पहले लिया गया था जीरो टॉलरेंस की नीति हेतु शिकायत पेटी लगाने का फैसला -खुले सांड की तरह हो जाएंगे भ्रष्टाचारी-आमजन
अब सीएम हेल्पलाइन पर झूठी शिकायत दर्ज ओर ब्लैकमेल करने वालो पर होगी कार्यवाही-सभी कलेक्टर को मिले निर्देश,तैयार करें सूची
झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक। प्रदेश सरकार ने सीएम हेल्पलाइन की शुरुआत लोगों की त्वरित समस्याओं का निदान करने के लिए की थी। सरकारी विभागों में काम न होने पर अपनी शिकायत सरकार तक पहुंचाने के लिए शुरू की गई सीएम हेल्पलाइन कुछ लोगों के लिए अवैध वसूली का साधन बन गई है। अब सरकार ऐसे लोगों पर सख्ती करने जा रही है,जो इसका उपयोग ब्लैकमेलिंग के लिए कर रहे है। सरकार ने लगातार शिकायतें कर अधिकारियों -कर्मचारियों को ब्लैकमेल करने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। राज्य सरकार अब ऐसे शिकायतकर्ताओं का चिह्नित करने जा रही है,जो लगातार शिकायतें कर अफसरों-कर्मचारियों को ब्लैकमेल कर रहे है। लेकिन ब्लैकमेल करने वालो ने सीएम हेल्पलाइन को कमाई का जरिया बना लिया है साथ ही इसकी आड में लाखो करोड़ों की कमाई ब्लैकमेल करते हुए कर चुके है।
सभी कलेक्टर को मिले निर्देश,तैयार करें सूची
लोक सेवा प्रबंधन विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि जिले में ऐसे शिकायतकर्ताओं की सूची तैयार की जाए,जो आदतन और झूठी शिकायत दर्ज करा रहे है। इसके लिए राज्य शासन ने सभी कलेक्टरों को एक फॉर्मेट भी भेजा है, जिसमें शिकायतकर्ता का नाम,नंबर, उनके द्वारा अब तक दर्ज कराई गई शिकायतें और उस पर अधिकारियों की टिप्पणी दर्ज की जाएगी। यह पहली बार है जब राज्य शासन ने आदतन शिकायतकर्ताओं की जानकारी मांगी है।
जबरन शिकायत क्लोज कराई जाती है
झूठी शिकायतें करने वालों के खिलाफ तो सरकार ने कार्रवाई की तैयारी कर ली है,होनी भी चाहिए,लेकिन दूसरी तरफ इस प्रकार के भी तमाम केस आ रहे हैं कि अधिकारी खासकर पुलिस विभाग के लोग शिकायतकर्ता को भांति-भांति के तरीके से प्रताड़ित करत है। जबरन शिकायत क्लोज कराई जाती है। इसके अलावा सीएम हेल्पलाइन में भी कम विसंगतियां नहीं हैं,कई बार सही शिकायत करने वालों की शिकायत बिना निस्तारण के बंद कर दी जाती है।
पहले शिकायत पेटी लगाने का फैसला लिया था
दरअसल पहले भी मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करना शुरू किया था। 29 नवम्बर 2024 को सरकार ने प्रदेश के सभी सरकारी दफ्तरों में शिकायत पेटी लगाने का फैसला लिया गया था। जारी आदेश के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने इसे लेकर आदेश भी जारी कर दिया था। शासन के ध्यान में यह तथ्य आया गया था कि कतिपय विभाग प्रमुखों द्वारा उक्त निर्देशों के अनुरूप कार्यवाही नहीं की गई है। बता दें कि ये निर्देश पहली बार जारी नहीं किया गया था। इससे पहले तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने 16 दिसम्बर 2011 को निर्देश जारी किए गए थे,जिसके बाद डॉ.मोहन यादव ने 29 नवम्बर 2024 को भी जारी किया था। एक ओर तो अभी तक जीरो टॉलरेंस की नीति हेतु अधिकतर कार्यालयों के बाहर शिकायत पेटी नहीं लगी,वही दूसरी ओर अब सीएम हेल्पलाइन हेतु नया निर्देश भी जारी कर दिया गया।
सभी खुले सांड की तरह हो जाएंगे
जब इस निर्देश पर लोगो की प्रतिक्रिया जानने की लिए हमारी टीम पहची,तो कुछ लोगो का कहना था कि ऐसे एक्टिविस्टों के कारण भ्रष्टाचारी खुले आम भ्रष्टाचार करने से डरते तो थे। अब इस निर्देश के बाद से तो वे सभी खुले सांड की तरह हो जाएंगे,जिन पर किसी का भी नियंत्रण नहीं रह जायेगा। कुछ लोगो ने चटखारे लेते हुए कहा कि यदि सरकार को लगता है कि सीएम हेल्पलाइन के एक्टिविस्ट,इसके जरिए ब्लैकमेलिंग कर लाखों रुपये कमा रहे है,तो इसमें गलत क्या है....? देखा जाय तो अफसर-कर्मचारी ब्लैकमेल तभी ही होता है,जब उसने कोई अक्षम्य कृत्य या किसीका शोषण किया होता है। यदि वह साफ पाक रहता तो उसे ऐसे लोगो को रुपये देने की जरूरत ही क्यो पड़ती....? ऐसे भी कहा ही जाता है कि डाकू के घर डाका डालना कोई पाप भी नही होता है। कुछ लोगो ने तंज कसते हुए बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह निर्देश तो सिर्फ भ्रष्टाचारियों और उनके ऊपर के तमाम लोगो के हित को साधने के लिए ही जारी किया गया है। कही यह निर्देश सिर्फ उन तमाम लोगो तक पहुचने वाली राशि में इजाफा करने के उद्देश्य से तो जारी नहीं किया गया है....? अधिकतर लोगों की एक राय थी कि सरकार को इस निर्देश पर पुन: विचार जरूर करना चाहिए,आगे उनकी मर्जी.......हम तो आम जन है,हमारे नसीब में इन भ्रष्टाचारियों को झेलना जो लिखा है।

