जिला प्रशासन का नशामुक्त भारत अभियान तो समाप्त हुआ,फिर भी गांव गांव गली मोहल्ले में बिक रही अवैध शराब बंद नहीं हुई
जिला प्रशासन का नशामुक्त भारत अभियान तो समाप्त हुआ,फिर भी गांव गांव गली मोहल्ले में बिक रही अवैध शराब बंद नहीं हुई
जिम्मेदार आखिर क्यो है मौन?-आबकारी अधिकारियों की कॉल डिटेल खंगाली जाए,तो शायद चौंकाने वाले होंगे खुलासे
झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक। जिला प्रशासन सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग अंतर्गत नशामुक्त भारत अभियान के तहत महात्मा गांधी की 156वीं जयंती के अवसर पर 2 से 8 अक्टूबर 2025 तक विभिन्न जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया,वह तो समाप्त हो गया पर आदिवासी बाहुल्य जिले के गांव कस्बे से धड़ल्ले से बिक रही अवैध शराब पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। शायद संबंधित के अधिकारियों और कर्मचारियों को जिले की हकीकत मालूम है कि किस गांव में कितनी अवैध शराब की दुकानें है और कौन अवैध शराब सप्लाई कर रहा है....? झाबुआ जिला मुख्यालय को शराब सिंडिकेट गिरोह ने अपना कार्य क्षेत्र बना रखा है और सारा अवैध शराब के नेटवर्क का संचालन भी शायद यही से होता है। वास्तविकता तो आबकारी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की कॉल डिटेल खंगाली जाएगी,तो अवश्य सच्चाई सामने आएग.ऐसा हमारा मानना है।
शराब ठेकेदार के गुर्गे करते है मारपीट
शराब ठेकेदार और उसके भागीदार शराब सिंडिकेट गिरोह ने बिहार इत्यादि से गुंडों को कार्य पर लगा रखा है,जो दिन रात काले कांच की गाड़ियों में क्षेत्र में हथियारों से लैस होकर घूमते रहते है ओर कोई बोलता या विरोध करता है,तो मारपीट करने से भी नहीं चूकते है। पूरे जिले में आतंक मचा रखा है,इन लोगों ने जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में भी भय व्याप्त है और डर के मारे कोई शिकायत भी नहीं करता है और अगर किसी ने शिकायत की भी तो इनके रसूख के आगे दब जाती है।
फल फूल रहा,अवैध शराब का कारोबार
झाबुआ शहर के साथ-साथ जिले में भी अवैध रूप से शराब का कारोबार एफएमसीजी कंपनियों की तरह फैलता जा रहा हैं। यह माना जा सकता है कि अवैध शराब पर कार्रवाई के लिए , आबकारी विभाग का दायित्व है। लेकिन यह भी सच है कि बिना पुलिस की सहमति से यह अवैध शराब का कारोबार संभव नहीं है। झाबुआ शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब तो किराना की दुकानों पर भी दूध , दही , शक्कर, चाय पत्ती के अलावा शराब भी ,इन दुकानों पर आसानी से उपलब्ध हो रही है। शायद आबकारी व पुलिस विभाग को इसकी संपूर्ण जानकारी भी है। शायद दोनों ही विभाग की कार्यप्रणाली के कारण,यह व्यापार जिले का सबसे बड़ा व्यापार के रूप में स्थापित भी हो रहा है । सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि युवा पीढ़ी इस अवैध शराब के चुंगल में फंस कर अपने भविष्य को बिगड़ रही है ,लेकिन जिम्मेदार आंखें मूंद कर बैठे हैं।
जिले भर में कई ढाबे संचालित हो रहे
नगर सहित जिले भर में कई ऐसे ढाबे संचालित हो रहे है,जहां पर आसानी से कम से कम ओर महंगी से महंगी शराब आसानी से मिल जाती है। इसी के साथ ही कई ऐसे रहवासी इलाके भी नगर में है जहां पर अवैध शराब कारोबारी अपना धंधा आसानी से चला रहे है। वही उनके द्वारा खुद यहा तक कहा जाता है कि हमें किसी का डर नहीं है। वही शराब ठेके से कंपनी के गाडियो में खुद शराब को भरकर आसपास के क्षेत्रों मे सप्लाई किया जा रहा है। वही थांदला क्षेत्र के बठ्ठा में आज भी लाखों की शराब का परिवहन अवैध रूप से आसानी से किया जा रहा है। लेकिन पुलिस के द्वारा छोटे छोटे केस बनाकर इन पर इतिश्री कर ली जाती है। आखिर इस अवैध परिवहन का सिलसिला कब तक रूकेगा? इसे बताना मुश्किल है।
अवैध शराब गुजरात में परिवहन
जिले के पेटलावद, थांदला,मेघनगर के मांडली,झाबुआ के पिटोल,राणापुर के कुंदनपुर रोड से रोजाना लाखो रुपए की शराब परिवहन कर,गुजरात में अवैध रूप से शराब सप्लाय की जा रही ओर कई गांवों में तो पुलिस चौकियों ओर थाने के सामने से अवैध शराब भरी गाड़िया निकलती भी है।
जिले में अवैध सट्टे का कारोबार
झाबुआ जिले में अवैध सट्टे का कारोबार धीरे-धीरे फलता फूलता जा रहा हैै। झाबुआ जिले के शहरी क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब तो सट्टे का कारोबार अपना पैर पसारते हुए नजर आ रहा है । झाबुआ शहर में ही अनेक स्थानों पर सट्टे के कारोबारी आसानी से नजर आते हैं । कई क्षेत्रों में यह सट्टा विगत कई वर्षों से लगातार जारी है। कई समाचार पत्रों में एवं न्यूज़ पोर्टल पर सट्टे के कारोबार को लेकर लगातार खबरों का प्रकाशन भी किया गया था। पुलिस कार्रवाई के अभाव में सट्टे के कारोबारी दिन दुगनी रात चौगुनी विकास कर रहे हैं । इनमें से कुछ सट्टे कारोबारी तो अपने आप को समाजसेवी के रूप में दर्शाने का प्रयास कर रहे हैं। जहां तक जानकारी का सवाल है शहर के करीब-करीब आमजन से लेकर वार्डवासियों तक को इन सटोरियों की जानकारी है तो पुलिस को क्यों नहीं ? और यदि पुलिस को जानकारी है,तो फिर यह सट्टे कारोबारी खुलेआम शहर में सट्टा लेते हुए क्यों नजर आ रहे हैं?
जिले में नशीली दवाइयों का विक्रय जारी
जिले में नशीले पदार्थों का सेवन भी बढ़ता जा रहा है। युवा पीढ़ी इन नशीली दवाइयों का सेवन लगातार कर रही है और लगातार अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ भी कर रही है। पूर्व में भी कई युवाओं ने, इन नशीली दवाइयों का सेवन कर अपने जीवन को समाप्त कर लिया था । यहां पर प्रश्न यह है कि यह नशीले पदार्थ जिले में कहां से आ रहे हैं....? और और कौन इन युवा पीढ़ी को उपलब्ध करा रहा है क्या पुलिस को इसकी जानकारी नहीं है क्या??? पुलिस जान कर भी अंजान बन रही है यह प्रश्न आज भी आमजनों के मन में खटक रहा है..? शासन प्रशासन के साथ-साथ पुलिस विभाग को भी जिले में हो रहे अवैध कारोबारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाना चाहिए तथा अपराधियों पर भी नकेल कसना चाहिए , जिससे जनता में पुलिस को लेकर विश्वास उत्पन्न हो ना की भय
अगली कड़ी में आपको बताएंगे............ कि जिला मुख्यालय से गुजरात के शराब परिवहन करने वाले सिंडिकेट गिरोह के सरगना का खास कौन है? जो शराब दुकान से रोजाना बंदी भी लेता ओर अवैध शराब परिवहन नेटवर्क का संचाल, बटवारा ओर देखरेख भी करता है।

