मनाया गया था 28 सितंबर को वर्ल्ड रेबीज-डे, 40 फीसदी बच्चे होते हैं शिकार-कई दिनों बाद दिखाई देते हैं रेबीज के लक्षण
मनाया गया था 28 सितंबर को वर्ल्ड रेबीज-डे, 40 फीसदी बच्चे होते हैं शिकार-कई दिनों बाद दिखाई देते हैं रेबीज के लक्षण
झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक। हर साल की तरह वर्ल्ड रैबीज-डे 28 सितंबर को मनाया गया था। इस दिन को मनाने के पीछे लोगों को इस जानलेवा रोग के प्रति जागरूक करना होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार रेबीज से दुनिया भर में हर वर्ष लगभग 59 हजार लोगों की मौत होती है। जिनमें 40 फीसदी बच्चे हैं। इस दिन को मनाने की शुरुआत साल 2007 में हुई थी। यह यूरोट्रोपिन लाइसिसिवर्स वायरस से फैलता है। यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। इंसान के शरीर में यह वायरस डॉग, बिल्ली, बंदर, चमगादड़, चूहा, सियार, भालू, खरगोश जैसे जानवरों के काटने से प्रवेश करता है। यह वायरस पालतू जानवरों के चाटने-काटने पर भी शरीर में प्रवेश कर सकता है। व्यक्ति का खून जब जानवरों की लार के संपर्क में आता है तो उसे रेबीज का खतरा बढ़ जाता है। इस जानलेवा रोग के लक्षण व्यक्ति में कई दिनों बाद नजर आते हैं।
ये हैं रेबीज के लक्षण
बुखार, सिरदर्द, घबराहट, बेचैनी, चिंता और व्याकुलता, भ्रम की स्थिति, खाने-पीने निगलने में कठिनाई, बहुत अधिक लार निकलना, पानी से डर लगना,अनिद्रा, एक अंग में पैरालिसिस यानी लकवा मार जाना जैसे लक्षण होते हैं।
जानवर काट ले तो ऐसा करें
अगर किसी व्यक्ति को डॉग-बंदर ने काट लिया हो, तो उस जगह को 10 से 15 मिनट के लिए पानी-साबुन से साफ करें। उसके बाद बिना देर किए डॉक्टर के पास जाकर इलाज करवाएं। डॉक्टर की सलाह बिना इलाज न करें। जख्म पर लाल मिर्च लगाने या घरेलु उपचार की कोशिश नहीं करें। वैक्सीन लगवाएं।
इस तरह करता है प्रभावित
रेबीज वायरस व्यक्ति के नर्वस सिस्टम में पहुंचकर दिमाग में सूजन पैदा करते हैं। जिसकी वजह से व्यक्ति कोमा में चला जाता है या उसकी मौत हो जाती है। इसके अलावा यह वायरस, मानव त्वचा या मांसपेशियों के संपर्क में आने के बाद रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क की ओर प्रसारित हो जाता है। इस वायरस के मस्तिष्क में पहुंचने के बाद इसके लक्षण और संकेत संक्रमित व्यक्ति में दिखाई देने लगते हैं।
डॉ.एम. किराड़- जिला अस्पताल, झाबुआ

