पर्यावरण नियमों की अनदेखी-कार्रवाई नहीं होने से संचालकों के हौंसले बुलंद,दिनों दिन बढ़ती जा रही ईंट भट्टों की संख्या

बिना अनुमति के गांवों में अवैध रूप से संचालित हो रहे ईंट भट्ठे-अधिक मुनाफा के कारण हो रहा अवैध कारोबार

झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। शासन-प्रशासन के नियम कायदों को ईंट भट्टा के संचालकों ने ताक पर रख दिया है। इसके चलते वे न तो विभाग से किसी तरह की अनुमति लेना जरूरी समझते है, न ही रायल्टी की राशि जमा करते है। जिले के विकासखंड व गांव-गांव में ईंट का कारोबार चल रहा है। खनिज विभाग की अनदेखी से इनके खिलाफ  कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

दिनों दिन बढ़ती जा रही ईंट भट्टों की संख्या

लाल ईट बनाने वाले ईट भट्टा संचालकों द्वारा कई जगर्ह इंटों का निर्माण कर लाखों रुपए की कमाई की जा रही है। वहीं पर्यावरण को दूषित किया जा रहा है। जबकि ईंट भट्टे के लिए पहले खनिज व पर्यावरण विभाग से इसकी मंजूरी लेकर ईंट बनाने का कार्य किया जाता है। लेकिन क्षेत्र के रसूखदारों द्वारा बिना स्वीकृति लिए ही ईंट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है। पानी, मिट्टी, चोरी की बिजली का जमकर इस्तेमाल जमकर किया जा रहा है। इसके कारण लगातार भू-जल स्तर गिरता जा रहा है। जिले के विकासखंड व गांवों में अवैध ईंट भट्ठों का संचालन जोरों पर है। जिन पर कार्रवाई नहीं होने से संचालकों के हौसले बुलंद है। राजस्व और खनिज विभाग की उदासीनता के चलते ईंट भट्टों की संख्या बढ़ती जा रही है। ये लोग बड़े पैमाने पर ईंट का निर्माण कर शासकीय व निजी जमीन के खनन करने में लगे हुए हैं।

ईंट के व्यवसाय में अधिक मुनाफा

लोगों का मानना है कि ईंट के व्यवसाय में अधिक मुनाफा है। यही कारण है कि सारे नियम कानून को ताक पर रख कर अवैध रूप से ईंट भट्टे संचालित किए जा रहे है। लेकिन खनिज विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों को यह नजर नहीं आ रहा है। जब ईंट बनाने की अनुमति ही नहीं है फिर ये ईंटें कहां से और कैसे आ रही हैं...? यह जानने की फुर्सत विभागों को नहीं हैं।

कार्रवाई नहीं होने से संचालकों के हौसले बुलंद

जिले के विकासखंड व ग्रामीण क्षेत्र में अवैध रूप से ईंट भट्ठा संचालित हो रहे हैं। जिस पर अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। इस कारोबार से खनिज विभाग व प्रशासन को लाखों रुपए के राजस्व की हानि हो रही है।अवैध ईंट भट्टा संचालकों पर कार्रवाई नहीं होने से उनके हौसले बुलंद हैं। ईंट का अवैध निर्माण कर मोटी कमाई करने में जुटे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में इन ईंट भट्टों का कारोबार बगैर विभागीय अनुमति व रायल्टी जमा किए धड़ल्ले से चल रहा है। ऐसे ईंट भट्टों पर न तो प्रशासनिक लगाम लग पा रहा है और न ही रॉयल्टी की वसूली हो रही है।

जांच कराई जाएगी...

ईंट भट्ठा संचालन के लिए विधिवत प्रशासनिक अनुमति लेना जरूरी है। यदि ऐसा नहीं हो रहा है,तो इसकी जांच कराई जाएगी।

भास्कर गाचले, अनुविभागीय अधिकारी- झाबुआ