अशोकनगर में 5 अक्टुबर को आईजा का छठवां अद्भुत और गरिमामय राष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ आयोजन.........
एक ही लक्ष्य-धर्म के नाम व्यापार और और शिथिलाचार ना हो...... हार्दिक हुंडिया
झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक। पूज्य सुधा सागरजी महाराज के सानिध्य में और आईजा मप्र के अध्यक्ष राजीव सैनानी के नेतृत्व में छठवां ऑल इंडिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (आईजा) का अद्भुत और गरिमामय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन परम पूज्य आध्यात्मिक संत निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज, क्षुल्लक गंभीर सागर जी महाराज,क्षुल्लक श्री वरिष्ठ सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री विदेह सागर जी महाराज के सानिध्य में रविवार 5 अक्टुबर की दोपहर सुभाष गंज मैदान में हुआ। इस दौरान आईजा द्वारा परम पूज्य आध्यात्मिक संत निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज को राष्ट्रसंत की उपाधि से अलंकृत किया गया और पधारे अतिथियों का सम्मान किया गया।
व्यक्तिगत टिप्पणी और कषाय को अपने लेखन में लाना नही चाहिए...... मुनि पुंगव श्रीसुधासागर जी महाराज...
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि कोई भी कला छोटी नहीं होती है। आपके पास कलम है,जो एक अधिकार है। पत्रकार कलम के माध्यम से देश का भाग्य लिख सकता है। आप कलम के माध्यम से आवश्यक रूप से किसी गरीब की मदद करने की भावना रखे। आप जो भी खबर लिखते है,उसे कई लोग विश्वास के साथ प?ते है। कलम के अधिकार से कभी भी व्यक्तिगत टिप्पणी और कषाय को अपने लेखन में लाना नही चाहिए। जिस प्रकार हम साधु का कोई भी कितना ही अपमान कर दे,तब भी हम साधु बुरा नहीं मानते है,ऐसे ही आपकी लेखनी में भी किसी के प्रति बदले का भाव कतई नही आना चाहिए।
एक ही लक्ष्य-धर्म के नाम व्यापार और शिथिलाचार ना हो....हार्दिक हुंडिया
सम्मेलन को संबोधित करते हुए हार्दिक हुंडिया ने कहा कि आज धर्म के नाम पर व्यापार करने की प्रवृत्ति,सर्वथा जिन शासन की आज्ञा के विरुद्ध है। इस मूद्दे पर सभी पंथों को जागृत कर,आवाज़ उठाने की क्षमता सिर्फ पत्रकारो के पास ही है। आईजा के माध्यम से अब जैन पत्रकार,पूरी ताकत के साथ अलर्ट मोड पर आ भी चुके है,जिसके चलते अब धर्म के नाम अधर्म करने वाले सतर्क भी हो रहे है। मैं श्वेतांबर हूं, मैं तेरा पंथी हूं,मैं दिगम्बर हूं,मैं स्थानक वासी हूं......सारे संप्रदायो को यह बात भूल कर सबसे पहले हम जैन है,इस बात को क्षण भर कभी भी अपने स्मरण से नहीं निकलने देना चाहिए। सभी जैन अपने अपने पंथ का अनुसरण अवश्य करे,लेकिन जब प्रभु महावीर के शासन की बात आती है,तब सिर्फ और सिर्फ उनके द्वारा दिए गए सिद्धांतों का परिपालन एक होकर अवश्य करना चाहिए। आपको बता दें कि अभी आईजा का उद्देश्य कुछ हद तो सफल भी चुका है। उपरोक्त लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु,हमें सिर्फ ऐसे साधुओं का सानिध्य और मार्गदर्शन की आवश्यकता है,जिनके पास जैन शासन के गौरव को सुरक्षित करने का नित्य चिंतन हो। देश का 24 प्रतिशत टैक्स भरने वाले हम जैन धर्म के अनुयायी है। फिर भी आज हमारा अस्तित्व क्या है....? उल्लेखनीय है कि आबादी के प्रतिशत से हमारी संख्या काफी कम है,बावजूद इसके हम चार संप्रदाय में ही नहीं बल्कि अब हम कई भागो में बट चुके है। यदि हम पूरे आकाश की तरह फट रहे है,तो इसकी रफू कहा और किधर से कर पाएंगे....? हमारी स्थिति दिनों दिन काफी दयनीय भी होती जा रही है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि शायद एक दिन हम अपने अस्तित्व को ही खो देंगे,जो एक चिंतनीय विषय तो है। हमारे अस्तित्व को हम तब ही सुरक्षित रख पायेंगे,जब हमारे समाज के सभी पंथों में एकता होर्गी। इसी एकता को बनाने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ऑल इंडिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (आईजा)की स्थापना लगभग एक दशक पूर्व में की गयी थी,जो आज एक वट वृक्ष की तरह पूरी खड़ा भी है। एकता के पुनीत कार्य को पूर्ण साकार रूप देने की क्षमता,अब सभी जैन समाज के कलमकारो के हाथों में ही है।
छठे गरिमामय राष्ट्रीय सम्मेलन में यह थे उपस्थित......
इस गरिमामय छठे राष्ट्रीय सम्मेलन में मध्यप्रदेश महिला मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष एवं सागर की सांसद लता वानखेड़े मुख्य अतिथि थी। पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य,पूर्व विधायक जजपाल सिंह-जज्जी,पूर्व विधायक सुनील जैन,नपाध्यक्ष नीरज मनोरिया भी विशेष रूप से उपस्थित थे। साथ ही आईजा के राष्ट्रीय अध्यक्ष-हार्दिक हुंडिया, प्रदेश अध्यक्ष-राजीव सैनानी,राष्ट्रीय सलाहकार- प्रदीप जैन,प्रदेश सलाहकार अजय जैन, महासचिव अंकित जैन, मीडिया प्रभारी जीवन लाल जैन,प्रदेश उपाध्यक्षो में सौरभ जैन,उमेश जैन (दबंग देश)और संजय जैन (सह संपादक-गिद्ध दृष्टि) सहित भारत वर्ष से आये लगभग 250 से अधिक जैन पत्रकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।

