे नेता तो भाजपा के इस रवैये को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर कर चुके हैं। फिर भी भील आदिवासी समाज को भरोसा है कि प्रदेश भाजपा समिति में अध्यक्ष खंडेलवाल ने अब भी एक-एक पद छोड़ रखा है,तो शायद नेतृत्व अपनी भूल सुधार भी लेगा।

इंदौर नगर अध्यक्ष के बाद सीधे प्रदेश महामंत्री

भाजपा की नई कार्यसमिति में प्रदेश महामंत्री पद पर गौरव रणदिवे की नियुक्ति उसी तरह चौंकाने वाली है जैसे कि इंदौर नगर अध्यक्ष पद पर उनके नाम की घोषणा वाली थी। कम उम्र में महामंत्री जैसा पद रणदिवे को नगर अध्यक्ष के रूप में किए कार्यों के सर्टिफिकेट के साथ ही इंदौर में एक नये पॉवर सेंटर का शुभारंभ भी है। ऐसे में मंत्री विजयवर्गीय का यह बयान गौर करने लायक है कि मैं जो पौधे लगाता हूं,उन्हें काटता नहीं हूं। रणदिवे को महामंत्री बनाने के बाद से उत्साहित कार्यकर्ता भी तलाश रहे हैं कि इस पौधे को उन्होंने खाद-पानी कब-कब दिया है?

आष्टा में सीएम की भावना की अनदेखी

मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव तो गौ-भक्त हैं और उनकी चिंता भी करते हैं,लेकिन आष्टा में तो नगर पालिका को मवेशियों की चिंता ही नहीं है । जिससे आष्टा में सीएम की भावना की अनदेखी तो हो रही है। शहर से गुजरने वाले भोपाल-इंदौर हाईवे, कन्नौद रोड और प्रमुख चौराहों पर मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। इन व्यस्त मार्गों पर रात के अंधेरे में कई सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। अब नागरिकों ने सीधे सीएम को ही चि_ी लिखी है कि भोपाल-इंदौर हाईवे पर जावर,सिद्धिगंज,खाचरोद,कोठरी,डोडी,मेहतवाड़ा,किलेरामा और अमलाह जैसे क्षेत्रों में मवेशियों के कारण सर्वाधिक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। दुर्घटनाओं में जिन मवेशियों की मौत हो जाती है,उन्हें सड़क किनारे फेंक दिया जाता है। इससे दुर्गंध फैलती है, जिससे राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

गडकरी को शिवराज की चिट्ठी

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखा है। उन्होंने विदिशा, रायसेन, भोपाल मार्ग की खराब स्थिति पर चिंता जताते हुए शीघ्र मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य शुरू करने की मांग की है। उन्होंने गडकरी को बताया है कि विदिशा से रायसेन और रायसेन से भोपाल तक का राष्ट्रीय राजमार्ग भारी वाहनों की आवाजाही और लगातार बारिश के कारण जर्जर हो गया है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं,जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। चौहान ने कहा कि सड़क की मौजूदा स्थिति से आम जनता को भारी असुविधा हो रही है। उन्होंने मांग की है कि मार्ग का तत्काल सर्वेक्षण कराकर मरम्मत या पुनर्निर्माण कार्य शुरू किया जाए।

अब जस्टिस श्रीधरन इलाहाबाद हाईकोर्ट जाएंगे

मप्र हाईकोर्ट के प्रशासनिक जस्टिस अतुल श्रीधरन का ट्रांसफर इलाहाबाद हाईकोर्ट में कर दिया गया है। अगले सप्ताह औपचारिक विदाई समारोह होगा। आपको बता दें कि ये जस्टिस श्रीधरन वो है, जिन्होंने दमोह में कुशवाहा समाज के परसोत्तम कुशवाहा को ब्राह्मण समाज के अन्नू पांडे का पैर धुला कर पानी पीने के साथ ही पूरे समाज से माफ़ी मांगने को मजबूर करने और मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया संबंधी बयान वाले मामले पर स्वत: संज्ञान लिया था। पहले जस्टिस श्रीधरन का ट्रांसफर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट किया जाना था,लेकिन बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनका ट्रांसफर कर दिया गया।

मंडी बोर्ड पर लोन लेने का सरकारी दबाव

भावांतर की राशि किसानों को देने के लिए राज्य शासन ने मंडी बोर्ड को पत्र लिखकर 1500 करोड़ का लोन लेने के लिए कहा है। दूसरी तरफ  संयुक्त संघर्ष मोर्चा मप्र  मंडी बोर्ड के पदाधिकारियों ने कहा है कि अगर मंडी बोर्ड ने 1500 करोड़ का लोन ले लिया तो अगले 4-5 सालों में मंडी बंद हो जाएगी। मोर्चा के संयोजक बीबी फौजदार का कहना है मंडी बोर्ड के अधिनियम में लोन लेने का प्रावधान नहीं है, फिर शासन क्यों लोन लेने के लिए दबाव बना रहा है? जबकि कई मंडियों के कर्मचारियों को अभी भी समय पर वेतन और पेंशन तक भी नहीं मिल पा रही है।