सूत्र आगमों से प्राप्त कर जन जन तक पहुंचाएं है विवेकपूर्ण निर्णय लेकर समस्या का निदान करने का सोचना चाहिए
झाबुआ।संजय जैन-जिला ब्यूरो। कल परम पूज्य साध्वी भगवंत श्री अनुभवदृष्टा श्री जी ने वर्तमान में जिन मंदिरों में विराजित मूर्तियों के प्रक्षाल, अभिषेक, पूजन आदि के संबंध में बताया कि शंखेश्वर महातीर्थ में पूज्य आचार्य देव लेखेंद्र शेखर विजय जी महाराज साहब निर्मीत एवं प्रतिष्ठित 1008 शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवान जिन मंदिर में 25 पुजारीगण पदस्थ होकर संपूर्ण मंदिर जी की व्यवस्था सुचारू रूप से निरंतर करते है। अन्य जिन मंदिरों में भी ऐसी ही व्यवस्था जारी रखने की भावना उन्होंने व्यक्त की है।
सूत्र आगमों से प्राप्त कर जन जन तक पहुंचाएं है
राजाओं के गुरुओं पर चर्चा करने के दौरान बताया गया कि प्रत्येक राजा के अपने परिवार के गुरु होते थे। जो संकट के समय मार्गदर्शन प्रदान करते थे। श्रेणिक राजा के प्रभु वीर, श्री रामचन्द्र जी के गुरु वशिष्ठ, संप्रति राजा जिन्होंने जगह-जगह जिन मंदिरों का निर्माण कराया उनके गुरु आचार्य सुहस्ती सूरीश्वर जी थे। संस्कृत के सारे सूत्र जैन परंपरा के आचार्य देव भगवंताे ने रचना की है, किंतु प्राकृत भाषा के सभी सूत्र आगमों से प्राप्त कर जन जन तक पहुंचाएं गए हैं।
विवेकपूर्ण निर्णय लेकर समस्या का निदान करने का सोचना चाहिए
सुदर्शनपुर के राजा चंद्रयश द्वारा मिथिला के नमी राजा का हाथी अपने पास रखकर नहीं लौटने की सूचना पाकर नमी राजा एकदम क्रोधित हो उठा। क्रोध की अग्नि में अपने आप को डालकर तत्काल सेनापति को युद्ध की तैयारी हेतु आदेश प्रदान कर दिया। इस पर से राजा के सलाहकारों ने परामर्श दिया कि राजन किसी भी समस्या का हल युद्ध ही नहीं है। क्रोध में व्यक्ति स्वयं तो जलकर भस्म होता है, किंतु अन्य को भी जलाकर भस्म कर देता है। केवल एक हाथी के लिए युद्ध करके नरसंहार को आमंत्रण देना श्रेष्ठ नहीं होगा। आपसी सौहार्द एवं संवाद से समस्या का हल खोजना कहीं ज्यादा बुद्धिमता पूर्ण कार्य होगा। कहने का तात्पर्य विवाद की स्थिति में विवेकपूर्ण निर्णय लेकर समस्या का निदान करने का सोचना चाहिए।
उपस्थित थे ये समाजजन
मीडिया प्रभारी रिंकू रुनवाल और प्रवक्ता संजय जगावत ने बताया कि धर्म सभा में वरिष्ठ सुश्रावक धर्मचंद मेहता, मनोहरलाल छाजेड़, हमीरमल कासवा, मनोज जैन, श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता, प्रतीक मुथा , कमलेश कोठारी, कमलेश भंडारी, अनिल रूनवाल, निखिल भंडारी, अशोक राठौड़, रमेश छाजेड़, सुरेंद्र काठी, अशोक कटारिया और रचित कटारिया आदि उपस्थित थे।

