जिला बन रहा भ्रष्टाचारियो के लिए चरागाह-मात्र एक माह में ही लोकायुक्त टीम इंदौर की तीसरी बड़ी कार्यवाही
मातृ शक्ति कलेक्टर कार्यालय के पास ही कर दिया,ऐसा बड़ा कांड -प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी आशीष आजाद एवं सहायक सेल्स मैन जितेन्द्र नायक को 50 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा
झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक। जिला भ्रष्टाचारियो के लिए चरागाह बन रहा है। आपकी बता दे कि मात्र एक माह में ही लोकायुक्त टीम इंदौर ने कल 25 सितंबर को तीसरी बड़ी कार्यवाही की है। जिसमे प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी आशीष आजाद एवं सहायक सेल्स मैन जितेन्द्र नायक को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए,गुलाबी बिल्डिंग स्थित मातृ-शक्ति कलेक्टर कार्यालय के समीप ही जिला आपूर्ति अधिकारी कार्यालय झाबुआ में रंगे हाथों पकड़ लिया गया।
मात्र 1 माह में 3 कार्रवाई
पहला मामला
लोकायुक्त इंदौर ने 28 अगस्त 2025 को राणापुर में ग्राम रोजगार सहायक दिनेश कुमार पचाहा को जन्म प्रमाण पत्र बनाने के एवज में रुपए 1250 की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।
दूसरा मामला
04 सितंबर 2025 को कार्रवाई करते हुए थांदला की एसबीआई शाखा से असिस्टेंट मैनेजर और हाउसकीपर को एक दुकानदार से लोन पास कराने के लिए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। दोनों आरोपी एक किराना दुकानदार से लोन स्वीकृत करने के लिए 40 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहे थे।
तीसरा मामला
अभी कल ही गुरुवार 25 सितंबर को इंदौर लोकायुक्त टीम ने सहायक आपूर्ति अधिकारी आशीष आजाद एवं सहायक सेल्स मैन जितेन्द्र नायक को 50 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए,उनके ही कार्यालय में रंगे हाथों पकड़ा गया। यह कार्यवाही महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के निर्देश पर ट्रेप दल का गठन कर की गयी।
यह है पूरा मामला
आवेदक मनोज ताहेड़ पिता जोरू ताहेड़,उम्र 32 वर्ष-निवासी ग्राम नेगड़िया पोस्ट अंतरवेलिया तहसील, जिला झाबुआ डॉ.भीमराव अंबेडकर बहुउद्देशीय सहकारी साख संस्था मर्यादित पिटोल बड़ी जो हदीखेड़ा में संचालित शासकीय उचित मूल्य की दुकान-कोड कमांक-2104 088 पर का काम करता था। 19 सितम्बर को जिला आपूर्ति अधिकारी झाबुआ ने उक्त आवेदक की शासकीय उचित मूल्य की दुकान को बिना कोई सूचना दिये ही निलंबित कर,करुणा स्वयं सहायता नेगड़िया की शासकीय उचित मूल्य की दुकान-कोड कमांक-2104084 में संलग्न कर दिया था। इसके बाद सेल्समेन उसी दिन ही कलेक्टर कार्यालय झाबुआ स्थित खाद्य विभाग के ऑफिस के लिए निकला। उसके खाद्य कार्यालय पहुँचने से पहले ही कलेक्टर कार्यालय के गेट पर आवेदक को सहायक सेल्समैन जितेन्द्र नायक मिला। उसने अपनी दुकान के निलंबन के संबंध में चर्चा नायक से की.तो नायक ने उसे कहा कहा कि मैं तुम्हारी दुकान का निलंबन हटा दूंगा और एफआईआर भी नहीं होने दूंगा। इसके लिए तुम्हें जिला आपूर्ति अधिकारी आशीष आजाद को खर्चा-पानी देना होगा। आवेदक ने उससे पूछा कि कितना खर्चा-पानी लगेगा....? तो उसने कहा कि तुम रूको,मैं साहब से बात करके आता हूँ। कुछ समय बाद जितेन्द्र नायक आवेदक के पास पहुंचा और उसने कहा कि साहब से मैंने बात कर ली है और उन्होंने निलंबन को हटाने के लिए एक लाख रुपये की मांग की है,साथ ही वे तेरे खिलाफ एफआईआर भी नहीं करेंगे।
मातृ शक्ति कलेक्टर कार्यालय के पास ही ऐसा बड़ा कांड कर दिया
निराश होकर आवेदक ने इस बात की शिकायत 21 सितंबर को राजेश सहाय-पुलिस अधीक्षक, वि.पु.स्था.लोकायुक्त कार्यालय इंदौर को की। जिसके बाद शिकायत का सत्यापन कराया गया, शिकायत सही पाई जाने पर कल गुरुवार को ट्रैपदल का गठन किया गया और आरोपी नंबर 1-आशीष आजाद,प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी- जिला झाबुआ एवं आरोपी नंबर 2-जितेन्द्र नायक- सहायक सेल्समैन, शासकीय उचित मूल्य की दुकान पीलिया खदान देवझिरी झाबुआ को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए,गुलाबी बिल्डिंग स्थित जिला आपूर्ति अधिकारी कार्यालय झाबुआ में ही रंगे हाथों पकड़ लिया गया। खाद्य विभाग कार्यालय कलेक्टर कार्यालय के समीप होने से पूरी गुलाबी बिल्डिंग में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि दोनो अपराधियो की हिम्मत तो देखो मातृ-शक्ति कलेक्टर कार्यालय के पास ही,ऐसा बड़ा कांड कर दिया। आरोपियों के विरूद्ध भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 07 एवं बीएनएस की 2023 की धारा 61/2 के अंतर्गत कार्यवाही कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। ट्रैप-दल में निरीक्षक रेनू अग्रवाल,प्रधान आरक्षक प्रमोद यादव,आरक्षक पवन पटोरिया,आरक्षक मनीष माथुर,आरक्षक आशीष आय और आरक्षक कृष्णा अहिरवार शामिल थे।
झाबुआ जिले में भ्रष्टाचार चरम पर
झाबुआ जिले में भ्रष्टाचार चरम पर है और भ्रष्टाचारी सरकारी नुमाइंदों के लिए यह जिला चरागाह बन चुका है। लगता है कि कोई भी काम बगैर लेनदेन के संभव ही नहीं है, शायद सबको मिठाई खाने की आदत जो पड़ी हुई है। गौरतलब है कि जिले में खुलेआम धड़ल्ले से अवैध शराब,कस्बो-कस्बो में शराब के ठिए,सट्टा बाजार, स्मैक,गांजा,रेत और लकड़ी माफियाओं आदि की तो चांदी ही चांदी हो रही है। शायद गांधी जी के सहारे और अधिकारियों के संरक्षण-कृपा से ही ऐसे सारे अक्षम्य कृत्य संभव हो पा रहे है। कई विभागों में भ्रष्टाचार की लोकायुक्त तक पहुंची शिकायतों की जांच चल भी रही है। बावजूद इसके वे आज भी बेख़ौफ़ कुर्सी पर जमे बैठे है,वही कुछ अटैच होकर मजे कर रहे है,कुल मिलाकर भ्रष्टाचार के सागर में गोते लगाने में कोई भी कसर बाकी नहीं रख रहे है।

