कोल्ड रीफ -कफ सिरप कांड -लापरवाही इंदौर में भी कम नहीं हुई-आयुर्वेदिक औषधि निर्माण में भी बनने वाले कफ सिरप के सैंपल भी लिए जाएं
कोल्ड रीफ -कफ सिरप कांड -लापरवाही इंदौर में भी कम नहीं हुई-आयुर्वेदिक औषधि निर्माण में भी बनने वाले कफ सिरप के सैंपल भी लिए जाएं
जिस लेब में अनियमितता मिली,उसकी जांच रिपोर्ट महीनों पड़ी रही,उसी लेब को अब दूसरी जगह भी से इसी नाम लायसेंस दे दिया
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। जहरीले कफ सिरप -कोल्ड रीफ से अकाल मृत्यु का शिकार हुए नवजात शिशुओं के मामले में इंदौर सांवेर रोड स्थित रिमेन लेबोरेटरी में बनने वाले नेचर कोल्ड- कफ सिरप से शिशुओं की भले ही मौत होने जैसी पुष्टि नहीं हुई हो,लेकिन इस लेबोरेटरी की जांच में गंभीर अनियमितता सामने आने के बाद भी इसके खिलाफ तत्काल कोर्ट में प्रकरण दर्ज नहीं हो पाया। इतना ही नहीं इसी लेब को इसी नाम से दूसरी जगह नया लाइसेंस भी दे दिया गया। उस लेब और इस लेब के संचालक भी एक ही हैं।
चल रही मामले में सुनवाई
इंदौर सांवेर रोड स्थित रेमिन लेबोरेटरी की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद भी छह महीने तक तो फाइल डीपीओ के यहां पड़ी रही थी। पिछले पखवाड़े ही इस मामले में अब कोर्ट में केस दर्ज हुआ है। रिमेन लेबोरेटरी में निर्मित होने वाले नेचर कोल्ड-कफ सिरप की जांच ड्रग इंस्पेक्टर राजेश जिनवाल ने की थी और 30 जुलाई को डीपीओ को मंजूरी के लिये जांच रिपोर्ट पेश भी कर दी थी। 29 सितंबर को डीपीओ के यहां से अनुमति मिलने के बाद ही 6 अक्टूबर को सीजेएम कोर्ट में केस लगाया जा सका,अब इस मामले में सुनवाई चल रही है।
शोकॉज नोटिस जारी कर जवाब मांगा
गौरतलब है कि रिमेन लेबोरेटरी की जांच के बाद ड्रग इंस्पेक्टर के लंबी छुट्टी पर चले जाने को लेकर यह भी प्रचारित हुआ था कि वो कही फाइल दबा कर तो नहीं बैठे गए.....? उल्लेखनीय है कि इसी दौरान इसी नाम से बिचोली हप्सी में ड्रग लाइसेंस के लिये किए गए आवेदन को ड्रग इंस्पेक्टर राजेश जिनवाल ने मंजूरी दिए जाने संबंधी,रिपोर्ट भोपाल भी भेज दी और उसका लाइसेंस भी जारी हो गया। जानकारी यह भी है कि ड्रग इंस्पेक्टर जिनवाल को रिमेन लेबोरेटरी के मामले को कोर्ट में तत्काल प्रकरण दर्ज नहीं कराने की कथित लापरवाही को लेकर विभाग ने इनको शोकॉज नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।
नया लाइसेंस भी जारी कर दिया
इस बीच यह जानकारी भी सामने आई है कि सांवेर रोड स्थित जिस रिमेन लेबोरेटरी पर कार्रवाई कर लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया है। उसी भाटिया ब्रदर्स को रिमेन लेबोरेटरी के नाम से बिचोली हप्सी में एक नया लाइसेंस भी जारी कर दिया गया। इसे लाइसेंस जारी करने से पहले भोपाल से ड्रग इंस्पेक्टर से जानकारी मांगी गई थ, लेकिन अपनी रिपोर्ट में उन्होंने कहीं भी इस बात का उल्लेख ही नहीं किया था कि इसी नाम और इन्हीं संचालकों द्वारा सांवेर रोड पर संचालित की जाने वाली रिमेन लेबोरेटरी की जांच में गंभीर अनियमितता सामने आई थी।
चार अधिकारियों पर कार्रवाई
अभी जब जहरीले कफ सिरप -कोल्ड रीफ मामले में खाद्य-औषधि प्रशासन विभाग की लापरवाही सामने आने पर स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी की रिपोर्ट पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन के उप निदेशक शोभित कोष्टा का निलंबन और ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य का तबादला कर दिया गया है। आपको बता दे कि छिंदवाड़ा के ड्रग इंस्पेक्टर गौरव शर्मा और जबलपुर के ड्रग इंस्पेक्टर शरद कुमार जैन को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। उक्त दोनों वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई होने के बाद अब शायद भोपाल में ड्रग कंट्रोल संबंधित कोई कार्य नहीं हो पाएगा,क्योंकि उक्त डिप्टी ड्रग कंट्रोलर और लाइसेंसिंग अथारिटी ही कार्यरत थे।
अन्य राज्यों से 1000 से ज्यादा दवाइयां आती हैं मप्र में
मप्र में 1000 से ज्यादा दवाइयां गुजरात,हिमाचल,बद्दी,सिलवासा,दिल्ली,केरल और कोलकाता राज्य से से आती हैं । जहरीले कफ सिरप-कोल्ड रीफ का निर्माण तमिलनाडु में हुआ है,जिसे निर्माण की अनुमति तमिलनाडु सरकार के औषधि विभाग ने दी थी। अत: निर्माण पूर्व कच्चे मटेरियल की जांच और बनने के बाद विक्रय पूर्व जांच की जाना करना,वहां के ड्रग इंस्पेक्टर का दायित्व था। अब ये कफ सिरप मध्यप्रदेश में आई,किसी भी चेक नाके पर इस तरह की कोई सुविधा भी नहीं है कि बाहर से आने वाली दवाओं के सैंपल ले सके और उसकी जांच ही कर सके। इस कारण कितनी दवाई आई...? कैसे आई..? इसका रिकॉर्ड भी स्पष्ट नहीं है। जब अचानक मौतों की जानकारी मिली तो तमिलनाडु सरकार को सूचित किया गया,वहां के सैंपल फेल होने के पश्चात यहां के सैंपल लेकर कार्यवाही तो शुरू की गई,लेकिन प्रदेश में ऐसी कोई भी लेब नहीं जो तत्काल सैंपल की जांच कर रिपोर्ट दे सके। गौरतलब है कि भोपाल लैब से रिपोर्ट आने में भी 3 दिन लग है।
लिए जाएं आयुर्वेदिक औषधि निर्माण में भी बनने वाले कफ सिरप के सैंपल भी
आयुर्वेदिक औषधि निर्माण से जुड़े प्रमुख निर्माताओं ने सरकार से अनुरोध किया है कि एलोपैथिक कफ सिरप की जांच के साथ आयुर्वेदिक औषधि निर्माण में भी बनने वाली कफ सिरप की जांच और सैंपल लिए जाने चाहिए। आयुर्वेदिक औषधि निर्माताओं का कहना है,एलोपैथी की ही तरह आयुर्वेदिक कफ सिरप बनाने की प्रोसेस और अतिरिक्त घटक एक ही होते हैं। बस मुख्य घटक फार्मूले का अंतर होता है। एलोपैथी में मोनो ग्राफ कंटेंट होते हैं,जबकि आयुर्वेद में काढ़ा बेस जड़ी बूटी और सहायक पदार्थ होता है,जो सिरप को गाढ़ा करने और उसकी स्ट्रेंथ को बढ़ाने के काम आता है।

