राजनीतिक संरक्षण के चलते सीएमओ अच्छी तरह से,राजनीति करने में पारंगत हो गई है-कही उन्हें चुनाव लड़वाने की तैयारी तो नही कर रहे?

झाबुआ/पेटलावद। संजय जैन-सह संपादक। झाबुआ जिले की मूल निवासी पेटलावद सीएमओ आशा जितेंद्र भंडारी झाबुआ जिले की बेटी है। उनको अजजा वर्ग का होने से आरक्षण का भी लाभ मिला ही होगा,जिससे उनका सीएमओ पद के लिए चयन हुआ होगा। यह अपने गृह जिले में सारी मर्यादा को भूलकर लगातार जिले को  अपमानित करने का कार्य कर रही है। गौरतलब है कि शासकीय सेवा में आने वाले हर कर्मचारी और अधिकारी की एक मर्यादा होती है। जिस तरह उच्च पद पर पदासीन प्रधानमंत्री से लेकर मंत्री- विधायक शपथ लेते है कि में.सच्ची रखूंगा/रखूंगी। इसके अनुसार सभी अपने कर्तव्य का पालन करते  है। उसी तरह एक शासकीय सेवक भी संविधान के नियमों से बंधा हुआ है और सेवा में आने के बाद उन्हें भी इसी अनुसार अपना कार्य करना होता है। आशा मेडा,अब आशा जितेन्द्र भंडारी,जब से नगरीय प्रशासन की अधिकारी बनी है,तब से लेकर आज तक उनकी  हरकतों से नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग की छवि धूमिल ही हुई है।

विवादों में घिरी रहती हैं सीएमओ आशा भंडारी

उल्लेखनीय है कि पहली बार ही नहीं है कि पेटलावद सीएमओ आशा भंडारी विवादों में घिरी न हों। पेटलावद में निवास न कर अन्य जिले से रोजाना अप-डाउन करने वाली सीएमओ,पूर्व में बदनावर में भी काफी विवादों में रह चुकी हैं। इतना ही नहीं,बदनावर में एक पत्रकार के खिलाफ  भोपाल अजजा आयोग में झूठी शिकायत कर एससी/एसटी प्रकरण दर्ज कराने की कोशिश का मामला भी सामने आया था। जिसके विरोध में स्थानीय पत्रकारों ने एकजुट होकर उच्च स्तरीय शिकायत भी की थी। महेश्वर में भी वे नगर परिषद में दो बार सीएमओ पद पर पदस्थ रही,वहां भी वे विवादित ही रही। सूत्रों की मानें तो वे पूर्व में जो सीएमओ पदस्थ रहे,उनकी कमियां निकालती रहती थी और शिकायत कर पत्रकारों से खबर तत्कालीन सीएमओ के विरोध में प्रकाशित करवाती रहती थी। वही दूसरी ओर वे अपने आप को ईमानदार बताती है और कर्मचारियों को दबाकर रखती है। महेश्वर में भी इनकी शिकायत हुई थी,जिसकी जांच अभी भी चल रही है। अब अंत मे पेटलावद में भी इनके द्वारा बड़े ही शातिराना अंदाज से यही खेल खेला गया है। यहां भी पुरानी परिषद के घपलों को करोड़ों का होना बताकर पत्रकारों से जानकारी प्रकाशित करवाई थी,बाद में सब ठंडा पड़ गया था।

कई सवाल खड़े कर रही है कार्यवाही में हो रही देरी से

सूत्रों की माने तो जांच रिपोर्ट पूरी कर कलेक्टर को सौंप दी गई है और लगभग कलेक्टर नेहा मीना ने भी जांच रिपोर्ट पर अपनी टिप अंकित कर प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग भोपाल को भेज दी है। जांच रिपोर्ट को भेजे लगभग चार माह का समय हो चुका है,लेकिन अभी तक लापरवाह सीएमओ पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है । गौरतलब है कि सीएमओ के खिलाफ  कलेक्टर सीधे तो कोई कार्रवाई नहीं कर सकती है। कार्यवाही हेतु कप्तान को भी प्रमुख सचिव या आयुक्त नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग भोपाल से निलंबन के पूर्व स्वीकृति लेना पड़ती है। कलेक्टर मात्र जांच रिपोर्ट के साथ कार्यवाही हेतु अनुशंसा कर आयुक्त नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग भोपाल को जानकारी के भेज सकती है,लेकिन कार्यवाही में हो रही देरी कई सवाल तो खड़े कर रही है। एक और मजेदार बात यहाँ आपको बता दे कि इसके पूर्व में तालाबों में किये कार्यो की जाँच हुई थी,उसमे साफ  तौर से घोर आर्थिक अनियमितता भी प्रमाणित हो चुकी है। जाँच मे कलेक्टर से लेकर निचले दर्जे के अधिकारी और कर्मचारी भी दोषी पाये गये है। यह जांच भी,न जाने अभी कहा खो गयी है? यह तो कप्तान ही बेहतर तरीके से जानती होगी,ऐसा हमारा मानना है


ऐसी मातृ शक्ति कलेक्टर तो हमने आज तक नहीं देखी

जब कलेक्टर की कार्यशैली पर हमने कर्मचारियों और आमजन से चर्चा की तो अधिकतर कर्मचारियों का कहना था कि हमने अपने कार्यकाल के दौरान ऐसी पहली  मातृ  शक्ति कलेक्टर को देखा है,जो आये दिन सिर्फ  बैठके लेकर हमे सिर्फ  लताड़ने ही कार्य करती है। जबकि जमीनी धरातल पर तो कोई कार्य ही नही हो रहा है। अधिकतर लोगों ने रोष पूर्वक कहा कि हमें कोई भी कार्य करवाना हो और हम कलेक्टर से मुलाकात करने जाते है,तो हमे वे घंटों बिठाकर इंतजार करवाती है और अंत मे हमसे मिले बिना ही गुपचुप निकल जाती है। ऐसा कई लोगों के साथ तो वे कर चुकी है और तो और विपक्ष के नेता और पत्रकार के साथ भी यही रवैया रखती है,फिर हमारा तो क्या हश्र होता होगा.....? यह बताने की हमें शायद आवश्यकता ही नही है। नगर के कुछ व्यापारियों ने बताया कि शासन को करोड़ो रुपयों के राजस्व का नुकसान विशेषकर धारा 165 पर इनकी कार्यशैली के चलते हो रहा है,इनको इसकी जरा भी परवाह नही है।  हमने तो सुना है कि नेता नगरी और प्रभावी लोगो का हर कार्य वे खटाक से कर देती है। हम भी कई वर्षों से झाबुआ में रह रहे है,लेकिन ऐसी मातृ शक्ति कलेक्टर तो हमने आज तक नही देखी है। खैर,यह भी कब तक रहेगी....? जब भविष्य में नवीन कलेक्टर आएंगे तब हम हमारे कार्य लेकर जाएंगे,हमे तो झाबुआ में  ही रहना है। क्या इतना सब सुनकर भी आगे कप्तान अपने वातानुकूलित कक्ष में बैठकर सिर्फ  बैठके ही करती रहेगी या जमीन पर उतरकर नगर और जिले की दयनीय स्थिति का जायजा भी लेगी.....?

कही उन्हें चुनाव लड़वाने की तैयारी तो नही कर रहे?

मध्यप्रदेश सरकार, नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग,भाजपा की स्थानीय नेता-विधायक जो संसदीय क्षेत्र से प्रदेश सरकार में मंत्री और 2 मंत्री संसदीय क्षेत्र से भी है,वे सीएमओ आशा जितेन्द्र भंडारी के द्वारा लगातार किए जा रहे अपमानजनक कार्यो को आखिर नजर अंदाज क्यो कर रहें है..? नगरीय प्रशासन के साथ ही भाजपा सरकार की,इनके कारण धूमिल होती छवि को अनदेखा कब तक करती रहेगी...?सूत्रों से प्राप्त जानकारी नुसार भाजपा नेताओ का भी सीएमओ को वरदहस्त प्राप्त है, कही उनके दबाव में तो भाजपा सरकार लापरवाह सीएमओ आशा जितेन्द्र भंडारी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं कर,उनको सरंक्षण तो नही दे रही है.?,कही उन्हें चुनाव लड़वाने की तैयारी तो नही कर रहे?

चुनाव ही लड़वा दिया जाए

पेटलावद सीएमओ आशा जितेंद्र भंडारी को अभयदान और राजनीतिक संरक्षण देने की बजाय,इनको पार्टी में प्रवेश देकर चुनाव ही लडवा दिया जाए ताकि राजनीतिक दल को भी फायदा हो ओर इनकी चाणक्य नीति का लाभ भी मिल सके। वैसे भी राजनीतिक संरक्षण के चलते सीएमओ भी अच्छी तरह से राजनीतिक गुण तो सीख ही गई होगी..?, ऐसा हमारा मानना है।