महापौर भार्गव ने पहले दिन ही कह दिया था कि नहीं हटेगी चौपाटी,आगे जिसे जो करना है करे,-श्राद्ध पक्ष बाद साढ़े नौ बजे से लगेगी चौपाटी,बाकी दुकानें लगने नहीं देंगे
 
आधे घंटे में ही,बात बन गई -आधे ये झुके,आधे वो झुके

झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक।  अंततः सराफा व्यापारियों और चौपाटी दुकानदारों के बीच एक पखवाड़े से चल रहा विवाद निपट ही गया। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पहले दिन ही कह दिया था कि चौपाटी सराफा से नहीं हटेगी,आगे जिसे जो करना है करे,और हुआ भी वही। सराफा व्यापारियों ने रात दस बजे तक दुकानें चालू रखने का प्रस्ताव आम सभा में पारित किया था,श्राद्ध पक्ष के बाद से चौपाटी की दुकानें रात 9.30 बजे से सराफा में लगने लगेगी। त्रिपक्षीय नौ सदस्यीय समिति सराफा और चौपाटी के लिए जो निर्णय करेगी,वह सभी पक्षों को मान्य होंगे। सराफा व्यापारियों और चौपाटी दुकानदारों के साथ महापौर ने सोमवार की दोपहर संयुक्त बैठक की थी। महापौर ने दोनों पक्षों के बीच समन्वय और पहल की,जिसका नतीजा यह निकला कि इंदौर की धरोहर को कायम रखने के लिए दोनों पक्षों की आपस में सहमति बन गई।

सभी पक्ष रहेंगे 9 सदस्यीय समिति में

श्राद्ध पक्ष तक तो सराफा व्यापारियों का रात दस बजे तक दुकानें चालू रखने का निर्णय लागू रहेगा। महापौर के साथ हुई बैठक में सभी पक्षों की राय लेकर 9 सदस्यीय समिति बनाई जा रही है। इसमें अध्यक्ष हुकुम सोनी सहित 3 सदस्य सोना-चांदी व्यापारियों के, 3 चौपाटी व्यापारियों के राम गुप्ता,बंटी यादव और नटवर नीमा और 3 सदस्य निगम अधिकारियों व एमआईसी के होंगे। महापौर स्वयं भी समिति में शामिल रहेंगे,यह समिति 5 से 7 दिनों में स्वरूप, समय-निर्धारण और सुरक्षा पर खाका तैयार करेगी। बैठक में यह भी सुझाव आया कि चौपाटी का संचालन समय सोना-चांदी व्यापार के समय के अनुरूप तय किया जाए। फायर सुरक्षा और पारंपरिक दुकानों के स्वरूप को ध्यान में रखते हुए समिति इस पर निर्णय लेगी।

एक से अधिक दुकान लगाने वालों पर नकेल कसेगी

नौ सदस्यीय समिति सराफा की जिन दुकानों के ओटले किराए पर दे रखे हैं। इनमें से कुछ चौपाटी दुकानदारों ने ही,ये ओटले अन्य दुकानदारों को महंगे किराए पर दे रखे हैं। यही कारण है कि कुछ दुकानदार एक से अधिक दुकानें संचालित कर रहे हैं। ऐसे दुकानदारों पर भी ये नौ सदस्यीय समिति नकेल कसेगी।

अपना हठ नहीं छोड़ते तो सराफा व्यापारियों की परेशानी बढ़ जाती

अपना हठ छोड़कर सराफा एसोसिएशन ने जो उदारता दिखाई है,उसकी शहर के आम नागरिकों ने सराहना तो की ही है साथ ही यह भी कहा है कि कारोबारी यदि हठ नहीं छोड़ते तो नगर निगम के नियम उनके लिए ही भारी पड़ जाते। संकरी गलियों वाले बड़ा-छोटा सराफा में कई इमारतों में नक्षे के विपरीत निर्माण और साथ ही नक्षे में पार्किंग के लिए स्वीकृत बेसमेंट में दुकानों का निर्माण,जैसी कई खामियां भी सराफा कारोबारियों के लिए अनावश्यक तनाव का कारण बन सकती थीं।

सराफा व्यापारियों का आभार

सराफा के व्यापारी इंदौर की पहचान हैं,उनके सहयोग से ही शहर ने देशभर में अलग छवि बनाई है। शहर हित में उनके निर्णय के लिए मैं पूरे इंदौर की ओर से आभार प्रकट करता हूँ। महापौर ने स्पष्ट किया कि इंदौर संवाद और समन्वय का शहर है। व्यापारियों के सहयोग से चौपाटी को श्राद्ध पक्ष के बाद पारंपरिक दुकानों के साथ एक सुरक्षित,सुंदर और अनुशासित स्वरूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

पुष्यमित्र भार्गव- महापौर,इंदौर

हम भी चौपाटी धरोहर के पक्ष में

चौपाटी इंदौर की धरोहर है,हम इससे सहमत भी है। महापौर ने  बैठक में उन्होंने बाजार की  बेहतरी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जो आश्वासन दिए हैं,उससे हम भी सहमत हैं। उनका व्यापार भी चले और हमारे मुद्दों का हल निकल जाए,यही तो चाहते हैं हम।

हुकुम सोनी- अध्यक्ष,सराफा एसोसिएशन,इंदौर

सराफा एसो.और महापौर का आभार

महापौर के साथ ही हम सराफा एसोसिएशन के खास तौर पर आभारी हैं। महापौर यदि पारंपरिक दुकानों को ही सराफा चौपाटी के लिए अनुमति देते हैंएतो हमारी सहमति है। खिलौने,साउथ इंडियन फूड,कपड़े,जूते-चप्पल की दुकानें हटाते हैं तो हमें कोई आपत्ति नहीं। नौ सदस्यीय समिति जो भी निर्णय लेगी हम भी उसका पालन करेंगे।

राम गुप्ता-अध्यक्ष, चौपाटी संचालक एसोसिएशन, इंदौर