अब प्रदेश के कलेक्टरों की धड़कनें तेज - सुपर बॉस की गलती कैसे बताएं? -ईओडब्ल्यू डीजी उपेंद्र जैन की फुर्ती ने संकट में तो डाल दिया -कोई पॉवरफुल सीट दिलवा दे -नोटिस पर नोटिस - कही जल जीवन मिशन का नाम बदलकर,जल्दी-जल्दी मनी मिशन तो नही बन गया? - कलेक्टर चलीं,तो सब चले
 

ईओडब्ल्यू डीजी उपेंद्र जैन की फुर्ती ने संकट में तो डाल दिया

झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। मध्य प्रदेश में ईओडब्ल्यू के डीजी उपेंद्र जैन का अमला कितनी फुर्ती से काम कर रहा है यह समझना हो तो पूर्व मंत्री संजय पाठक से बेहतर कौन बता सकता है? सहारा समूह जिस जमीन की बिक्री के मामले में उलझा है,उसमें सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय के भाई जेबी रॉय,बेटे सीमांतो रॉय और ओपी श्रीवास्तव समेत अन्य पर केस दर्ज है। पूर्व मंत्री संजय पाठक की भी इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका है,यह बात कांग्रेस-भाजपा के सभी नेता जानते भी हैं।

शिवराज सरकार के वक्त भाजपा में शामिल हुए

विधायक संजय पाठक ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि मोहन यादव सरकार में उन्हें गिड़गिड़ाना तक पड़ेगा। पाठक को गुरूर था कि उनका भोपाल से दिल्ली तक रसूख है ,तो फिर आर्थिक अपराध शाखा प्रकरण दर्ज करने में तत्परता तो क्या दिखाएगी....? उन्हें भरोसा था कि जब तक शाखा दिल्ली में उनके राजनीतिक संपर्कों से खरी-पक्की नही कर लेंगी,तब तक तो एफआईआर नहीं होगी। गौरतलब है कि आर्थिक अपराध शाखा के पुलिस महानिदेशक उपेंद्र जैन ने उन्हें दिल्ली में जोड़तोड़ करने जितना वक्त भी नहीं दिया। फिर पाठक की तो उम्मीदों पर ही पानी फिर ही गया,साथ ही सहारा ग्रुप पर एफआईआर से सीएम हाउस को भी खुश कर दिया। यह तो शुरुआत है,आगे-पीछे विधायक संजय पाठक की मुसीबत और भी बढ़ सकती है।

अब प्रदेश के कलेक्टरों की धड़कनें तेज-अपने ही सुपर बॉस की गलती कैसे बताएं?

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के एक निर्देश पर प्रदेश के कलेक्टरों की धड़कनें अब तेज हो गई हैं। कोर्ट ने जबलपुर निवासी दीपांकर सिंह की याचिका पर कलेक्टरों को नोटिस जारी करते हुए स्टेटस रिपोर्ट तलब की है,जिसे देने में कलेक्टरों के हाथ पैर कांप रहे हैं। जनहित याचिका में दावा किया गया है कि कुपोषण में देश में मप्र दूसरे स्थान पर है। पोषण की कमी से बच्चे ठिगने और दुर्बल हो रहे हैं। बच्चों और महिलाओं के लिए जो पोषण आहार भेजा जाता है,उसके वितरण और ट्रांसपोर्ट में भी बड़ी गड़बड़ियां हो रही हैं। कैग  की रिपोर्ट में बताया गया कि पोषण आहार के नाम पर साल 2025 में 858 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है,लेकिन जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस पर हाईकोर्ट ने सभी कलेक्टर से कुपोषण की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। अब प्रदेश के कलेक्टर अपने पूर्ववर्तियों की कारस्तानियों पर कैसे पर्दा डाल सकेंगे? पहले जो कलेक्टर रहे वो,अब ऊंचे पदों पर हैं,अपने इन बॉस के संबंध में ये कलेक्टर क्या जांच करने का साहस दिखाएंगे? कुपोषण दूर करने के नाम पर सरकार हजारों करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है,पर प्रदेश को इससे मुक्ति नहीं मिली है।

कोई पॉवरफुल सीट दिलवा दे

भोपाल नगर निगम की अपर आयुक्त निधि सिंह को  राज्य सरकार ने हटा दिया है। अब उन्हें ग्वालियर में ज्वाइंट कमिश्नर के पद पर तैनात किया गया है। इस तबादले के बाद उनकी नियुक्ति का कारण बीएमसी में उनके खिलाफ पारित निंदा प्रस्ताव को माना जा रहा है। भोपाल नगर निगम में पदस्थ एडिशनल कमिश्नर तीन साल पहले ही शासकीय सेवा में आई हैं। यहां पदस्थ रहते उनकी कई तरह की शिकायतें सीएम हाउस तक पहुंची,तो जाहिर है कार्रवाई तो होना ही थी। अब उनके पति यह जुगाड़ और पता लगा रहे हैं कि भोपाल में कोई उनको ऐसा शख्स मिल जाए,जो ले-देकर उनकी पत्नी को फिर से किसी पॉवरफुल कुर्सी पर स्थापित करा दे।

नोटिस पर नोटिस

शुजालपुर में पदस्थ एसडीएम पिछले कई दिनों से कॉलोनाइजरों पर नोटिस जारी करने के बाद से चर्चा में हैं। उन्होंने अब तक 30 कॉलोनाइजरों को नोटिस दिए हैं,जिनमें से दो पर एफआईआर भी हो चुकी है,बाकी 28 पर तो सिर्फ  हल्की कार्रवाई कर जांच के आदेश की औपचारिकता पूरी कर ली गयी है।

कही जल जीवन मिशन का नाम बदलकर, जल्दी- जल्दी मनी मिशन तो नही बन गया?

विधानसभा के उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने जल जीवन मिशन को लेकर सरकार को जमकर घेरा है। कटारे ने कहा कि प्रदेश के गांवों में हर घर जल पहुंचाने के लिए चलाए गए जल जीवन मिशन में राजेनता, प्रशासनिक एवं विभागीय अधिकारियों के गठजोड़ का शिकार हो गया है। इसमें तकरीबन 10 हजार करोड़ रुपए का सुनियोजित भ्रष्टाचार हुआ है। भ्रष्टाचार के कारण जल जीवन मिशन का नाम बदलकर जल्दी-जल्दी मनी मिशन बना दिया गया है। इस घोटाले की सीबीआई जांच की जाए,ताकि रेट रिवाइज करने वाले अफसरों के साथ विभागों के प्रमुख सचिव,मंत्री और उनके स्टाफ  पर मामला दर्ज किया जा सके।

कलेक्टर चलीं,तो सब चले

आदिवासी बाहुल्य जिले डिंडोरी की कलेक्टर नेहा मारव्या ने गांव वालों से मिलने और उनकी समस्या को सुनने के लिए तकरीबन 2 किलोमीटर का रास्ता पैदल चलकर तय किया। जब कलेक्टर पैदल चल पड़ीं तो बाकी अमले को भी इनके साथ इतना चलना ही पड़ा। कलेक्टर ऊबड़ खाबड़ और पथरीले रास्ते को पार करते हुए गांव वालों के पास पहुंची। वहा उन्होंने टांडाटोला गांव में चौपाल लगाकर न केवल उनकी समस्याएं सुनी बल्कि समस्याओं का समाधान करने के निर्देश भी दिए।