सराफा व्यापारी चौपाटी से नाराज, लेकिन बंगाली कारीगरों को तो दे रहे पनाह? जितना खतरा चौपाटी दुकानदारों से,उतना खतरा बंगाली कारीगरों से भी तो है

सिगड़ी छोड़,लगभग सभी दुकानदार गैस टंकी का कर रहे उपयोग - फायर ब्रिगेड वाहन का नहीं घुस पाना चुनौतीपूर्ण

झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक।  जिन सराफा व्यापारियों ने दशकों पहले अपने ओटले किराए पर देकर सराफा चौपाटी के दुकानदारों को अपने कंधे पर बैठाया था,आखिर वही क्यों अब उन्हें यहां से भगाने पर आमादा हो गए है? पिछले कुछ सालों में बने इस हालात की एक बड़ी वजह यह है कि दुकानदार सिगड़ी के सम्मान को भूल कर चौपाटी की दुकानों में गैस भट्टी का मोह बढ़ जाना है । संकरी गलियों वाले सराफा क्षेत्र में चाट-व्यंजन की इन दुकानों का इतिहास करीब नौ दशक पुराना है। तब चौपाटी के दुकानदार खानपान की सामग्री घर से ही बना कर लाते थे और इस खाद्य सामग्री को गर्म रखने के लिए कोयले वाली सिगड़ियों का इस्तेमाल करते थे। फिर चाहे गुलाब जामुन,भुट्टे का किस हो या अन्य सामग्री। सिगड़ी की आंच से टेस्ट तो बरकरार रहता ही था, साथ ही लपटें उठने और आगजनी जैसी घटना की आशंका तक नहीं रहती थी।

सिगड़ी छोड़,लगभग सभी दुकानदार गैस टंकी का कर रहे उपयोग

पहले दुकानों की संख्या इतनी नहीं थी,लेकिन इन दो-तीन दशकों में सराफा क्षेत्र में कमर्शियल काम्प्लेक्स बनते जाने के साथ ही ज्वेलर्स की दुकानें तलघर में भी शुरु हो गई हैं ,साथ ही चौपाटी की दुकानों में भी इजाफा हुआ है। ष्टेस्ट में बेस्ट पसंद करने वाले इंदौर के लोग चाहे पोहे,जलेबी,गुलाब जामुन,सेव,कचोरी हो या दूध का कड़ाव हो या गराडू,घान से उतरी गरमागरम सामग्री खाना ही पसंद करते हैं,इसलिये सिगड़ी को छोड़ कर लगभग सभी दुकानदार गैस टंकी और भट्टी का उपयोग कर रहे हैं।

संकरी गलियों वाले क्षेत्र में फैलती जा रही चौपाटी

बड़ा-छोटा सराफा वाली यह चौपाटी भी धीरे-धीरे बोहरा बाजार,शक्कर बाजार,पीपली बाजार आदि संकरी गलियों वाले क्षेत्र में फैलती जा रही हैं। इन क्षेत्रों के रहवासी भी देर रात तक चलने वाली चौपाटी और हो हल्ले से त्रस्त हैं। गैस भट्टी से संचालित हो रही चौपाटी की इन दुकानों से अब तक आगजनी की कोई बड़ी घटना नहीं हुई है,लेकिन किसी भी दिन गैस टंकी में ब्लास्ट हो गया या खौलते तेल की कढ़ाई रात में उमड़ने वाली भीड़ के टल्ले या भगदड़ से पलट गई तो कल्पना कर के ही सिहरन हो जाती है। सराफा में सांवरिया चाट हाउस के मालिक पर आग फैलने के मामले में पिछले दिनों केस दर्ज भी हो चुका है।  

किराए का लालच,नौकरों को शह

सराफा चौपाटी को स्थानांतरित करने को लेकर लामबंद हुए व्यापारियों में कई ऐसे भी है जिन्होंने 25 से 40 हजार तक के किराए पर अपने ओटले किराए पर दे रखे हैं। यही नहीं कई दुकानों के नौकर और चौकीदार रात में चौपाटी वाले दुकानदार भी हो गए हैं। सराफा व्यापारी के यहां शाम तक लगभग मुफ्त में काम करने वाले ये लोग,अपनी मजदूरी उसी ओटले पर व्यंजन की दुकान लगा कर निकाल लेते हैं।

चौपाटी से तो नाराज,लेकिन बंगाली कारीगरों को पनाह

सराफा चौपाटी दुकानदारों को अब जनहानि के लिए खतरा बताने वाले ज्वेलर्स उन हजारों बंगाली कारीगरों के आश्रयदाता बने हुए हैं,जो इन दुकानदारों को ग्राहकों के सोने-चांदी के आभूषण में टांका लगाने से लेकर डिजाइनर जेवर बनाने के लिए सोना गलाने के लिए गैस भट्टी का कई वर्षों से इस्तेमाल कर रहे हैं। जिन आभूषण की दुकान संचालित करने वाले लगभन सभी दुकानदारों ने अपने सिर पर बंगाली कारीगरों को आश्रय इसलिए भी दे रखा है कि कई ग्राहक जो हाथोंहाथ जेवर सुधरवाना चाहते हैं,उन्हें खाली हाथ ना लौटाना पड़े। इन संकरी गलियों में यदि चौपाटी की दुकानों पर गैस भट्टी का इस्तेमाल खतरनाक माना जाए,तो छोटी-छोटी कोठरी में बंगाली कारीगरों द्वारा सोना-चांदी गलाने में तेजाब सहित गैस भट्टी का इस्तेमाल कैसे सुरक्षित माना जा सकता है? सराफा क्षेत्र की संकरी गलियों में फायर ब्रिगेड वाहन का नहीं घुस पाना,दोनों ही मामलों में चुनौतीपूर्ण है।

हरदा की पटाखा फैक्टरी के बाद गर निगम को हुई चिंता

दो वर्ष पूर्व हरदा की पटाखा फैक्ट्री पर हुए विस्फोट और जनहानि के बाद इंदौर की सराफा चाट चौपाटी की सुरक्षा को लेकर नगर निगम को चिंता हुई और एक समिति का गठन कर जांच कराई गई। इसमें यह निष्कर्ष निकला कि सराफा चौपाटी बारूद के ढेर पर बैठी है,क्योंकि यह चौपाटी खुले में लगती है और यहां संकरी गलियों में गैस भट्टियों का बगैर किसी सुरक्षा व्यवस्था के इस्तेमाल होता है। सराफा की कई चाट की दुकानों में फुटपाथ पर ही सामग्री तत्काल निर्मित की जाती है। सराफा में सोना-चांदी का कार्य होता है और उसमें तेजाब की जरूरत रहती है,आभूषणों के निर्माण में गैस का उपयोग होता हैं। संकरी गलियां और कोई अनहोनी होने पर फायर ब्रिगेड के वाहनों को पहुंचने में कई तक लीफों को देखते हुए चौपाटी पर रोज आने वाले सैकड़ों लोगों की सुरक्षा प्रमुख मुद्दा बन गया है।

प्रशासन ले सब के हित में निर्णय-सराफा दुकानदार परेशान न हों

चौपाटी दुकानदारों का कारोबार भी प्रभावित न हो इस दिशा में नगर निगम,जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और दोनों एसोसिएशन के पदाधिकारियों को बैठा कर सर्व सम्मत हल निकालना चाहिए। नगर निगम की समिति ने रिपोर्ट देकर अपना काम जरूर पूरा तो कर लिया,लेकिन यह नगर निगम वार्डों में दुकानदारों के लिए मार्केट बनाने की घोषणा पर काम नहीं कर पाया है। चौपाटी दुकानदारों को लालबाग, गांधी हाल,रिवर साइड रोड या अन्य कहीं भी जगह दे, इन दुकानदारों की सुरक्षा के साथ ही उन क्षेत्रों में असामाजिक तत्व सक्रिय ना हो इस पर भी पहल करना होगी। सराफा दुकानदारों ने जिन हजारों बंगाली कारीगरों को अपनी इमारतों में किराए पर कमरे दे रखे हैं उन सब को भी कहीं शिफ्ट करना चाहिए। नगर निगम- सराफा व्यापारी मिल कर पीपीपी मॉडल पर कॉम्प्लेक्स की दिशा में काम कर सकते हैं।