जो बार-बार आदेशो का अपमान करे,क्या उनको सरकार, प्रशासनिक या जिला प्रशासन का संरक्षण प्राप्त तो नहीं है?

झाबुआ/पेटलावद। संजय जैन-सह संपादक। जैसा कि सभी को ज्ञात है कि जिले के पेटलावद नगर में 23 मार्च 2025 को एक दिल दहला देने वाला दर्दनाक हादसा ही नहीं हुआ था,बल्कि दो परिवार भी बुरी तरह से तहस नहस हो चुके है। सीएमओ आशा भंडारी को हकीकत में सब कुछ आंखों के सामने होते हुए भी उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं दिया या देखकर भी वे अंजान तो नहीं बनी रही ? सीएमओ की इतनी अधिक अक्षम्य लापरवाही के बावजूद भी प्रशासन सिर्फ  जांच का आदेश जारी कर भूल तो नहीं गया दर्दनाक हादसे को? अब तक की हुई कार्यवाही से यह साफ  प्रतीत हो भी रहा है। वे अपने गृह जिले में सारी मर्यादा को भूलकर लगातार जिले को अपमानित करने का कार्य कर रही है। वे जब से नगरीय प्रशासन की अधिकारी बनी है,तब से लेकर आज तक उनकी  हरकतों से नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग की छवि धूमिल ही हुई है। कही सीएमओ को आखिर संरक्षण सरकार या प्रशासन का तो नहीं?

क्या मुख्यमंत्री ऐसी सीएमओ को माफ  कर देंगे?

क्या मुख्यमंत्री ऐसी सीएमओ को माफ  कर देंगे?  जिसने एक बार नहीं दो-दो बार मां अहिल्या बाई होलकर को जन्म जयंती और पुण्यतिथि पर अपमानित किया है। पेटलावद में निवास न कर अन्य जिले से रोजाना अप-डाउन करने वाली सीएमओ,पूर्व में बदनावर में भी काफी विवादों में रह चुकी हैं। इतना ही नहीं,बदनावर में एक पत्रकार के खिलाफ  भोपाल अजजा आयोग में झूठी शिकायत कर एससी/एसटी प्रकरण दर्ज कराने की कोशिश का मामला भी सामने आया था। महेश्वर में भी वे नगर परिषद में दो बार सीएमओ पद पर पदस्थ रही,वहाँ भी वे विवादित ही रही। वही दूसरी ओर वे अपने आप को ईमानदार बताती है और कर्मचारियों को दबाकर रखती है। महेश्वर में भी इनकी शिकायत हुई थी,जिसकी जांच अभी भी चल रही है। अब अंत मे पेटलावद में भी इनके द्वारा बड़े ही शातिराना अंदाज से यही खेल खेला जा रहा है।

6 माह बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं

उल्लेखनीय है कि इन्होंने सीएमओ रहते हुए कई प्रकार की त्रुटियां कर अनुशासनहीनता का कार्य किया है,जो नगर पालिका कर्मचारी भर्ती तथा सेवा शर्ते व नियमों का साफ  तौर से उल्लंघन तो है,साथ वे इस तहत दोषी भी है । इन्होंने एक बार नहीं दो बार स्थानांतरण होने पर उच्च न्यायालय से स्थगन प्राप्त कर नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग का अपमान किया है। सीएमओ के खिलाफ  अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। क्या उनको सरकार, प्रशासनिक या जिला प्रशासन का संरक्षण प्राप्त तो नहीं है....? यदि नही है तो फिर अभी तक उनके खिलाफ 23 मार्च 2025 के दर्दनाक हादसे को 6 माह बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं होना,कई प्रकार की शंका कुशंकाओ को जन्म देती साफ  नजर तो आ रही है। सीएमओ की लापरवाही या अनदेखी से बगैर अनुमति के निर्माण हुआ ओर उसकी छत गिरने से दो परिवार भी उजड़ गए।

कई सवाल खड़े कर रही है कार्यवाही में हो रही देरी से

सूत्रों की माने तो जांच रिपोर्ट पूरी कर कलेक्टर को सौंप दी गई थी और लगभग कलेक्टर नेहा मीना ने भी जांच रिपोर्ट पर अपनी टिप अंकित कर प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग भोपाल को भेज दी थी। जांच रिपोर्ट को भेजे लगभग 5 माह का समय हो चुका है,लेकिन अभी तक लापरवाह सीएमओ पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है। गौरतलब है कि सीएमओ के खिलाफ  कलेक्टर सीधे तो कोई कार्रवाई नहीं कर सकती है। कार्यवाही हेतु कप्तान को भी प्रमुख सचिव या आयुक्त नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग भोपाल से निलंबन के पूर्व स्वीकृति लेना पड़ती है। कलेक्टर मात्र जांच रिपोर्ट के साथ कार्यवाही हेतु अनुशंसा कर आयुक्त नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग भोपाल को जानकारी ही भेज सकती है,लेकिन कार्यवाही में हो रही देरी कई सवाल तो खड़े कर रही है। एक और मजेदार बात यहाँ आपको बता दे कि इसके पूर्व में तालाबों में किये कार्यों की जांच हुई थी,उसमे साफ  तौर से घोर आर्थिक अनियमितता भी प्रमाणित हो चुकी है। जांच मे कलेक्टर से लेकर निचले दर्जे के अधिकारी और कर्मचारी भी दोषी पाये गये है। यह जांच भी,न जाने अभी कहा खो गयी है? यह तो कप्तान ही बेहतर तरीके से जानती होगी,ऐसा हमारा मानना है

कार्यवाही के है दरकार-सीएमओ पेटलावद पर

आदेशों का लगातार अपमान ही करना जिसकी फितरत बन गयी हो,तो ऐसी पेटलावाद सीएमओ आशा भंडारी के खिलाफ  अब तक कार्यवाही क्यो नही कर पा रहा प्रशासन? जबकि मातृ शक्ति दो आयएएस,एक तो कलेक्टर नेहा मीना और दूसरी पेटलावद एसडीएम तनुश्री मीना जिले में पदस्थ भी है। मजेदार बात तो पहली बार संसदीय क्षेत्र से 3 विधायक भी मंत्री तक है। आखिरकार सीएमओ को किसका संरक्षण मिल रहा है.? इसी समाचार पत्र ने पेटलावद अवैध निर्माण के हादसे के बाद से लगातार सीएमओ के अक्षम्य कृत्यों की लगातार खबरें प्रकाशित कर प्रशासन को अवगत भी कराया है। 

कही उन्हें चुनाव लड़वाने की तैयारी तो नही कर रहे?

मध्यप्रदेश सरकार, नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग,भाजपा क ी स्थानीय नेता-विधायक जो संसदीय क्षेत्र से प्रदेश सरकार में मंत्री और 2 मंत्री संसदीय क्षेत्र से भी है,वे सीएमओ आशा जितेन्द्र भंडारी के द्वारा लगातार किए जा रहे अपमानजनक कार्यो को आखिर नजर अंदाज क्यो कर रहें है..? नगरीय प्रशासन के साथ ही भाजपा सरकार की,इनके कारण धूमिल होती छवि को अनदेखा कब तक करती रहेगी...?सूत्रों से प्राप्त जानकारी नुसार भाजपा नेताओ का भी सीएमओ को वरदहस्त प्राप्त है, कही उनके दबाव में तो भाजपा सरकार लापरवाह सीएमओ आशा जितेन्द्र भंडारी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं कर,उनको सरंक्षण तो नही दे रही है...?,कही उन्हें चुनाव लड़वाने की तैयारी तो नही कर रहे.?, एसा हमारा मानना है।