रेत घाट नीलामी की नीति में परिवर्तन- नागपुर हाई कोर्ट ने याचिका का किया निपटारा........
पर्यावरण की मंजूरी के बिना नहीं होता था उत्खनन,अब ठेकेदार कम्पनी को लेना है मंजूरी.......
झाबुआ/नागपुर। संजय जैन-सह संपादक। पर्यावरण संरक्षण कानून-1986 के अनुसार पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार राज्य सरकार द्वारा रेत घाट नीलामी की नीति में परिवर्तन किया गया। इसे चुनौती देते हुए नीलामी में हिस्सा लेने की इच्छुक कुछ कंपनियों और लोगों की ओर से वर्ष 2022 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। अलग-अलग याचिकाओं पर हाई कोर्ट की ओर से एक साथ सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने बताया कि 8 अप्रैल 2025 को राज्य सरकार ने नई रेत नीति स्वीकार की है जिससे अब इस याचिका में उठाए गए मुद्दों का कोई महत्व नहीं बचा है। याचिका का मूल उद्देश्य ही खत्म हो गया है। इसके बाद हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
पर्यावरण की मंजूरी के बिना नहीं होता था उत्खनन.....
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों का मानना था कि 3 सितंबर 2019 की रेत घाट नीति के अनुसार जहां से रेत का उत्खनन निर्धारित किया जाता था,उस परिसर पर उत्खनन से पड़ने वाले पर्यावरणीय परिणामों का सर्वे किया जाता था। यहां तक कि जब तक पर्यावरण मंत्रालय की ओर से पहले मंजूरी नहीं दी जाती है तब तक उत्खनन नहीं होता था।
उस समय की नीति के अनुसार रेत घाट के उत्खनन के लिए जो भी अधिकारी पर्यावरण विभाग के संबंधित अधिकारी के समक्ष प्रस्ताव रखता था,उसे ही प्रकल्प प्रस्तावक मानकर अधिकारी के नाम पर पर्यावरण की मंजूरी प्रदान की जाती थी,किंतु अब पर्यावरण मंजूरी लेने की जिम्मेदारी कम्पनियों पर थोप दी गई है।
अब ठेकेदार कम्पनी को लेना है मंजूरी.......
याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों का कहना था कि 28 जनवरी 2022 को रेत घाट नीलामी नीति घोषित की गई थी। इसके अनुसार पर्यावरण की मंजूरी के बिना ही नीलामी प्रक्रिया करने तथा नीलामी में रेत घाट लेने वाले ठेकेदार को पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी के लिए आवेदन करने की शर्त रखी गई है। पर्यावरण मंत्रालय के 15 जनवरी 2016 के नोटिफिकेशन के अनुसार प्रकल्प प्रस्तावक को पर्यावरण की मंजूरी लेना था।
लीज धारकों को प्रकल्प प्रस्तावक नहीं माना जा सकता है। ऐसे में यदि इस आधार पर पर्यावरण की मंजूरी नकार दी गई तो कई तरह की परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। विशेषत याचिका लंबित रहने के कारण घाटों की नीलामी भी रोक दी गई थी, जिसका खुलासा राज्य सरकार की ओर से ही किया गया था। अब फिर से राज्य सरकार की ओर से रेत घाट के लिए नई नीति लाई गई है,जिससे याचिका का निपटारा कर दिया गया।

