प्रदेश के राजनैतिक और प्रशासनिक नोक-झोक पर अलग हट कर,संघर्ष से सिद्धि की विशेष पेशकश संजय जैन- सह संपादक की कलम से
प्रदेश के राजनैतिक और प्रशासनिक नोक-झोक पर अलग हट कर,संघर्ष से सिद्धि की विशेष पेशकश संजय जैन- सह संपादक की कलम से
खंडेलवाल सहज हैं,असहाय तो कतई नहीं अनोखे और अकल्पनीय अंदाज से एसीएस दुबे ने सहा गड्डों का दर्द पांचवें नंबर से आगे आएगा जबलपुर? कलेक्टर की भूमिका पर सवाल- विदिशा में अविश्वास प्रस्ताव
खंडेलवाल सहज हैं,असहाय तो कतई नहीं
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल बहुत सहज,सरल और जमीनी कार्यकर्ता से होते हुए इस पद तक पहुंचे हैं। साथ ही वे सीएम डॉ.मोहन यादव के तो विश्वासपात्र भी है ही। इस सब के बावजूद भी वे प्रदेश भाजपा कार्य समिति के साथ जिला- नगर इकाइयों की घोषणा नहीं कर पा रहे हैं । जिससे एक ओर तो प्रदेश के कार्यकर्ताओं का एक वर्ग उन्हें असहाय मानने की भूल कर ही रहा है और दूसरी ओर भाजपा संगठन की राजनीति समझने वाले,यह भली भांति समझ भी रहे हैं कि,जब मोदी-शाह राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा का उत्तराधिकारी तय नहीं कर पा रहे हैं तो खंडेलवाल राष्ट्रीय नेतृत्व की सहमति बगैर कैसे प्रदेश कार्यसमिति घोषित कर सकते हैं? यही कारण है कि प्रदेश भाजपा संगठन का गठन फिलहाल टल गया है। खंडेलवाल की टीम और निगमों-मंडलों में नियुक्तियां अब बिहार चुनाव के बाद ही शायद घोषित हो सकती है। गौरतलब है कि प्रदेश संगठन के लिये संभावित नामों में सबसे ज्यादा रस्साकस्सी बुंदेलखंड क्षेत्र के नाम को लेकर हैं। वीडी शर्मा के घोर विरोधी का नाम होने से वे शायद नाराज भी हैं। उल्लखनीय है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया कैलारस के विधायक महेंद्र यादव के नाम पर अपनी असहमति दर्ज भी करवा चुके है और वे प्रभु राम चौधरी का नाम चाहते हैं। ऐसी सारी आपत्तियों के कारण ही सूची को दिल्ली ने लौटा दिया,ऐसा हमारा मानना है।
अनोखे और अकल्पनीय अंदाज से एसीएस दुबे ने सहा गड्डों का दर्द
भोपाल की खस्ताहाल सड़कों से परेशान आम आदमी का दर्द, आखिरकार प्रशासन तक पहुंच ही गया। पिछले दिनों नगरीय प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे पुल बोगदा पहुंचे थे। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे और निगम कमिश्नर संस्कृति जैन सहित अन्य अधिकारी भी वहाँ पहुंचे थे। अनोखे और अकल्पनीय अंदाज से सीएस दुबे खुद सरकारी गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर बैठे,फिर उन्होंने अपने पास की सीट पर आयुक्त संकेत भोंडवे,पीछे की सीट पर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन और एक अन्य अधिकारी को बैठाया। इसके बाद वे खुद गाड़ी चलाते हुए शहर में तकरीबन 22 किमी तक घूमे। इस दौरान उन्हें 25 फीसदी सड़कों पर गड्ढे मिले थे। तब इन गड्ढों के जवाब में अपने आप को बचाने के उद्देश्य से गाड़ी में बैठे अधिकारियों ने पीडब्ल्यूडी और मेट्रो पर इसकी जिम्मेदारी ढोलने की कोशिश की। एसीएस तुरन्त उनकी म मंशा को भाप गए और उन्होंने उन्हें तुरंत कहा कि जनता को इससे कोई मतलब नहीं कि सड़क किस एजेंसी की है? इन्हें तुरन्त सुधार लेवे।
कलेक्टर की भूमिका पर सवाल- विदिशा में अविश्वास प्रस्ताव
विदिशा नगर पालिका की अध्यक्ष प्रीति शर्मा के खिलाफ लगातार बढ़ते विरोध के चलते अविश्वास प्रस्ताव की राह पकड़ी ही थी कि 38 पार्षदों की इस प्लॉनिंग को शिवराज सिंह के प्रिय विधायक मुकेश टंडन ने पूरी तरह से ही फेल कर दिया। डील के तहत उपाध्यक्ष संजय दिवाकीर्ति को अध्यक्ष प्रीति शर्मा ने अपने अधिकारों का प्रभार सौंप दिया। सीएमओ दुर्गेश ठाकुर ने भी फटाफट प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर उपाध्यक्ष को वित्तीय और कार्यकारी प्रभार सौंपने का आदेश भी जारी कर दिया। गौरतलब है कि अध्यक्ष प्रीति शर्मा के कामकाज को लेकर असंतोष इतना बढ़ गया था कि एक साथ 38 पार्षदों ने मिलकर उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू की थी,ऐसे में अचानक बीमारी का हवाला देकर उनके द्वारा प्रभार सौंपना राजनीतिक दबाव से बचने और विधायक मुकेश टंडन द्वारा सत्ता पर अप्रत्यक्ष रूप से पकड़ बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा भी जा रहा है। उल्लखनीय है कि अध्यक्ष को हटाने के लिए भाजपा पार्षदों द्वारा लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्ताव में कांग्रेस के जो पार्षद साथ दे रहे थे,वे उपाध्यक्ष को अधिकारों का प्रभार सौंपे जाने की रणनीति से हक्केबक्के रह गए। अब वे यह आरोप लगाने लगे हैं कि करोड़ों की डील के तहत विधायक ने निगम उपाध्यक्ष को अघोषित निगम अध्यक्ष बनवाया है और अब विधायक निगम के हर निर्माण कार्य में अपने हिस्से का दबाव भी बना रहे हैं। आपको बता दे कि इस पूरे मामले में कलेक्टर रोशन कुमार सिंह की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि अविश्वास प्रस्ताव के बदले अधिकार के प्रभार उपाध्यक्ष को सौंपे जाने पर आखिरकार उन्होंने अपने अधिकारों का उपयोग क्यों नहीं किया?
पांचवें नंबर से आगे आएगा जबलपुर?
इंदौर विकास प्राधिकरण सीईओ रहे आरपी अहिरवार जबलपुर निगमायुक्त का दायित्व संभालने के बाद से इस दिशा में काम पर लग गए हैं कि पिछली बार स्वच्छता सर्वेक्षण में पांचवें नंबर पर रहे जबलपुर को कैसे भी आगे ले आएं...... जबलपुर में नवरात्रि पर भव्यतम देवी विसर्जन समारोह में शामिल हजारों लोगों के लिये यह किसी आश्चर्य से कम नहीं रहा था कि विसर्जन समारोह वाले मार्ग को नगर निगम की टीम ने हाथोंहाथ चकाचक कर दिए था। निगम के स्वच्छता अभियान में लोगों की बढ़ती भागीदारी से अहिरवार उत्साहित हैं कि जबलपुर पक्का बाजी जीत भी सकता है।

