क्या जमीन पर फैले खून को सिर्फ कागज पर स्याही डालकर पोछने में लगा है जिला प्रशासन? क्या मात्र मुआवजे से थमी सांसे दोबारा आ जायेगी? मासूमों का क्या होगा?
राजनीतिक ओर प्रशासनिक संरक्षण से जिले में रेत ही न जाने क्या-क्या हो रहा अवैध परिवहन? कही जवाबदार मिठाई स्वाद में कर्तव्य तो नही भूल रहे?
अवैध रेती परिवहन कर रहा ट्रक अनियंत्रित होकर कच्चे मकान के ऊपर पलटा, एक ही परिवार के तीन सदस्य की हुई मौत
झाबुआ।संजय जैन-सह संपादक। झाबुआ जिले में राजनीतिक रसूखदारों ओर प्रशासन के सरंक्षण से सरकार द्वारा रेत खनन पर लगाए गए 3 माह के प्रतिबंध के आदेश की खुले आम धज्जियां उड़ाई जा रही है। जिले में अवैध रेत परिवहन का खुलेआम खेल चल रहा है। गौरतलब है कि यदि जिले की कप्तान की कार का रेत परिवहन करने वाले डंफर से एक्सीडेंट नहीं होता तो, सब कुछ जो मिठाई की खुशी और गांधी के साथ सेट कर चल रहा था वह शायद चलता ही रहता।
एक ही परिवार के तीन सदस्य की मौत
प्राप्त जानकारी अनुसार कल शनिवार सुबह साढ़े तीन बजे के दरमियान अवैध रेत परिवहन करने रेती से भरा हुआ ट्रक क्रमांक जीजे 34 टी 3439 गुजरात के छोटा उदयपुर रोड से मध्यप्रदेश के धार जिले के राजगढ़ से होते हुए झिरी गांव की तरफ से निकल रहा था। यह ट्रक कालीदेवी थाना क्षेत्र के गांव फतीपुरा में चोरण माता घाट पर कच्चे मकान में अनियंत्रित होकर जा घुसा और पलट गया। इस हादसे में घर के अंदर सो रहे निर्दोष ग्रामीण देसीह पिता नूरा मेडा उम्र 27 वर्ष ल,उनकी पत्नी रमिला उम्र 25 वर्ष और बेटी आरोही उम्र 6 की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद ड्राइवर फरार हो गया।
प्रशासन को अब कुछ तो सबक लेकर आगे की कार्रवाई करनी चाहिए
अब इस दर्दनाक हादसे से जिला प्रशासन कुछ तो सबक लेकर चाहे वह रेत माफिया हो या औऱ कोई माफिया हो,उन्हें मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की मंशा अनुसार नेस्तनाबूत करने की कार्यवाही करने में ईमानदारी और दृढ़ इक्षा शक्ति के साथ अपनी पूरी ताकत झोक देना चाहिए, जिससे जिले के सभी प्रकार के अवैध धंधे करने वाले माफियाओं का बेहद आसानी से सफाया भी हो जाएगा और जिले के लोग अमन चैन से रह सकेंगे,ऐसा हमारा मानना है।
3 घंटे की बड़ी मस्कत के बाद तीनों शवो को निकाला गया
हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। ट्रक को क्रेन की मदद से उठाया और हटाया गया। तीनों शवों को बड़ी मस्कत के बाद निकाल लिया गयेम और ट्रक को क्रेन से उठाकर हटाया गया ।ग्रामीणों ने खुद रेस्क्यू शुरू कर शव को निकाला । घटना की जानकारी उस वक्त मिली जब गांव के कुछ लोग वहां से गुजर रहे थे,उन्होंने फौरन बाकी गांव वालों को भी हादसे की जानकारी दी। पुलिस को सूचना देने के बाद उन्होंने खुद रेस्क्यू शुरू किया करीब आधे घंटे बाद पुलिस की टीम भी पहुंच गई थी।
कलेक्टर कार हादसे के बाद ही अवैध रेत परिवहन वाले डरे हुए
कलेक्टर नेहा मीना ने एसडीएम भास्कर गाचले से स्थिति की जानकारी ली।रेत माफियाओ ने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए अवैध रेत परिवहन करने के हेतु छुपे ग्रामीण रास्तों को चुनकर ट्रक वहा से निकाले रहे है क्योंकि कलेक्टर कार हादसे के बाद से अवैध रेती परिवहन करने वाले माफियाओं के खिलाफ खनिज विभाग सख्ती का रुख अख्तियार किए हुए है।
हादसे के बाद प्रशासन ने दिखाई चुस्ती, एसडीएम और एसडीओपी ने खुद संभाला मोर्चा
इस दर्दनाक ट्रक हादसे के बाद प्रशासन ने प्रशासनिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ मानवीयता की मिशाल पेश की। घटना की सूचना मिलते ही झाबुआ एसडीएम भास्कर गाचले और एसडीओपी रूपरेखा यादव अपनी पूरी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंच गए थे। उन्होंने हालात को खुद अपनी निगरानी में लिया और तुरंत मौके पर मौजूद अधिकारी ,पुलिस बल और ग्रामीणों के सहयोग से मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन को अपने कुशल नेतृत्व से अंजाम दिया, जिससे सभी शव को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाल लिए गए । जिला प्रशासन ने पीड़ित परिवार को ढांढस भी बंधाया। आरटीओ ने ट्रक का पंजीयन तुरंत निरस्त कर आरटीओ छोटा उदयपुर को फिटनेस व परमिट करने की कार्रवाई हेतु पत्र भी प्रेषित कर दिया। एसडीएम और एसडीओपी की इस तत्परता ने प्रशासन के प्रति जनता के विश्वास को मजबूती दी और यह स्पष्ट किया कि प्रशासन सिर्फ कागजों में नहीं जमीनी हकीकत में भी लोगों के साथ है।
क्या मात्र सरकारी मुआवजे से मृतक लोगो की सांसे दोबारा आ आयेगी?
अब देखना है कि क्या आगे की प्रक्रिया, जांच, मुआवजा और कार्रवाई ईमानदारी से की जाएगी या नही। लेकिन प्रश्न यह उठता की क्या मात्र सरकारी मुआवजे से मृतक लोगो की सांसे दोबारा आ आयेगी...? या चंद रुपयो से जो दो बच्चे मासूम बच गए है उनकी जिंदगी संवर जायेगी। दोनों मासूमों के सिर से माता पिता का साथ छूट गया और अब वे लगभग लावारिस की तरह ही हो गए है,उनका कौन बनेगा सहारा और अब कौन उनकी परवरिश करेगा...?
दारू का ट्रक होता तो क्या होता?
इस हादसे के बाद जब हमारी टीम ने लोगो से चर्चा कि तो लोगो ने रोष पूर्वक कहा कि छोटे लोगो के जान माल की चिंता किसी को नही रहती है।अक्सर माफिया हर मामले में साफ लक्ष्मी यंत्र के सहारे बेख़ौफ ऐसा कृत्य ही रहते है। हमे तो अब तक समझ मे नही आया है कि अक्सर ऐसे हादसे और दारू की गाड़ी पकड़ने के बाद चालक अधिकतर फरार होने में कैसे कामयाब हो जाता है...? यह तो बस प्रशासन ही जानता है। कुछ लोगो ने व्यंग करते हुए कहा कि यह तो गत दिनों कलेक्टर की कार को रेत के डम्फर ने ठोका तो प्रशासन इतना अभी तक सजग भी है। कोई आम आदमी की कार को ठोका होता तो शायद बात बाहर ही नही आतीं, जबकि कलेक्टर की कार को ठोकने के बाद प्रशासन ने तुरन्त सीबीआई और ईडी की तरह कार्रवाई कर दी,जबकि मामला सिर्फ वाहन दुघर्टना का ही था जिसमें किसी को खरोच तक भी नहीं आयी थी। वही इस हादसे में एक ही परिवार के 3 सदस्यों की दर्दनाक मौत भी हो गयी है। हमारा जिले की कप्तान से यह प्रश्न है कि क्या अब उनके कार हादसे की तरह ही वे ऐसी ही कार्रवाई कर पायेगी...? कुछ लोगो ने चटखारे लेते हुए कहा कि यदि कलेक्टर के वाहन को दारू माफियां के ट्रक ने ठोका होता तो क्या वे ऐसी करवाई करवा पाती क्या...? यदि कार्रवाई करती भी तो दारू माफिया उनका तबादला हाथोंहाथ करवा देता, वो तबादला क्यो कर पाता,यह सब भली भांति जानते भी है, क्योंकि दारू माफिया यह मामला तो उच्च स्तर तक पहुँचा देता।

