दो साल में दोगुने हो गए जिले में शुगर के मरीज-विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से उपचार के लिए जाना होता है बाहर

चपेट में आ रहे युवा भी टाइप 2 डायबिटीज की

झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक।  जिले में शुगर की बीमारी के मरीज दो वर्ष में दो गुने हो गए हैं। जिले में अब शुगर जैसी बीमारी के मरीज भी बढ़ते जा रहे हैं। बीते वर्षों में ये बीमारियां उम्र अधिक होने के बाद होती थी। अब ये स्थिति है कि 20 से 25 वर्ष की उम्र के करीब ही शुगर जैसी बीमारी हो रही है। चिकित्सकों का कहना है कि 2022 के मुकाबले 2023 में शुगर के मरीजों में महिलाओं के मामले बढ़े है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के चलते बेहतर उपचार का अभाव होने से मरीजों को बाहर जाकर इलाज कराने की मजबूरी बनी हुई है। चिकित्सकों का मानना है कि खानपान के बदलते तरीके व अनियमित जीवनशैली इन बीमारी को बढ़ा रही है।

चपेट में आ रहे युवा भी टाइप 2 डायबिटीज की

आमतौर पर 25 से 30 साल की उम्र खेलने की खाने की मानी जाती है, लेकिन तेजी से बदल रही लाइफ स्टाइल में यह बात फिट नहीं बैठती। 25 से 30 साल के युवा भी टाइप 2 डायबिटीज की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि हर व्यक्ति 25 की उम्र से साल में एक बार डायबिटीज समेत सभी तरह की जांच कराए।

फैक्ट फाइल

इस वर्ष अप्रैल से 14 अक्टूबर तक शुगर के 124 पुरुष व 182 महिला मरीज सामने आए। जबकि अप्रेल 2024 से इस वर्ष मार्च तक ये संख्या बढ़कर पुरुषों में 245 व महिलाओं में 354 हो गई। चिकित्सकों का कहना है कि जिस गति से शुगर के मरीज बढ़ रहे है, यह चिंता का विषय है। गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष में ही मरीजों की संख्या दुगनी हो गई है,जबकि पूरा वर्ष समाप्त होने में समय है। जिला अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि 30 साल की उम्र के बाद खून की जांच नियमित तौर पर करानी चाहिए.क्योंकि इस उम्र में खतरा काफी ज्यादा रहता है।

ये हैं डायबिटीज के लक्षण

-भूख और प्यास ज्यादा लगना
-रात में पेशाब ज्यादा होना
-घाव लगने पर ठीक न होना
-धुंधला दिखना
-पैरों में सुन्नपन
-अचानक वजन कम होना

उम्र के हिसाब से ब्लड शुगर लेवल

आयु                 ब्लड शुगर रेंज मिलीग्राम
0 से 5 वर्ष                100 से 180
6 से 9 वर्ष                 80 से 140
10 साल व अधिक       70 से 120

शुगर के मरीजों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई

जिले में दो वर्ष में शुगर के मरीजों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है,यह चौकाने वाली बात है। आश्चर्य इस बात का है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में यह बीमारी जिले में बढ़ गई है।

डॉ. एमएल मालवीय- सिविल सर्जन,जिला अस्पताल-झाबुआ।

कम उम्र में डायबिटीज के मरीज मिल रहे

इतनी कम उम्र में डायबिटीज के मरीज मिल रहे हैं कि यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि मरीज टाइप 2 का है या टाइप 1 का। टाइप 1 डायबिटीज ज्यादातर बच्चों को होती है। शरीर में इंसुलिन नहीं बनने से यह बीमारी होती है। वहीं टाइप 2 डायबिटीज लाइफ  स्टाइल, अनियमित और फैटी खान-पान और स्ट्रेस की वजह से होती है।

डॉ. एम. किराड़- जिला अस्पताल- झाबुआ।