अगर ठेले तय समय से पहले पहुंचे तो विवाद की जिम्मेदारी निगम की होगी-60 दुकानों पर सहमत,दो सौ तो लगने ही नही देंगे
अगर ठेले तय समय से पहले पहुंचे तो विवाद की जिम्मेदारी निगम की होगी-60 दुकानों पर सहमत,दो सौ तो लगने ही नही देंगे
सराफा चौपाटी की दुकानों का मामला,अब निर्णायक बैठक के इंतजार में
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। सराफा बाजार में चौपाटी को लेकर माहौल फिर गरमा रहा है। ज्वेलर्स का कहना है ठेले वाले शाम 7 बजे से पहुंचने लगे हैं,जबकि उस समय यहां ग्राहकी चरम पर होती है। इससे न सिर्फ व्यापार प्रभावित हो रहा,बल्कि ग्राहकों को भी आवाजाही में दिक्कत आ रही है। सराफा व्यापारी एसोसिएशन ने निगम को चेतावनी दी कि अगर ठेले तय समय से पहले पहुंचे तो विवाद की जिम्मेदारी निगम की होगी। एसोसिएशन का कहना है निगम ने खुद वादा किया था कि चौपाटी की दुकानें रात 10 बजे बाद ही लगेंगी,लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा।
अब निर्णायक बैठक के इंतजार में
सराफा चौपाटी इंदौर की दुकानों को लेकर निर्णायक बैठक का इंतजार सराफा एसोसिएशन और चौपाटी एसोसिएशन दोनों पदाधिकारी कर रहे हैं। त्यौहारी सीजन में सराफा में दीपावली की चमक-दमक रहना है,ऐसे में दोनों खेमों को लगता है कि चौपाटी का फैसला शायद दीप पर्व के बाद ही होगा। त्रिपक्षीय समिति को फैसला लेना है। फिलहाल तो सराफा चौपाटी वाली दो सौ से अधिक दुकानें यथावत लग रही हैं। सराफा एसोसिएशन का साफ कहना है कि हम तो 60 दुकानों के पक्ष में ही हैं,200 दुकानें तो लगने ही नही देंगे। महापौर इंदौर पुष्यमित्र भार्गव के साथ सोना-चांदी व्यापारी और चौपाटी एसोसिएशन के पदाधिकारियों की संयुक्त बैठक के बाद तय हुआ था कि गठित की गई समिति नए सिरे से बड़ा-छोटा सराफा का अवलोकन करेंगी,आवश्यक सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा करेगी,समय निर्धारण के साथ दोनों एसोसिएशन के सुझाव सुनेगी।
अधिकतम 60-65 दुकानों को ही अनुमति दी जाए-हुकम सोनी
इंदौर चांदी-सोना जवाहरात व्यापारी एसोसिएशन अध्यक्ष हुकम सोनी ने बताया कि अपने सदस्य व्यापारियों को यह स्पष्ट कह रखा है कि चौपाटी दुकान को लेकर कोई भी नया किराया अनुबंध नहीं करें। अभी तो उतनी ही दुकानें लग रही हैं,लेकिन निर्णायक बैठक में एजेंडा रहेगा कि चौपाटी के लिये अधिकतम 60-65 दुकानों को ही अनुमति दी जाए। इससे अधिक दुकानों को मंजूरी दी जाती है,तो एसोसिएशन किसी तरह का समझौता कतई नहीं करेगा। हमारा यह भी सुझाव रहेगा कि जिन 60-65 दुकानों पर सहमति बने,तो वो सारी दुकानें भी रोड के एक तरफ ही लगें,अभी रोड के दोनों किनारों पर लग रही हैं। रोड के एक तरफ दुकानें लगने से ग्राहकों को आवा-जाही में परेशानी भी नहीं होगी। अभी तो हालत यह है कि बड़ा सराफा,छोटा सराफा के साथ ही मोरसली गली,शक्कर बाजार,बजाजखाना चौक तक खान-पान की दुकानें फैली हुई हैं। व्यापारियों का यह भी कहना है कि चौपाटी में केवल पारंपरिक और वर्षों से लग रही दुकानों को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार-राम गुप्ता
इंदौर सराफा चौपाटी एसोसिएशन अध्यक्ष राम गुप्ता का कहना है कि बैठक जब भी हो,फैसला तो समिति को ही करना है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सराफा चौपाटी के सुचारू संचालन और प्रबंधन के लिए बनाई गई समिति की बैठक अब त्योहारी सीजन के बाद ही होगी। इस बैठक के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि सराफा चौपाटी भविष्य में किस स्वरूप में नजर आएगी? महापौर ने पहली बैठक में सौंदर्यीकरण और आवश्यक सुधार, ग्राहकों की सुविधा संबंधी आश्वासन दिया था, हम भी निर्णायक बैठक का इंतजार कर रहे हैं।
संवाद और समन्वय का शहर
सराफा के व्यापारी इंदौर की पहचान हैं,उनके सहयोग से ही शहर ने देशभर में अलग छवि बनाई है। इंदौर संवाद और समन्वय का शहर है। व्यापारियों के सहयोग से चौपाटी को पारंपरिक दुकानों के साथ एक सुरक्षित,सुंदर और अनुशासित स्वरूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
पुष्यमित्र भार्गव- महापौर,इंदौर
हम भी चौपाटी धरोहर के पक्ष में
चौपाटी इंदौर की धरोहर है,हम इससे सहमत भी है। महापौर ने बाजार की बेहतरी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आश्वासन दिए हैं। हमारे मुद्दों का हल निकल जाए,यही तो चाहते हैं हम। हम तो महापौर के साथ निर्णायक बैठक का इंतजार कर रहे हैं।
हुकम सोनी- अध्यक्ष,सराफा एसोसिएशन,इंदौर
सराफा एसो.और महापौर का आभार
महापौर यदि पारंपरिक दुकानों को ही सराफा चौपाटी के लिए अनुमति देते हैं,तो हमारी सहमति है। खिलौने,साउथ इंडियन फूड,कपड़े,जूते-चप्पल की दुकानें हटाते हैं तो हमें कोई आपत्ति नहीं। हमारे सदस्य दुकानदार हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार हैं।
राम गुप्ता-अध्यक्ष, चौपाटी संचालक एसोसिएशन, इंदौर

