जनता की सुरक्षा अब  तो रामभरोसे ही-जनता की जान से खिलवाड़, एक अक्षम्य अपराध 

झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक।   भारत सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों का रखरखाव करती है। एनएचएआई और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय इनके निर्माण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार हैं। एनएच 47 बैतूल/इंदौर- अहमदाबाद ,राजमार्ग के माछलिया घाट पर सड़क की हालत खस्ता है। सड़कों पर बड़े.-बड़े गड्ढों व उखड़ी पड़ी गिट्टी से राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बैतूल-अहमदाबाद फोरलेन हाइवे के माछलिया घाट पर 211 करोड़ की नई सड़क का निर्माण किया गया था। उल्लेखनीय है कि इस सड़क ने मात्र दो साल में ही इस गुणवत्ता विहीन सड़क ने आमजन की सुरक्षा का मज़ाक बना दिया है।  एक तरफ  की तो पूरी लेन बंद करनी पड़ गयी है।  वाहन चालक दूसरी गाड़ियों को साइड देने में असमर्थ हैं। रात के समय में हादसों का खतरा और भी बढ़ जाता है।

ज्वाइंट सेक्शन का हाल बेहद ही खस्ता

पुल पर सड़क के ज्वाइंट सेक्शन का हाल बेहद ही खस्ता हो चुका है। आलम यह है कि पूल के ज्वाइंट की सीमेंट आधी से अधिक पूरी तरह उखड़ गयी है,सरिए भी हवा में झूल रहे और जगह-जगह खतरनाक जान लेवा बड़े बड़े गड्ढे भी बन गए हैं।  हालात ये हैं कि पुल में पड़े इस गड्ढे की वजह से एक तरफ  की पूरी लेन तक बंद करनी पड़ गयी है।  तस्वीरें  साफ -साफ  गवाही दे रही हैं कि किस तरह से भ्रष्टाचार युक्त, घटिया सामग्री और निर्माण में घोर लापरवाही के चलते राहगीरों की जान से  खुले आम खिलवाड़ किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और एनएएचआई की इसी गलती का खमियाज़ा वाहन चालक और नागरिक भुगत रहे हैं। एक और तो यह घटिया निर्माण कार्य,रोड हादसों को खुला निमंत्रण दे रहा है और वही दूसरी ओर अधिकारी अपने वातानुकूलित कक्ष में मात्र मूकदर्शक बनकर हाथ पर हाथ धर के बेख़ौफ  मजे से बैठे हुए है। यदि भविष्य में कोई बड़ा हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी ?

टोल टैक्स तो पूरा,जबकि सुरक्षा पूरी तरह से जीरो

नेशनल हाईवे अथॉरिटी और टोल कंपनी जनता की जेब से हजारों करोड़ तो वसूल रही है,लेकिन सड़क की मरम्मत और मेंटेनेंस पर फूटी कौड़ी भी खर्च करने को तैयार नहीं है। एक लेन बंद करने से दूसरी लेन से आमने सामने खतरनाक तरीके बेहद भारी वजनी वाहन गुजर रहे है। क्या ऐसे होगा हिंदुस्तान की नई सड़कों का विकास.....? जिसमे वाहनों की लंबी-लंबी कतारें और सफर करने वाले लोगों की जान हलक में रहेगी।

जनता की जान से खिलवाड़ एक अक्षम्य अपराध

मुख्य हाईवे पर बने ज्वाइंट का इस तरह टूट जाने से तो इंजीनियरिंग की सबसे बड़ी भूल उभर कर आ रही है। सड़क मात्र 2 साल में ही उखड़ने का मतलब यह समझ सकते है कि इसमे भ्रष्टाचार,घटिया निर्माण और निगरानी में भारी चूक की गयी है। टोल कंपनी के कर्मचारी तो सिर्फ  टोल वसूलने में व्यस्त रहते हैं। इन पर जनता द्वारा की गई शिकायत का कोई भी असर ही नही हो रहा है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी और टोल कंपनी द्वारा न तो सड़क का कोई सुधार कार्य किया गया और न ही राहगीरों को इसकी कोई चेतावनी तक अंकित की गयी है। माछलिया घाट की ढलान और घुमावदार रोड पहले से ही काफी कुख्यात और खतरनाक  है। यहां पहले भी दर्जनों जानलेवा हादसे हो चुके हैं और अब इस टूटे ज्वाइंट के चलते भविष्य में तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद भी न हाईवे अथॉरिटी का कोई अफसर मौके पर दिखा और न मरम्मत का कोई इंतजाम किया गया है। जनता की जान से खिलवाड़,यह एक अक्षम्य अपराध है। ऐसा प्रतीत हो रहा कि जनता की सुरक्षा अब  तो रामभरोसे ही चल रही है।

प्रशासन को यह करना चाहिए, ऐसा हमारा मानना है

-आरोप-प्रत्यारोप न करते हु, जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई करना चाहिए।
-आखिर जनता से वसूला गया करोड़ों का टोल टैक्स का पैसा गया कहां ?इसका लेखा जोखा देखना चाहिए।
-निर्माण एजेंसी, सुपरविजन इंजीनियर और टोल कंपनी आदि की जांच कर इनकी जवाबदेही तय करना चाहिये।
-तत्काल एफआईआर, ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट और सरकारी लापरवाह अफसरों पर सस्पेंशन की कार्रवाई करना चाहिये।
-यदि शासन-प्रशासन की आंखें अब भी नहीं खुलीं,तो वे हर बार की तरह किसी बड़े हादसे का  इंतजार करें और जब हादसा घटित हो जाय तब कम से कम पूरी जवाब देही एनएचआइ,प्रशासन और टोल कंपनी लेवे। अक्सर देखा जाता है कि  हादसे के बाद वे सिर्फ  आरोप प्रत्यारोप का दौर मात्र औपचरिकता हेतु प्रारम्भ कर  सभी जिम्मेदार अपनी जवाब देही न लेते हुए साफ -साफ  पतली गली से बच कर निकल ही जाते है।