संघर्ष से सिद्धि की विशेष पेशकश संजय जैन-सह संपादक की कलम से
सिंधिया राजघराने की बुआ-भतीजे को कोर्ट की सलाह-अर्द्ध कुंभ में नासिक सीखने जाएंगे- बुला रही है मैहर वाली माता-आदिवासी उतरे सड़क पर,ज़मीन के बदले ज़मीन की मांग- एक बंदरिया से कराया लोकार्पण,जो याद रहेगा सिंधिया राजघराने की बुआ-भतीजे को कोर्ट की सलाह
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक राजमाता विजयाराजे सिंधिया की बेटियों वसुंधरा राजे,यशोधरा राजे और उषा राजे ने अपने भतीजे ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ सिंधिया राजघराने की संपत्ति को लेकर 2010 में दावा पेश किया था। उनकी दलील थी कि 40 हजार करोड़ की पैतृक संपत्ति में बेटियों का भी बराबरी का अधिकार है। दूसरी ओर ज्योतिरादित्य ने भी इस संपत्ति पर अपना अधिकार जताया है। मामला पहले जिला अदालत में चला,लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 2017 में यह ग्वालियर हाईकोर्ट पहुंचा,यहां इसे सिविल रिवीजन के रूप में दर्ज किया गया। ग्वालियर हाई कोर्ट ने ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं को 90 दिन में आपसी सहमति से समाधान का आदेश दिया है। 15 साल से चल रहे इस विवाद में 28 पक्षकार और 13 ट्रस्ट शामिल हैं। सिंधिया परिवार का 12.40 लाख वर्गफीट में बना जयविलास पैलेस है,जिसकी कीमत लगभग 10 हजार करोड़ रुपये है। आजादी के समय के सिंधिया परिवार के 100 से अधिक कंपनियों के शेयर थे। शिवपुरी में माधव विलास पैलेस,हैप्पी विलास और जार्ज कैसल कोठी,उज्जैन में कालियादेह पैलेस, दिल्ली में ग्वालियर हाउस,राजपुर रोड पर एक प्लाट और सिंधिया विला,पुणे में पद्म विलास पैलेस,वाराणसी में सिंधिया घाट और गोवा में विठोबा मंदिर सहित अन्य संपत्तियां भी हैं जिनका भी बंटवारा होना है।
एक बंदरिया से कराया लोकार्पण,जो याद रहेगा
भिंड में घायल पशु-पक्षी और जानवरों की सेवा के लिए संचालित आश्रम में इंसानियत ग्रुप द्वारा नवनिर्मित हॉल का उद्घाटन किसी मंत्री या नेता से नहीं,बल्कि एक बंदर रोमा से कराया। तीन महीने पहले रोमा नाम की बंदरिया घायल अवस्था में मिली थी। उपचार के बाद वो ठीक हो गई तो उसी से उद्घाटन करवाया गया। इंसानियत ग्रुप साल 2013 से सक्रिय है। इस ग्रुप से जुड़े करीब 150 लोग अपने नाम के साथ उपनाम नहीं लगात है। वे अपने नाम के बाद सिर्फ इसानियत ही लिखते हैं। संस्थापक अनंत भी अब अनंत इंसानियत के नाम से ही जाने जाते हैं। यह ग्रुप अब तक 3 हजार से अधिक घायल और बीमार जानवरों का इलाज कर चुका है। खास बात यह है कि इसके लिए उन्होंने कभी सरकार से आर्थिक मदद नहीं ली हैं। सदस्य मिलकर थोड़ा-थोड़ा धन इकट्ठा करते हैं और उसी फंड से इन बेजुबानों की सेवा करते हैं। ग्रुप के निस्वार्थ कार्य को देखते हुए तत्कालीन कलेक्टर सतीश कुमार एस ने पशु अस्पताल परिसर में जमीन उपलब्ध कराई थी। इसी जगह पर 10 लाख रुपए की लागत से आश्रम बनाया गया है।
अर्द्ध कुंभ में नासिक सीखने जाएंगे
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 में है,उससे पहले 2027 में नासिक में अर्द्ध कुंभ है। मप्र के अधिकारी वहां की व्यवस्था देखने नासिक जाएंगे। उज्जैन में व्यवस्थाएं करने के लिए प्रयागराज की तुलना में नासिक महाकुंभ का अवलोकन अधिक बेहतर रहेगा। कारण यह कि नासिक और उज्जैन शहर की संरचना लगभग एक जैसी हैं। क्षेत्र संकीर्ण होने के कारण भीड़ प्रबंधन बड़ी चुनौती है। उज्जैन और ओंकारेश्वर में सुरक्षा ऑडिट पहले ही हो चुका है।
बुला रही है मैहर वाली माता
नवरात्रि के दौरान 22 सितंबर से 6 अक्टूबर के बीच पश्चिम मध्य रेलवे ने मैहर रेलवे स्टेशन पर 15 जोड़ी लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों का पांच मिनट का विशेष ठहराव देने की घोषणा की है। रेल प्रशासन द्वारा जारी सूची के मुताबिक,लोकमान्य तिलक टर्मिनस-गोरखपुर, छपरा-लोकमान्य तिलक टर्मिनस,चेन्नई छपरा, वलसाड-मुजफ्फरपुर,दुर्ग-नौतनवा,पुणे-बनारस,सूरत-छपरा सहित अन्य प्रमुख ट्रेनों का मैहर में अस्थाई हॉल्ट रहेगा। इस फैसले से मुंबई, गुजरात, बिहार,उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सीधे मैहर पहुंचने की सुविधा मिल रही है।
आदिवासी उतरे सड़क पर-ज़मीन के बदले ज़मीन की मांग
हरदा और नर्मदापुरम-होशंगाबाद जिले के हज़ारों आदिवासी गुस्से में हैं। इन दिनों दो अलग-अलग संकट का सामना कर रहे हैं। एक तरफ मोरंड-गंजाल बांध के कारण डूब का खतरा है तो दूसरी ओर रहटगांव के वन ग्रामों में प्रस्तावित डॉ.राजेंद्र प्रसाद अभयारण्य से आदिवासियों पर आजीविका का खतरा मंडरा रहा है। इन दोनों परियोजनाओं के विरोध में जय आदिवासी युवा शक्ति-जयस संगठन के बैनर तले आदिवासी सड़क पर उतर गए हैं। उनकी मांग है कि इन दोनों परियोजनाओं को या तो बंद कर दिया जाए या उन्हें ज़मीन के बदले ज़मीन दी जाए,वो भी उतनी ही ज़मीन,जितनी पर वे काबिज़ हैं।

