सराफा की तरह चौपाटी भी धरोहर,नहीं हटेगी सराफा चौपाटी- रात में 80 दुकानें तो लगेंगी ही,अब जिसे जो करना है करे पुष्यमित्र भार्गव : महापौर

कितनों ने तलघर में दुकानों का नक्शा पास कराया है? -व्यापारियों की चिंता आगजनी जैसी घटना हो जाए तो फायर ब्रिगेड तक नहीं जा सकता


झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक।  महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने स्पष्ट कर दिया है कि सराफा चौपाटी वाली जो 80 दुकानें दशकों से लग रही हैं वही दुकानें एक सितंबर के बाद भी वहीं लगेंगी। हां,जो बाकी जितनी भी दुकानें अभी लग रही हैं,उन्हें नहीं लगने देंगे। इन 80 दुकानों को लेकर यदि सराफा व्यापारियों की कोई आपत्ति है तो उसका हल भी निकालेंगे। यह बात सराफा एसोसिएशन पदाधिकारियों को गत दिनो हुई बैठक में समझा दी गयी थी। सराफा की तरह ही चौपाटी भी एक धरोहर है। इंदौर का कोई नागरिक नहीं चाहेगा कि चौपाटी यहां से हटाई जाए। नगर निगम ने तो 80 दुकानों को अनुमति वाली रिपोर्ट महीनों पहले जारी कर दी थी, फिर ये विरोध की बातें अब अचानक क्यों शुरु कर दी गयी?

अब जिसे जो करना है करे

महापौर ने चर्चा में कहा यदि गैस टंकी उपयोग और संभावित खतरे जैसी बात है तो यह मुद्दा इतना बढ़ा भी नहीं है कि जिसे हल नहीं किया जा सके। पिछले दिनों हुई बैठक जो निर्णय लिए गए है,वे फायनल है.आगेअब जिसे जो करना है करे। प्रशासन भी नहीं चाहेगा कि त्योहारी सीजन में शहर की शांति भंग हो। ऐसा कोई मुद्दा नहीं जिसे आपसी चर्चा से हल न किया जा सके। जिस सराफा,बोहरा बाजार, मारोठिया जैसी तंग गलियों में दोनों तरफ  से निकलने वाले दो पहिया वाहन भी फर्राटे से नहीं निकल सकते हैं। यदि इन बाजारों में सरेशाम कोई धमाका हो जाए तो फायर ब्रिगेड वाहन कैसे पहुंच पाएगा....? जाहिर है बाजार वाली गली के मुहाने-चौराहे पर ही वॉटर टैंक वाले वाहन से अंदर तक पाईप लाइन बिछा कर ही काबू पाने के प्रयास किए जाएंगे। गौरतलब है कि मल्हारगंज से खजूरी बाजार मार्ग चौड़ीकरण, नृसिंह बाजार से खजूरी बाजार को जोड़ने वाले मार्ग का चौड़ीकरण जरूर हुआ है,लेकिन दिन में ई-रिक्शा चालकों के कब्जे से लेकर रॉंग साइड आने वाले वाहन चालकों पर,सख्ती नहीं होने से दिन में यातायात प्रभावित रहता है और रात में सराफा चौपाटी तक पहुंचने वाले इन मार्गों पर चाहे जहां वाहन पार्क कर देते हैं।

होलकर रियासत के वक्त सराफा बाजार की स्थापना

होलकर रियासत के वक्त सराफा बाजार की स्थापना सोना-चांदी-हीरे आदि का कारोबार करने के लिए व्यापारियों को दुकानें दी गई थी। राजबाड़ा के समीप ही सराफा क्षेत्र विकसित करने का उद्देश्य यह भी था कि सुरक्षा को लेकर व्यापारी निश्चिंत रहें। चौपाटी की दुकानें तो बाद में अस्तित्व में आई,कपड़ा मार्केट में दुकानें मंगल करने के बाद व्यापारी रात में ठंडाई छानने के बाद इन दुकानों पर तर माल खाने और तांगों में तफरीह करने के लिए निकलते थे। धान गली में भांग ठंडाई की दुकान पर शाम ढलते ही ग्राहकों की भीड़ इसलिए भी बढ़ जाती थी क्योंकि सराफा चौपाटी पर रबड़ी,गुलाब जामुन, घेवर, जलेबी,चटपटी चाट, कचोरी ,भुट्टे का किस आदि उपलब्ध रहता था। सराफा से खजूरी बाजार को जोड़ने वाली उस पतली गली वाली धान गली में भी अब सोना- चांदी जेवर सुधारने वाले बंगाली कारीगर इन व्यापारियों के लिए काम करते हैं।

कितनों ने तलघर में दुकानों का नक्शा पास कराया है?

किसी दुकान पर आगजनी,सिलेंडर में ब्लास्ट पर अन्य दुकानों के सिलेंडर में ब्लास्ट के साथ ही बंगाली कारीगरों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सिलेंडर भी ब्लास्ट होने में वक्त भी नहीं लगेगा। ऐसे हालता जिस दिन भी बनेंगे वो वक्त सराफा,बोहरा बाजार,पीपली बाजार, धान गली,बर्तन बाजार, मारोठिया,शक्कर बाजार से लेकर कपड़ा मार्केट तक की दुकानों और इन बाजारों वाले मकानों में रहने वाले परिवारों के लिए बेहद घातक हो सकता है। ठीक है कि नगर निगम के पास ऐसे हालात से निपटने के पर्याप्त संसाधन है, जिला- पुलिस प्रशासन भी मुस्तैद है लेकिन इसी शहर ने रंगपंचमी की गैर में महिलाओं के साथ हुई अशोभनीय व्यवहार उसी राजवाड़ा क्षेत्र में देखा भी है,जहां भारी भरकम पुलिस बल मौजूद रहता है। शहर के आमजन उस नेहरु प्रतिमा वाले चौराहे से गुजरते हुए आज भी सोचते हैं कि संसाधनों से लैस नगर निगम पता नहीं चौराहे का काम कब पूरा करेगा? सराफा में पिछले कुछ वर्षों में कमर्शियल कॉम्प्लेक्स जिस तेजी से बने हैं,उनमें से कितनों ने तलघर में दुकानों का नक्शा पास कराया है....? यह नगर निगम को भी शायद पता नहीं होगा।

एक भी दुकान के पक्ष में नहीं : हुकुम सोनी

एसोसिएशन अध्यक्ष  हुकुम सोनी ने कहा महापौर से साफ  कह दिया है कि हम एक भी दुकान लगाए जाने के पक्ष में नहीं हैं। एक सितंबर से व्यापारी एक जुट होकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करेंगे। हमने महापौर से कहा है जिन 80 दुकानदारों को अनुमति दे रहे हैं,वो सूची पहले हमें बताए। ऐसा तो नहीं कि पारंपरिक व्यंजन की आड़ में मोमोज,नूडल्स,पोटेटो ट्विस्टर,पान,गोली , चूर्ण जैसी दुकानों को तो अनुमति नहीं दे रहे हैं।

विरोध के खतरे भी पता हैं सराफा एसोसिएशन को

सराफा चौपाटी का विरोध करने वाले सोना-चांदी व्यापारी एसोसिएशन को नगर निगम द्वारा बदले में की जाने वाली कार्रवाई के खतरे भी पता हैं। नगर निगम अतिक्रमण विरोधी मुहिम चला कर आवाज दबा सकता है,इमारतों में नक्शे के विपरीत बने निर्माण तोड़ सकता है। व्यापारी ऐसे खतरों का सामना करने के इसलिए भी तैयार हैं कि वोट तो हमने भी दिया है,नगर निगम और सरकार के अच्छे काम में सहयोग के आह्वान पर हम भी पीछे नहीं हटते,फिर हम चौपाटी हटाने की मांग तो व्यापक हित में कर रहे हैं। ठीक है कि अब तक कोई हादसा नहीं हुआ,हो गया तो सरकार मृतकों को दो लाख, घायलों को पचास हजार, टीआई, एसपी, कलेक्टर पर एक्शन से ज्यादा क्या कर लेगी? सराफा इस शहर की धरोहर है तो चौपाटी भी धरोहर है,प्रशासन का दायित्व है हमारी मांग की गंभीरता समझे और चौपाटी वालों को किसी अन्य खुली और पार्किंग सुविधा वाली जगह पर स्थानांतरित करे।

हम हमारी कमियां दूर करने की कोशिश करेंगे

1930 से यहां चौपाटी लग रही है,सराफा व्यापारियों ने ही हमें जगह दी थी। अगर उन्हें कोई शिकायत है तो हम हमारी कमियां दूर करने की कोशिश करेंगे। वे जैसा कहेंगे, हम वैसा ही करेंगे।

राम गुप्ता-अध्यक्ष, चौपाटी संचालक एसोसिएशन

जो निर्णय लिए गए है,वे फायनल

सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए बनी समिति ने चौपाटी में 80 परंपरागत दुकानों के संचालन की ही अनुशंसा की है। इसके बाद एमआईसी ने इस प्रस्ताव को पास कर दिया है और 1 सितंबर से सिर्फ  80 दुकानों को ही लगाने की अनुमति रहेगी। पिछले दिनों हुई बैठक जो निर्णय लिए गए है,वे फायनल है आगे अब जिसे जो करना है करे।

पुष्यमित्र भार्गव- महापौर