अव्यवस्थाओं के बीच मंडी प्रांगण में किसानों से शेड में व्यापारी ले रहे माल, भावन्तर योजना के दावे हो रहे खोखले साबित भरी दोपहर में खाना तो क्या पीने के पानी के लिए भी तरस रहे किसान
अव्यवस्थाओं के बीच मंडी प्रांगण में किसानों से शेड में व्यापारी ले रहे माल, भावन्तर योजना के दावे हो रहे खोखले साबित
भरी दोपहर में खाना तो क्या पीने के पानी के लिए भी तरस रहे किसान
झाबुआ/थांदला।संजय जैन-सह संपादक। प्रदेश शासन भावन्तर योजना पर बल देकर किसानों की फसलों, उनकी मेहनत का उचित दाम मिले औऱ वे आत्मनिर्भर बने,इसके लिए किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए हर सम्भव प्रयास तो कर रही है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे कुछ और ही नजर आ रही है।
अन्नदाता कड़ी धूप में सुविधाएं ढूंढ रहे
प्रदेश शासन के निर्देश पर थांदला कृषि ऊपज मंडी प्रांगण में किसानों की फसलों की नीलामी प्रक्रिया तो शुरु हो गई,लेकिन व्यापारियों व किसानों दोनों की स्थिति में ज्यादा कुछ बदलाव देखने को नही मिला है। यहाँ किसानों की अगर बात की जाए तो सोयाबीन आदि फसलों में बड़ी मात्रा में आये माल की नीलामी तो हुई लेकिन छुटपुट छोटे किसानों की फसलों की नीलामी किये बिना ही व्यापारियों द्वारा ले लिया जा रहा है। कुछ व्यापारी भी इस बात का विरोध कर रहे है, जिसका कारण लॉटरी सिस्टम से करीब 30 व्यापारियों को किसानों के शेड में जो दुकानें अलाट की गई है,उनमें जो प्राथमिक व्यापारी है, किसान वही रुक जाता है। इस तरह अन्य व्यापारी तक माल पहुच ही नही पाता है जिससे किसानों का भी आर्थिक शोषण होने की संभावना से इंकार नही किया जा सकता है। किसानों को यहाँ 5 रुपये भोजन दिया जाना था, लेकिन पीने के पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था तक नही की गई है। वही अधिकांश किसान भरी दोपहरी में बैठने की जगह तक तलाश करते देखे जा रहे है।
सबसे बड़ी समस्या माल गोदाम की
व्यापारियों की अपनी समस्या है कि उन्हें सबसे बड़ी समस्या माल गोदाम की आ रही है। व्यापारी अपने माल के साथ नकदी व अन्य जोखिम को लेकर भी चिंतित है,उनके अनुसार प्रदेश की गाइड अनुसार गोडाउन बनाने में करीब 40 से 50 लाख रुपये तक की राशि का खर्च है, ऐसे में न उनके पास जो गोडाउन है वह मंडी से काफी दूर है। मंडी के पास भी कोई गोडाउन है,जिसमें वे अपना माल रख सके। ऐसे में उन्हें माल यहाँ से देर रात तक हर परिस्थिति में अपने बाहर बने गोडाउन में ले जाना पड़ता है। जब व्यापारी नीलामी में जाकर हिस्सा लेता है,उस वक्त लोहे के चद्दर के निचे बने खुले शेड की दुकान में पड़े समान की सुरक्षा कैसे वे कर सकते है..? व्यापारी चाहते है कि मंडी या तो उन्हें जगह दे या फिर गोडाउन बना कर किराए से देवे। ऐसा अगर होता है तो मंडी प्रांगण में व्यापार करने में व्यापारियों को थोड़ी सहूलियत होगी।
सुविधाओ का है टोटा
स्थानीय प्रशासन ने शासन के निर्देशों का पालन तो किया है,लेकिन अभी समस्याओं से निपटने के लिए कोई भी व्यवस्था नही कर पाया है। उलेखनीय है कि शासन ने किसान सहायता केंद्र बना दिया है। यहाँ जल्द ही कैंटीन, बिजली और पानी आदि व्यवस्थाओं का भरोसा दिया है।
संयुक्त संचालक एस.के. गुमरे ने लिए स्थिति का जायजा
कृषि मंडी बोर्ड भोपाल के संयुक्त सचिव व इंदौर संभाग के नोडल अधिकारी एस.के. गुमरे ने स्थानीय कृषि ऊपज मंडी पहुँच कर किसानों व्यापारियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को जाना। इस दौरान मंडी सचिव जीएस सौलंकी भी उनके साथ मौजूद थे। मंडी प्रांगण में मूलभूत सुविधाओं का अभाव होने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त कर उन्हें जल्द सारी सुविधा मुहैया करने के निर्देश दिए।
भावन्तर योजना प्रारंभ की है
शासन ने कृषकों को उनकी फसलों के उचित मूल्य मिले इस हेतु भावन्तर योजना प्रारंभ की है। मंडी प्रांगण में ही कृषकों को चाय,पानी और भोजन आदि के साथ उनके विश्राम आदि की सभी सुविधाओं को भी जल्द शुरू करवा दिया जाएगा।
एस.के. गुमरे- संयुक्त संचालक कृषि मंडी बोर्ड,भोपाल

