अगले महीने से शुरू होगा नगर सरकार आपके द्वार कार्यक्रम

झाबुआ/ इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। पिछले दिनों महापौर इंदौर पुष्यमित्र भार्गव ने पांच में से कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे होने पर एक सवाल के जवाब में घोषणा की है कि सप्ताह में एक दिन (पीक अवर्स) दो पहिया वाहन से वे शहर का भ्रमण करेंगे।सितंबर से शेष बचे दो साल में नगर सरकार आप के द्वार  कार्यक्रम में एमआयसी सदस्यों के साथ हर वार्ड में जाकर समस्या सुनेंगे और हाथोंहाथ निराकरण भी करेंगे।       
      
शहर में भ्रमण की घोषणा क्यों नहीं करते है?

सड़कों पर गड्ढे, बदहाल ट्रैफिक के चलते आमजन को हो रही परेशानी की जमीनी हकीकत जानने के लिए निगमायुक्त और आप खुद सप्ताह में एक दिन दोपहिया वाहन से शहर में भ्रमण करने की घोषणा क्यों नहीं करते है...? मीडिया के उक्त सवाल पर महापौर ने तत्काल सहमति देते हुए कहा कि मैं इस पर अवश्य अमल करुंगा,आप इसे लिख लीजिये ...लेकिन निगमायुक्त की जिम्मेदारी मैं नहीं ले सकता हूँ। आगे उन्होंने कहा कि आप सभी मीडिया वालों को मैं अपनी उपलब्धियां तो नहीं गिनाउंगा,लेकिन अपने कार्यकाल में दो-पांच काम ऐसे जरूर कर जाऊंगा कि बीस साल बाद भी इन कामों के लिये लोग मुझे याद रखेंगे। आधे से ज्यादा कार्यकाल पूरा होने पर अभी अवलोकन का समय भी आ गया है।आज जो पेयजल का संकट है, भविष्य में तो और गहराएगा उसे देखते हुए नर्मदा के चौथे चरण का प्रस्ताव जिसे एमआईसी में मंजूर भी किया गया है।                

पानी का लीकेज बड़ी चुनौती               

अभी इंदौर शहर की आबादी 33 लाख के करीब है। जितने क्षेत्रों में हम पानी पहुंचा रहे हैं, उसमे प्रति घर एक हजार का खर्चा आ रहा है जबकि हम मात्र 300 रु.ही जलकर ले रहे हैं। एक लीकेज सुधारने में पांच-छह दिन लगते हैं।नगर निगम का आयकॉनिक भवन बनाने के लिए टेंडर भी किया गया है। सभी वार्डों के पार्षद भी अपने तीन साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड पेश कर रहे हैं।      

57 स्थानों पर जल जमाव की समस्या समाप्त                                

बारिश के दिनों में जल जमाव वाले 128 स्थान चिह्नित किए थे,इनमें से 57 स्थानों पर यह समस्या समाप्त हो गई है।पूरी तरह से उक्त समस्या को समाप्त करने के लिए कोई हमें दस हजार करोड़ एक मुश्त भी दे देवे तो, तब भी संभव नहीं कि सारी समस्या दूर हो ही जाए। ये उपलब्धि है कि जन सहयोग से हम सतत आठवीं बार भी नंबर वन हो गए हैं । सफाई पर हम हर साल 225 करोड़ खर्च करते हैं, बदले में सिर्फ 30 से 35 करोड़ ही आते हैं। नगर निगम सीमा में 29 गांव जोड़े गए,लेकिन विकास कार्यों के लिए तब पैसा नहीं मिला था। अब आगे 79 गांव और जुड़ने वाले हैं, लेकिन उप कर राशि का कोई भी खुलासा ही नहीं है।

नगर निगम इंदौर सबसे अपयश वाली जगह

महापौर ने आगे अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि इन तीन सालों में मुझे यह तो समझ आ ही गया है कि नगर निगम सबसे अपयश वाली जगह है। अतिक्रमण हटाओ तो अपयश, प्रशासन कार्रवाई के लिए निगम की मदद ले तो लोगों से अपयश हमें मिले। गुमटी हटाएं तो अपयश, जिस नेता का काम ना कर पाएं तो अपयश। विकास कार्यों के लिए टैक्स लगाएं तो अपयश....   

कलेक्टर ने हमें विश्वास में ही नहीं लिया

महापौर ने एक सवाल के जवाब में कहा हेलमेट संबंधी निर्णय में, मैंने कलेक्टर की हां में हां नहीं मिलाई थी। हेलमेट लगाने से व्यक्ति की जीवन की रक्षा होती है।इससे मैं भी सहमत हूं,लेकिन इस नियम को लागू करने में कलेक्टर ने मुझे या अन्य जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लिया ही नही। हमने कलेक्टर से मिलकर कहा भी  कि इस निर्णय से पहले जनप्रतिनिधियों से चर्चा के साथ आम नागरिकों को भी विश्वास में लेना था। एक अन्य सवाल के जवाब में महापौर ने कहा कि  मैं स्मार्ट सिटी द्वारा राजबाड़ा (मध्य क्षेत्र) में कराए गए कार्यों से खुश नहीं हूं। साथ ही मैंने स्मार्ट सिटी के इन निर्माण कार्यों की जांच कराने के आदेश दिए हैं।