कांग्रेस नेताओं को सत्ता की थी छटपटाहट या थी जनता की चिंता?-जीवन बचाओ आंदोलन था या कांग्रेस बचाओ आंदोलन?-नगर की जनता
कांग्रेस नेता मुख्य मुद्दे से भटके और वरिष्ठ नेता मंच से कांग्रेस के लिए वोट मांगते नजर आए
झाबुआ/मेघनगर । संजय जैन-सह संपादक। प्रदेश के झाबुआ जिले के मेघनगर औद्योगिक क्षेत्र में कांग्रेस का जीवन बचाओ आंदोलन जनसमर्थन जुटाने में पूरी तरह से विफल नजर आया, जबकि जिले में दो कांग्रेस के विधायक भी है। एक तो थांदला के वीर सिंह भूरिया और दूसरे झाबुआ के डॉ.विक्रांत भूरिया आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आंदोलन के तहत मेघनगर में रोड शो किया और मंडी प्रांगण में जनसभा को संबोधित किया। लेकिन अधिकतर देखा गया कि मंच पर नेताओं का फोकस जनमुद्दों और प्रदूषण से अधिक चुनावी वोट मांगने पर ही रहा।
केमिकल युक्त रंगीन पानी प्रशासन को पिलाऊंगा
जीतू पटवारी ने सभा को संबोधित करते हुए झाबुआ के मेघनगर क्षेत्र में केमिकल फैक्ट्री से हो रहे प्रदूषण का ज्वलंत और जनता की आवाज का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इन फैक्ट्रियों की वजह से क्षेत्र का पर्यावरण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। जल जंगल, जमीन, पशु, पक्षी और किसान सभी इसकी चपेट में आये है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये प्रतिबंधित केमिकल प्लांट को गुजरात से लाकर यहां स्थापित कर दिए गए है। जब अधिकारियों से इन प्लांट्स में स्थानीय लोगों की संख्या पूछी जाती है तो कोई जवाब नहीं मिलता है,सिर्फ निराशा ही हाथ लगती है। उन्होंने प्रशासन को खुली चेतावनी दी कि यदि 2 माह के भीतर फ़िल्टर प्लांट सुचारू रूप से नही चलेगा,तो मैं अचानक बिना बताए निरीक्षण के लिए आऊंगा,यदि स्थिति में बदलाव नही आया तो यही केमिकल युक्त रंगीन पानी प्रशासन को पिलाऊंगा। भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए पटवारी ने कहा प्रदेश में ऐसा कोई विभाग नहीं है,जहा बिना रिश्वत दिए कोई काम होता है। पटवारी ने कैलाश विजयवर्गी को आड़े हाथों लेते हुए कुकृत्य मंत्री भी कहा,साथ ही बीजेपी सरकार को पूरी तरह विफल भी बताया।
प्रदूषण का,मुख्य मुद्दा पूरी तरह से ही भटक गया
आंदोलन के दौरान मंच पर कांग्रेस नेता मुख्य मुद्दों से भटक कर कांग्रेस की सरकार बनाने और चुनाव प्रचार में लग गए और खुलकर कांग्रेस के लिए वोट मांगने लग गए थे। जिससे आम जनता के बीच भटकाव का माहौल भी देखा गया। यह बात नगर के लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जीवन बचाओ आंदोलन को लेकर एक ओर तो कांग्रेस भले ही गंभीर रही,लेकिन दूसरी ओर आयोजन का मुख्य मुद्दा प्रदूषण का पूरी तरह से ही भटक गया। भाषणों को तो सुनकर ऐसा ही महसूस हुआ कि कांग्रेस मुख्य मुद्दे के बजाय सत्ता प्राप्ति के लिए छटपटा रही हो।
कांग्रेस विधायक के बिगड़े बोल
कांग्रेस विधायक की विवादित जुबान धर्म देवी और धाम पर की गयी टिप्पणी से अब जनता आक्रोशित हो रही है। ऐसे पवित्र धाम रामदेवरा का नाम लेकर उन्होंने न केवल आदिवासी समाज की भावनाओं को आहत किया,बल्कि पूरे हिंदू समाज के आस्था केंद्र पर चोट पहुंचाई। जिससे कांग्रेस पार्टी के दोहरे चरित्र और हिंदू विरोधी मानसिकता का लगभग पर्दाफाश हो गया। नवरात्रि के पवित्र पर्व में जब पूरा देश देवी शक्ति की आराधना,उपासना और पूजा में डूबा हुआ है, ऐसे समय में विधायक ने मातृशक्ति को बाईया जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित भी किया। गौरतलब है कि वे तो आंदोलन के पहले यह भी कह रहे थे कि कि हम प्लांटों पर जाकर ताला लगा देंगे,लेकिन इस बात का उन्होंने तनिक भी जिक्र ही नही किया, ऐसा क्यो यह तो वे ही बेहतर बता सकते है...? क्योंकि यह जो पब्लिक है कि सब जानती है
कांग्रेस विधायक ने हिंदू देवी देवता का अपमान किया है.-भाजपा जिलाध्यक्ष
भाजपा के जिला अध्यक्ष भानू भूरिया ने इस पर घोर निंदा व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है कि कांग्रेस विधायक हिंदू धर्म और उनकी परंपराओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी नही की हो। जहां एक ओर भाजपा के जनप्रतिनिधि क्षेत्र की जनता की सेवा और विकास कार्य में जुटे हैं,वहीं कांग्रेस विधायक हिंदू देवी देवताओं का अपमान कर रहे हैं। उनकी पार्टी तो सत्ता में आने से पहले ही आपस में लड़ने लगी है। अब जनता ने मन बना लिया है कि कांग्रेस का आने वाले चुनाव में जिले से भी सुपड़ा साफ कर देगी।
कांग्रेस में गुटबाजी खुलकर सामने आ गयी
आंदोलन में तो कांग्रेस की छटपटाहट सिर्फ सत्ता हासिल करने जैसी नजर आई। मजेदार बात तो यह है कि अभी सरकार तो बनी नहीं और उसके पहले ही पटवारी ने मंत्री पद तक का बटवारा कर डाला। कही कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पटवारी ने नेताओं को गुटों में बांटकर कौन मंत्री बनेगा का खेल तो नहीं खेल लिया?
आस्था का अपमान बर्दाश्त नहीं,हिंदू युवा जनजाति संगठन ने थांदला विधायक का फुका पुतला
थांदला विधायक वीर सिंह भूरिया के विवादित बयान ने आदिवासी समाज की धार्मिक आस्थाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है। इस असंवेदनशील बयान से आदिवासी समाज में गुस्से की लहर दौड़ गई। हिंदू युवा जनजाति संगठन ने विधायक का पुतला दहन कर तीखा विरोध दर्ज भी करा दिया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने नारे बाजी करते हुए चेतावनी दी कि यदि विधायक ने खुले मंच से समाज से माफी नहीं मांगी,तो जन आंदोलन और उग्र रूप धारण भी करेगा। उन्होंने कांग्रेस पार्टी से यह भी मांग की है कि ऐसे नेताओं पर कार्रवाई हो,अन्यथा आदिवासी समाज कांग्रेस के खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन खड़ा करेगा।
हो गया या आंदोलन अब आगे क्या?-जीवन बचाओ आंदोलन था या कांग्रेस बचाओ आंदोलन?
नगर की जनता से इस आंदोलन के बाद हमारी टीम ने चर्चा की तो कुछ लोगों ने व्यंग करते हुए कहा कि हम तो पिछले कई वर्षों से दोनों प्रमुख दलों का प्रदूषण के मुद्दे पर आंदोलन देखते आ रहे है,लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। हमारा तो दोनों ही दलों के नेताओं को एक ही सुझाव है कि लाखो रुपये आंदोलन में खर्च न करे वे सिर्फ हर प्लांट पर सीसीटीवी लगाने का खर्च ही वहन कर लेवे और उस पर अपनी पैनी नजर रखने हेतु खुद ही एक सेंटर खोल देवे। यदि वे यह खर्च वहन करने में सक्षम नही है,तो हमसे कहे हम चंदा दे देते है। लेकिन ध्यान रहे,हमसे चंदा लेने के बाद वोट भी तो हम से मांगने आता है। कुछ लोगों ने यह तक कह दिया कि यदि प्रदूषण से कोई भी दल मुक्ति नहीं दिलाएगा तो हम पूर्ण रूप से आने वाले सभी चुनावो का समस्या हल नही होने की स्थिति में बहिष्कार करेंगे। कुछ लोगों ने रोष पूर्वक कहा कि यह जीवन बचाओ आंदोलन था या कांग्रेस बचाओ आंदोलन?

