मुख्यत:शहर के प्रभावी दुकानदार कैसे मुहिम से साफ -साफ बच जाते है?-त्योहारों पर सेहत बिगाड़ने सक्रिय हो गए नकली मावा,घी और पनीर के कारोबारी
प्रशासन की सैंपलिंग के भरोसे न रहें, अमानक खाद्य पदार्थ खपने के बाद आती है रिपोर्ट
झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने आगामी त्यौहारों के मद्देनज़र मिलावटी खाद्य सामग्री की संभावित बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रदेशभर में सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी जिलों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सतर्क रहते हुए मिलावटखोरों के विरुद्ध तत्काल और कठोर कार्रवाई करने के लिए कहा है। त्योहारों पर बाजार में मिठाई और मावे की बिक्री बढ़ जाती है। दूध,मावे और मिठाई की शुद्धता जानने में हमेशा बड़ी चूक होती है। त्योहार के दिनों पर मांग की तुलना में आपूर्ति नहीं होती है,ऐसे में कारोबारी मिलावट करके फायदा उठाते हैं। मिलावटी खाद्य सामग्री बिकने लगी है। खाद्य एवं औषधि नियंत्रण विभाग सैंपल लेता है,लेकिन लैब से जांच रिपोर्ट आने में 20 से 25 दिन लग जाते हैं,तब तक त्योहार खत्म हो जाता है। इसीलिए आम लोगों को स्वयं भी जागरूक होने की जरूरत है।
ऐसे बनता है मिलावटी मावा
मिलावटी मावा बनाने में दूध के पाउडर का इस्तेमाल होता है। इसमें रिफाइंड या वेजिटेबल ऑयल मिलाया जाता है। इसके अलावा रसायन, आलू, शकरकंदी का प्रयोग भी किया जाता है। इस दौरान सिंथेटिक दूध भी बड़े पैमाने पर बनाया जाता है। इसमें डिटर्जेट पाउडर, तरल जैल, चिकनाहट लाने के लिए रिफाइंड व आयल एवं एसेंट पाउडर डाला जाता है। इतना ही नहीं मिलावटखोर कई बार यूरिया के घोल में पाउडर व ऑयल डालकर भी सिंथेटिक दूध तैयार करते हैं। इसमें थोड़ा असली दूध मिलाकर सोखता कागज डाला जाता है। फिर इसी से नकली मावा व पनीर भी तैयार किया जाता है।
मिलावट के नुकसान
त्योहारों के मौसम में दूषित और मिलावटी मिठाई या खाद्य सामग्री का सेवन करने से उल्टी, दस्त, हैजा, पेट दर्द, गले में इंफेक्शन के मरीज बढ़ जाते हैं। नकली मावे के कारण फूड पॉइजनिंग, उल्टी, पेट दर्द होने का खतरा हो सकता है। मावे में घटिया किस्म का सॉलिड मिल्क मिलाया जाता है,इसमें टेलकम पाउडर,चूना, चॉक और सफेद केमिकल्स जैसी चीजों की मिलावट भी होती है। इससे किडनी और लिवर पर असर पड़ सकता है।
मावा,दूध व घी की ऐसे करें पहचान
घी
-देसी घी में आलू,अरारोट और रिफाइंड तेल मिलाया जाता है। इससे स्वाद बदल जाता है।
-१० एमएल घी में कुछ बूंदें हाइड्रोक्लोरिक एसिड की मिलाएं। थोड़ी देर बाद इसे हिलाएं। यदि घी का रंग लाल या गुलाबी हो जाए तो यह मिलावटी है।
-घी में आयोडीन सॉल्यूशन की थोड़ी सी मात्रा डालें। रंग नीला हो जाएगा। नीला रंग घी में स्टार्च की मात्रा साबित करेगा। यानी आलू की मिलावट की गई है।
दूध
-दूध में डिटर्जेंट, पानी,सिंथेटिक दूध मिलाते है। डिटर्जेंट और सिंथेटिक दूध सेहत के लिए घातक हैं।
-आधा कप दूध में उतना ही पानी मिलाएं। झाग निकले तो समझ लें कि डिटर्जेंट है।
-सिंथेटिक दूध का स्वाद अच्छा नहीं होता। दूध उंगलियों के बीच रगड़े । साबुन जैसा लगे तो सिंथेटिक दूध हो सकता है।
-दूध की थोड़ी मात्रा किसी सतह पर डालें यदि दूध लकीर बनाते हुए फैले तो समझ जाएं,सिंथेटिक दूध हो सकता है।
मावा
-मावे में अक्सर सिंथेटिक दूध,मैदा,वनस्पति घी,आलू और अरारोट की मिलावट की जाती है।
-मावे पर फिल्टर आयोडीन की दो-तीन बूंदें डालें। यदि मावा काला पड़ जाए तो समझ लें कि मिलावटी है।
-मावा चखने पर थोड़ा कड़वा और रवेदार महसूस हो तो वनस्पति घी की मिलावट है। नकली मावा आसानी से पानी में नहीं घुलता।
-मावे को उंगलियों से मसलकर देखें ,ओरिजिनल होने पर घी छोड़ता है। चखकर देखने पर असली मावा का स्वाद अच्छा लगता है, यदि दानेदार है तो मिलावटी हो सकता है।
कैसे पता करें कि मिठाई मिलावटी है या शुद्ध
१- मिठाई में कलर की मिलावट खूब की जाती है,इसलिए रंग बिरंगी मिठाई खरीदने से बचें। कलर वाली मिठाई को हाथ में लेकर चेक करें। अगर हाथ में रंग नहीं लग रहा तो रंग की मिलावट नहीं है।
२-अगर खोया बहुत दानेदार है तो समझो इसमें किसी तरह की मिलावट की गई है। शुद्ध खोया एकदम चिकना होता है।
३-मिठाई पर लगे चांदी के वर्क में मिलावट की जाती है। आप वर्क को जलाकर चेक कर ले,असली वर्क जलने पर छोटी गोली नुमा बन जाएगा और नकली वर्क ग्रे कलर का जला हुआ कागज जैसा लगेगा।
४-मिठाई खरीदने से पहले चख लें,इससे बासी और ताजी का पता चला जाएगा। अगर मिठाई थोड़ी कड़ी और सूखी है तो पुरानी हो सकती है।
५-अगर केसर वाली मिठाई खरीद रहे हैं तो उसे पानी में डालकर चेक कर लें,अगर रंग निकल रहा है तो समझो केसर नहीं कलर मिलाया है। अगर रंग नहीं निकल रहा तो समझो असली केसर है।
मुख्यत: शहर के प्रभावी दुकानदार इस मुहिम से बच कैसे जाते है?
गौरतलब है कि लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने सभी जिलों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को आगामी त्यौहारों के मद्देनज़र मिलावटी खाद्य सामग्री की संभावित बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रदेशभर में सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इन दिनों खाद्य विभाग द्वारा लगातार मिठाई एवं नमकीन विक्रेताओं की संयुक्त जांच की जा रही है। हर वर्ष की तरह मिठाई एवं नमकीन निर्माण स्थान का निरीक्षण कर नमूने लिए जाते है। फिर हर बार की तरह उन्हें जांच के लिए भोपाल प्रयोगशाला को भेज दिया जाता है,और कुछ एक पर दिखावे हेतु प्रकरण भी पंजीबद्ध कर लिया जाता है। अधिकतर देखा गया है कि मुख्यत: शहर के प्रभावी मिठाई एवं नमकीन,दूध डेयरी और बेकरी वाले इस मुहिम से साफ -साफ बच जाते है। सिर्फ छोटे-मोटे दुकानदारों की जांच करके,विभाग अपने कार्य से इतिश्री कर लेते है क्या ? महत्वपूर्ण बात, इन प्रकरणों में आगे क्या कार्यवाही की गई...? यह तो सिर्फ खाद्य निरीक्षक को ही शायद पता रहता है। जबकि होना यह चाहिए कि उन्होंने अभियान के दौरान किन-किन के खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध किये है,इसकी सम्पूर्ण सूची नाम सहित अपनी खबरों में खुलासा कर मीडिया जगत को प्रेषित करना चाहिए। फिर आगे इन पर क्या कार्यवाही हुई...? इसकी जानकारी भी अपनी खबरों के माध्यम से मीडिया जगत को प्रेषित करना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। मजेदार बात तो यह है सारा अमानक खाद्य पदार्थ खप जाता है और जांच रिपोर्ट कई महीनों बाद भोपाल से आती है। जिसकी जानकारी खाद्य विभाग को और दुकानदार को ही रहती है। त्योहार के दिनों में मुहिम के दौरान स्वचालित प्रयोगशाला का उपयोग क्यो नही किया जाता है.? प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की बेहद आवश्यकता है। आपके आसपास कहीं मिलावट हो रही हो,तो जिला प्रतिनिधि संजय जैन के इस नंबर 942510-1357 पर सूचना दें।
सजा का प्रावधान है
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत अमानक स्तर का मावा पाए जाने या उसमें तेल-शकर का उपयोग किए जाने पर संबंधित कारोबारी पर जुर्माने का प्रावधान है। अगर मावा में यूरिया व ग्लूकोज का मिश्रण किया गया है,तो कारोबारी के खिलाफ एक से सात साल की कैद व एक से 10 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
पोर्टल पर करें शिकायत
जनता से अनुरोध है कि वे दुकानदार से बिल अवश्य लेवे। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम संबंधी विविध कार्यों को समग्र पोर्टल पर लाने के मकसद से खाद्य सुरक्षा एमआईएस पोर्टल- पोषन-पीओएसएचएएन है। इस पोर्टल पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006, विनियम 2011 के नियमों का खाद्य कारोबारी द्वारा पालन नहीं करने व खाद्य पदार्थों में मिलावट या अनियमितता संबंधी शिकायत लोगों द्वारा गोपनीय तरीके से दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
वेलसिंह मोरी-खाद्य सुरक्षा अधिकारी, झाबुआ
सेवन से बचें,हो सकते हैं बीमार
दूषित और मिलावटी मिठाई या खाद्य सामग्री का सेवन करने से उल्टी, दस्त, हैजा, पेट दर्द, गले में इंफेक्शन हो सकता है। मिठाई या खाद्य सामग्री खरीदने में सावधानी बरतें। खुली हुई मिठाई न लें। मिठाई के सेवन के बाद तबीयत खराब होने पर तुरंत ही विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएं।
डॉ.एम किराड़- जिला अस्पताल, झाबुआ

