तेज रफ्तार छीन रही जिंदगी-हर वर्ष 100 लोगों की हो रही मौत, वहीं लगभग 500  से ज्यादा लोग हो रहे घायल

झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक। जिले में सड़क हादसों की संख्या बढ़ रही है। अधिकतर हादसों की वजह तेज रतार और हेलमेट न पहनना ही रहा है। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन भी कड़ा निर्णय ले। लोगों की जिंदगी बचाने के लिए सख्त नियम लेकर आए। इंदौर और भोपाल में बीते दिन प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत हेलमेट नहीं,पेट्रोल नहीं का आदेश जारी किया है। इसका उल्लंघन करने वालों को एक साल तक की जेल या 5000 रुपए का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यह आदेश एक अगस्त से लागू हो गया है। रविवार को लोगों के हेलमेट के प्रति जागरूकता को लेकर शहर के पेट्रोल पंपों पर जमीनी हकीकत जानी तो पाया कि 10 में से एक इंसान हेलमेट में नहीं दिखाई दिया।

ट्रैफिक नियमों की अनदेखी भी कारण

जिले में अधिकतर वाहन चालक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। यातायात नियमों की अनदेखी के चलते लोगों की जानें जा रही है। सड़क पर वाहन चालक बेधड़क यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए देखे जा सकते हैं। अधिकतर कार चालक सीट बेल्ट का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। वहीं बाइक चालकों की बात करें तो वे सिर पर हेलमेट पहनने से परहेज करते हैं। परिणाम या तो वे हादसे में जान गंवा रहे हैं या फिर घायल हो रहे हैं। जबकि अगर वाहन चालक यातायात नियम का पालन करें तो सड़क हादसे में काफी कमी आ जाएगी।

विपरीत दिशा के साथ अंधा मोड़ भी वजह

वाहन चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने के प्रमुख कारणों में जिले की सड़कों की गुणवत्ताहीन व जर्जर होने के अलावा अंधे मोड़ों में संकेतक के नहीं होना भी है। जिले में साल में कई बार ऐसी स्थिति बनती है जब अधिकांश सड़कों की हालत बहुत ही खराब होती है। सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढ़े भी हैं। बाइक चालक इन गड्ढ़ों व उबड़-खाबड़ सड़कों में गिरकर दुर्घटना के शिकार होते हैं। शहर की सड़क हो या फिर हाइवे की,वाहन चालकों की रपतार कहीं भी कम नहीं हो रही है। जबकि मार्ग पर कहीं 30,कहीं 40 तो कहीं 50 की गति बोर्ड पर लिखी हुई है। जिसका पालन नहीं हो रहा है।

पूरी जिंदगी जूझ रहे,बावजूद भी लोग सबक नहीं ले रहे हैं

जिले में सरकारी आंकड़ों की मानें तो हर साल लगभग 100 मौत हो रही है। वहीं लगभग 500 लोग घायल हो रहे हैं। तमाम जागरुकता अभियान के बावजूद भी लोग यातायात नियम का पालन करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। ऐसे में जिले में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या पर लगाम नहीं लग पा रहा है। यातायात विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में हर माह 5 से10 लोगों की सड़क दुर्घटना में जान जा रही है। सड़क हादसे में अगर कोई मौत से बच भी गया तो फिर उसके हाथ-पैर या फिर शरीर का कोई अन्य अंग टूट रहा है। कई लोग इलाज के बाद ठीक हो जा रहे हैं और कई लोग पूरी जिंदगी जूझ रहे हैं। बड़ी बात यह है कि जो इलाज के बाद ठीक भी हो गए तो उन्हें हादसे की वजह से कोई न कोई परेशानी जरूर बनी हुई है। इसके बावजूद भी लोग सबक नहीं ले रहे हैं।

हेलमेट हमारा सुरक्षा कवच

यातायात नियम का पालन करना हम सबकी जिम्मेदारी है। हेलमेट हमारा सुरक्षा कवच है। इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर लोग नियमों का पालन नहीं करेंगे तो नो हेलमेट नो पेट्रोल का आदेश भी जारी किया जा सकता है। भास्कर गचाले- एसडीएम, झाबुआ

नहीं मानेंगे तो सख्त नियम लागू किया जाएगा

अगर पुलिस आपकी जान की चिंता करके हेमलेट के लिए टोकती है तो उसको सकारात्मक दृष्टि से लें। हेलमेट हमारी जान बचाने में बहुत मददगार है। सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने पुलिस लगातार जागरुकता अभियान चला रही है। चालानी कार्यवाही भी की जा रही है। लोगों को भी समझना होगा कि उनकी जिंदगी कितनी अनमोल है। अगर लोग नहीं मानेंगे तो सख्त नियम भी लागू किया जाएगा। 

प्रतिपाल सिंह महोबिया-एडिशनल एसपी,झाबुआ