अब तक बना चुके हैं दस धारावाहिक

झाबुआ/ इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। जबलपुर से दोस्त के साथ निकले तो थे शिक्षण संस्थान में एडमिशन लेने के लिए,  बीच में पड़ने वाले मुंबई स्टेशन पर कुछ देर ट्रेन का स्टॉप था। बस दोनों दोस्त वही उतर गए कि बॉलीवुड में चांस लेकर देखते हैं ।32 साल पहले यह निर्णय लेने वाले सिहोरा गाँव के सोमजी आर शास्त्री आज टीवी की दुनिया में रायटर- डायरेक्टर- प्रोड्यूसर के रूप में पहचान बना चुके हैं। अब एक साल तक चलने वाला उनका दसवां धारावाहिक देवांचल की प्रेम कथा दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल पर सोमवार से शुक्रवार प्राइम टाइम (रात 9 बजे) और अगले दिन सुबह 11.30 बजे इसका पुन: प्रसारण होगा।

कथानक का मूल संदेश है एकाकी होते रिश्ते

देवांचल की प्रेम कथा धारावाहिक के कथानक का मूल संदेश है एकाकी होते रिश्ते है। चाचा-मामा- ताऊ-ताई- आज ये सारे रिश्ते आंटी-अंकल में सिमट कर रह गए हैं या इनलॉ रह गया है या मेरे ‘इनलाज’ कह कर छुट्टी पा लेते हैं ।पाश्चात्य के प्रभाव में हम अपनी संस्कृति- संस्कार - सम्मान को भूलते जा रहे हैं।धारावाहिक के मुख्य किरदार देव (अथर्व हबीब) और आंचल ( कीर्ति नागपुरे) में एक बोल नहीं सकता दूसरा सुन नहीं सकता।

यूनाइटेड स्वास्तिक आर्टस का गठन

शास्त्री ने 1994 में यूनाइटेड स्वास्तिक आर्टस नाम के अपने बैनर तले जी टीवी के लिए नाजायज संबंधों आधारित लावारिस धारावाहिक बनाया । उन्होंने सोनी टीवी के लिए रिश्तों को तार तार करते एक पति और तीन पत्नी कथानक आधारित विद्रोही धारावाहिक, वंश चलाने के लिए बेटी से ज्यादा बेटे की चाहत कथानक वाला ममता, पुरुषों के अहंकार पर चोट करता मंगलसूत्र के साथ ही सीरियल अधिकार, कॉमेडी के साथ कटाक्ष करता राशि विला आदि कुल नौ धारावाहिक बना चुके हैं।इन धारावाहिकों में जबलपुर, इंदौर, देवास, उज्जैन आदि की लोकेशन भी वे शामिल कर चुके हैं। 

दूरदर्शन पर सतत एक साल प्रसारण को मंजूरी

‘देवांचल की प्रेम कथा की अधिकांश शूटिंग देव भूमि उत्तराखंड में हुई है। दूरदर्शन पर सतत एक साल इस धारावाहिक के प्रसारण को मंजूरी मिलने से उनका सपना भी पूरा हो जाएगा कि जिस समाज ने उन्हें इस लायक बनाया है,वे उसका कर्ज उतारने संस्कृति-संस्कारों की मजबूती के लिए कुछ कर सके। हां, उनको दूरदर्शन पर प्रसारण का एक बड़ा फायदा यह है कि देश के बड़े ऑडियंस तक उनकी बात अब पहुंच भी रही है।