गंगा स्नान जैसा पवित्र लाभ संवत्सरी महापर्व पर सभी जीवों से क्षमायाचना करने से प्राप्त होता है -ः साध्वी अनुभव दृष्टाश्रीजी
पयूर्षण महापर्व में 12 श्रावक और श्राविकाओं ने की अट्ठाई साथ ही कई तेले, बेले और उपवास के साथ अन्य तपस्याएं की
लाभार्थी भंडारी परिवार एवं अट्ठाई तप के तपस्वियों का श्री संघ ने किया बहुमान
झाबुआ।संजय जैन-सह संपादक। श्वेतांबर जैन मूर्तिपूजक श्री संघ ,ने पर्यूषण महापर्व मनाने के तारतम्य में श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में कल गुरूवार को समाज के करीब 700 श्राविक- श्राविकाओं के पारणा महोत्सव का आयोजन किया। पोषध शाला भवन में परम् पूज्य साध्वी श्री रत्नरेखा श्रीजी, अनुभव दृष्टाश्रीजी एवं कल्पलताश्रीजी ने सुंदर स्तवन के साथ संत्वसरी (क्षमापना) महापर्व के महत्व के बारे मंे समाजजनों को बताया गया। इस दौरान श्री संघ एवं परिषद् परिवार द्वारा पारणा महोत्सव के लाभार्थी यशवंत भंडारी परिवार औऱ अट्ठाई तप करने वाले श्रावक- श्राविकाओं का बहुमान भी किया गया।
सतत 46 वर्षों से समीरमल भंडारी की स्मृति में चल रहा पारणा
जानकारी देते हुए श्री संघ के मीडिया प्रभारी रिंकू रूनवाल और प्रवक्ता संजय जगावत ने बताया कि बावन जिलालय स्थित गुरू मंदिर हॉल एवं परिसर में पारणा महोत्सव का आयोजन सुबह 7.45 बजे से आरंभ हुआ। जिसमें अट्ठम, तेले का उपवास करने के साथ अन्य सभी तपस्वी श्रावक-श्राविकाओं ने पारणे का लाभ लिया। सतत 46 वर्षों से पारणे के लाभार्थी स्व. श्रीमती वालीबाई समीरमल भंडारी की स्मृति में यशवंत, निखिल, शार्दुल, जिनांश भंडारी परिवार रहा। श्री संघ के सदस्यों एवं युवाओं ने अपना विशेष सहयोग प्रदान किया।
गंगा स्नान जैसा पवित्र लाभ
साध्वीश्री अनुभव दृष्टाश्रीजी ने मंगलाचरण के साथ प्रवचन की शुरूआत करते हुए पयूर्षण महापर्व के दौरान आने वाले संत्वसरी महापर्व की महिमा का बखान किया। आपने बताया कि गंगा स्नान जैसा पवित्र लाभ पर्यूषण पर्व के दौरान संत्वसरी महापर्व पर क्षमायाचना करने से प्राप्त होता है। मन, वचन और काया से क्षमापना मांगने से अपनत्व और प्रेम का भाव पैदा होता है। सारे गिले-शिकवे दूर हो जाते है और एक-दूसरे के प्रति राग-द्वेष भी खत्म हो जाता है। साथ ही तप करने से कर्मों की निर्जरा के साथ आत्मा की शुद्ध भी होती है। इस दौरान साध्वी रत्नरेखा श्रीजी ने संत्वसरी (क्षमापना) पर सुंदर स्तवन प्रस्तुत किया।
लाभार्थी भंडारी परिवार का हुआ बहुमान
बहुमान के क्रम में सर्वप्रथम पारणा महोत्सव के लाभार्थी यशवंत, निखिल, शार्दुल भंडारी का तिलक कर शाल-श्रीफल से बहुमान श्री संघ के अध्यक्ष संजय मेहता, पूर्व अध्यक्ष मनोहरलाल भंडारी, समाज जन निर्मल मेहता, प्रकाश कटारिया, अनिल रूनवाल और संजय जगावत ने किया। बाद श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता ,अट्ठाइ के तपस्वी एवं चातुर्मास समिति के कमलेश कोठारी का बहुमान भी संघ के पदाधिकारी उल्लास जैन, हेमेंद्र संघवी,राजेश मेहता, निशांत शाह,सार्थक मेहता एवं संजय जगावत आदि ने किया। परिषद् परिवार ने भी बहुमान करते हुए उनके द्वारा पयूर्षण महापर्व के दौरान प्रदान किए विशेष सहयोग के लिए अनुमोदना की। सूत्र एवं ग्रंथ कंठस्थ बोलने वाले नन्हें बालक-बालिकाओं को प्रभावना का वितरण किया गया।
इन तपस्वियों का हुआ बहुमान
9 एवं 8 उपवास के तपस्वी अंकित कटारिया, पंकज कोठारी पारा वाले, विपुल जैन ‘शुभम’ राकेश गोखरू, रत्नदीप (मोनू) सकलेचा, गौरव राठौर (विद्याश्री), तपस्विनी कु. नीर विपुल जैन ‘शुभम’, कु. ख़ुशी प्रमोद भंडारी, डॉ. मेघा वैभव बाबेल, अंजू प्रमोद भंडारी, सिमरन साहिल सोलंकी (जैन) एवं ज्योति शांतिरत्न सकलेचा का बहुमान के लाभार्थी भंडारी परिवार के साथ श्री संघ ने तिलक कर एवं शाल-श्रीफल से किया । पयूर्षण महापर्व के दौरान व्यवस्था में विशेष सहयोग देने वाले अमरसिंह पाल, रोहित शर्मा, खुमा, राहुल पवन का श्री संघ ने अभिनंदन कर उनके सहयोग के लिए कृतज्ञता व्यक्त की।
सभी ने एक-दूसरे से सामूहिक क्षमापना की
इस दौरान श्री वर्धमान स्वानकवासी श्री संघ से समाजजनों ने पहुंचकर साध्वी रत्नरेखा श्रीजी आदि ठाणा एवं समाजजनों से क्षमापना की। स्थानकवासी श्री संघ अध्यक्ष प्रदीप रूनवाल ने पयूर्षण महापर्व के महत्व को समझाया। वहीं श्वेतांबर जैन श्री संघ के पूर्व अध्यक्ष मनोहरलाल भंडारी, यशवंत भंडारी, निर्मल मेहता, संजय जैन (जगावत) ने अपने उद्गार में पयूर्षण महापर्व पर संक्षिप्त प्रकाश डालते हुए क्षमायाचना की महत्वता को प्रतिपादित किया। बहुमान कार्यक्रम का संचालन श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाज के श्रावक- श्राविकाएं उपस्थित रहे।

