भाजपा नगर इंदौर इकाई में महामंत्री के तीन नामों को लेकर अब फंसा हुआ है पेंच- अब झाबुआ और इंदौर नगर कार्यकारिणी की घोषणा हो सकती है,शायद नवरात्रि के शुभ दिनों में ही
जो योग्य है,उनके लिए अवसरों की कमी नहीं होगी-इंदौर नगर इकाई की घोषणा से प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल का रुख समझ आ जाएगा
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। 25 पदों वाली नगर कार्यकारिणी इंदौर को लेकर मशक्कत तेज हो गई है। भोपाल में शुक्रवार को बंद लिफाफे खोले गए,जिसमे 350 से ज्यादा नाम सामने आए है,ज्यादा जोर महामंत्री के 3 पदों को लेकर है। सभी नेता अपने समर्थकों को इस पर बैठाना चाहते हैं। भोपाल में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल,संगठन महामंत्री,दोनों पर्यवेक्षक के साथ संभागीय प्रभारी,शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा,जिलाध्यक्ष श्रवणसिंह चावड़ा की मौजूदगी में लिफाफे खोले गए। सभी गुटों को संतुष्ट करने के बाद ही नियुक्ति होने की बात कही जा रही है।
स्थानीय स्तर पर दबाव-प्रभाव जारी
श्राद्ध पक्ष शुरु होने से पहले भाजपा की नगर कार्यकारिणी की घोषणा की जानी थी,लेकिन महामंत्री के 3 पद किस नेता के समर्थक को मिले....? इसे लेकर अभी तक पेंच फंसा हुआ है। श्राद्ध पक्ष प्रारम्भ हो जाने से ऐसा साफ प्रतीत हो रहा है कि अब नवरात्रि के शुभ दिनों में ही नगर कार्यकारिणी की घोषणा हो सकती है। इसी तरह झाबुआ का इंदौर संभाग में रहने के चलते नवरात्रि में शुभ दिन में ही घोषणा हो सकती है। नगर कार्यकारिणी के पदों के साथ ही नगर निगम में एल्डरमैन और विभिन्न निगमों,मंडलों में नियुक्ति के लिए प्रदेश के नेता आकर स्थानीय नेताओं-विधायकों आदि के साथ रायशुमारी कर भी चुके हैं। अब सब कुछ करना प्रदेश संगठन को ही है,लेकिन स्थानीय स्तर पर दबाव-प्रभाव जारी है कि अपने समर्थकों को पार्टी संगठन में जगह दिला सकें।
हर कार्यकर्ता खुद को प्रदेश अध्यक्ष मान कर ही चले
प्रदेश भाजपा में इंदौर संगठन का विशेष महत्व इसलिए भी है कि पार्टी के आंदोलन,अभियान, धन संग्रह से लेकर सम्मेलनों की सफलता में इंदौर भाजपा के मॉडल की प्रदेश स्तर पर चर्चा होती रही है । प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल अपने पहले दौरे में सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि उनका कोई गुट नहीं है और हर कार्यकर्ता खुद को प्रदेश अध्यक्ष मान कर ही चले। उनकी इस सहजता से इंदौर शहर और जिले के कार्यकर्ताओं में यह विश्वास मजबूत भी हुआ है कि संगठन के लिए खुद को झोंकने वालों की अब पूछपरख पक्के से बढ़ेगी। नगर कार्यकारिणी की घोषणा में यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि विधायकों की चलती है,रायशुमारी कर बंद लिफाफों में सूची भेजने वाले नेताओं ने ईमानदारी से दायित्व निभाया है या नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष हेमन्त खण्डेलवाल पूर्व अध्यक्ष की परिपाटी को ध्वस्त कर एक नई मिसाल कायम करते हैं।
जो योग्य है,उनके लिए अवसरों की कमी नहीं होगी
मध्य प्रदेश बीजेपी की गिनती देश के सर्वश्रेष्ठ संगठन वाले राज्य के तौर पर होती है। बेशक अभी चुनाव नहीं है,लेकिन संगठन में जो टीम बनेगी,ये लगभग तय है कि चुनाव के वक्त तक उसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। लिहाजा पार्टी के नए प्रदेश हेमंत खंडेलवाल ने अपने नई टीम में सदस्यों के सिलेक्शन की प्रोसेस कई चरणों की रखी थी। बीजेपी के पितृ पुरुष कुशाभाऊ ठाकरे की राजनीति से प्रेरित हेमंत खंडेलवाल ने पदभार ग्रहण करने के साथ ये बयान दिया था कि पार्टी अनुशासन से दाएं-बाएं होने वालों को ही दिक्कत होगी,बाकी जो योग्य है,उनके लिए अवसरों की कमी नहीं होगी।
सारा दबाव है महामंत्री पद के लिए
इंदौर भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा की इस कार्यकारिणी में 25 नामों को आपसी सहमति से फायनल किया जाना है। इनमें तीन महामंत्री पदों के लिए अच्छा खासा दबाव भी बना हुआ है। शहरी क्षेत्र का हर विधायक अपने-अपने खास कार्यकर्ताओं को इस पद पर बैठाना जो चाहते हैं। इसी कारण एक एक विधानसभा से कई नाम सामने आ गए हैं।
विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-1से
विधायक/मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने खास समर्थक अशोक चौहान-चांदू और गोविंद पंवार का नाम आगे बढ़ा रखा है।
विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-2 से
नगर अध्यक्ष पद पर सुमित मिश्रा की नियुक्ति को क्षेत्र क्रमांक 2 के विधायक रमेश मेंदोला के खेमे का माना जाता है,जिसके कारण नगर भाजपा में महामंत्री पद भी दो नंबर क्षेत्र को मिल जाए,यह संभव ही नहीं लग रहा है। इस कारण से विधायक मेंदोला ने एक मात्र सुधीर कोल्हे का नाम दे रखा है।
विधानसभा क्षेत्र क्रमांक- 3 से
विधायक गोलू शुक्ला ने दीपेंद्र सिंह सोलंकी और महिला महामंत्री के लिये माधुरी जायसवाल का नाम दे रखा है।
विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-4 से
विधायक मालिनी गौड़ अपने समर्थक वीरेंद्र शेंडगे और इसी क्षेत्र से महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अपने समर्थक भारत पारख की पैरवी की है।
विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-5 से
विधायक महेंद्र हार्डिया ने प्रणव मंडल और सविता अखंड के नाम दिए हैं।
राऊ विधानसभा से
विधायक मधु वर्मा अपने समर्थक भानु सिंह ठाकुर के पक्ष में हैं,किंतु यहां से नीलेश चौधरी और हरप्रीत सिंह बक्शी का नाम भी है।
पहले भी रायशुमारी धरी की धरी रह गई थी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल यदि विधान मुताबिक निर्णय लेते हैं,तो रायशुमारी और शार्ट लिस्टिंग के बाद जो नाम सामने आएंगे,उस सूची को मंजूरी दे सकते हैं। पिछली बार वीडी शर्मा के वक्त नगर अध्यक्ष को लेकर भी रायशुमारी हुई थी। पार्टी के जावरा कंपाउंड स्थित कार्यालय में बंद कमरे में चर्चा के बाद पूर्व मंत्री कैलाश चावला अध्यक्ष पद के लिए सर्व सम्मति से तय स्व.उमेश शर्मा का नाम लेकर गए थे,लेकिन तत्कालीन प्रदेश संगठन मंत्री सुहास भगत के हस्तक्षेप के कारण गौरव रणदिवे का नगर भाजपा अध्यक्ष के लिए नाम घोषित हो गया था।
महामंत्री के 3 पद हैं,नगर कार्यकारिणी में
भारतीय जनता पार्टी की 26 पदाधिकारियों वाली नगर इकाई में अध्यक्ष सुमित मिश्रा के अलावा बाकी 25 पदों में नगर इकाई में महामंत्री के 3 पद हैं । 1 सह-कार्यालय प्रभारी,8 उपाध्यक्ष,8 मंत्री,1 कोषाध्यक्ष,1 सह कोषाध्यक्ष,1 सोशल मीडिया प्रभारी,1 मीडिया प्रभारी और 1 कार्यालय मंत्री,इन 25 पदों के लिए नाम फायनल होना है। सर्वाधिक माथापच्ची महामंत्री पद के नामों को लेकर ही है। जो 6-7 नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं,जिसकी शार्ट लिस्टिंग होना बाकी है। पिछली बार करीब 3 साल पहले तत्कालीन अध्यक्ष गौरव रणदिवे ने नगर कार्यकारिणी में संतुलन बनाए रखने के लिए 29 को नियुक्ति दी थी।
सभी समाजों को प्रतिनिधित्व भी जरूरी
ब्राह्मण समाज का नगर अध्यक्ष होने के बाद बाकी समाजों को नगर इकाई में प्रतिनिधित्व मिल जाए,इस पर भी मंथन जरूर होगा। सिख,भोई,क्षत्रिय,दर्जी, केश शिल्पी,माहेश्वरी आदि समाजों के प्रतिनिधि भी नगर इकाई में शामिल करना जरूरी है। मुस्लिम समाज पार्टी की प्राथमिकता में नहीं है,लेकिन बाकी अल्पसंख्यक समाज ईसाई,पारसी और जैन आदि को भी प्रतिनिधित्व देना है। पहले स्थायी आमंत्रित और विशेष आमंत्रित के रूप में 22-22 पूर्व विधायक,पूर्व सांसद सहित वरिष्ठ भाजपा नेताओं की समिति रहती थी। अब देखना यह है कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल 44 सदस्यों वाली इन दोनों समितियों को जारी रखते हैं या कोर ग्रुप का गठन करते हैं,यह तो नगर इकाई की घोषणा बाद ही स्पष्ट हो पायेगा।
नगर इकाई के बाद भी,उम्मीद बाकी रहेगी
भाजपा की नगर इकाई में जिन समाजों को प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा,तो उनके लिए नगर निगम एल्डरमैन पद, निगम-मंडलों के साथ जनभागीदारी समिति में संभावना भी बची रहेगी। नगर इकाई के नाम शार्ट लिस्टिंग में फाइनल होने के बाद शेष बचे नामों पर बाकी बची समितियों के लिए विचार किया जाएगा।

