कलेक्टर की कार को ठोकने वाले डंपर मालिक पर कही बदले की कार्यवाही तो नहीं कर रहा जिला प्रशासन? डम्पर मालिक की वैध-अवैध संपति की जांच कर, उसे सील करने की कार्यवाही करना कहा तक उचित है? जब सजेली फाटक पर भीषण हादसे में 9 लोगों की और शहर के दिलीप गेट पर एक महिला मौत हुई थी, तब प्रशासन कहा था?

 झाबुआ।संजय जैन-सह संपादक। जिला मुख्यालय पर एक दुर्घटना सोमवार सुबह करीब 10 बजे हुई थी, जिसमे कलेक्टर नेहा मीना अपने दफ्तर में जाने के लिए अपने वाहन में बैठकर बंगले से बाहर निकली ही थी कि बीच रोड पर कलेक्टर निवास के बाहर एक तेज रफ्तार डंपर ने गाड़ी टक्कर मार दी थी। तत्काल डंपर चालक के विरुद्ध लापरवाही पूर्वक वाहन चलाने की धाराओं में मामला दर्ज  भी कर लिया गया।

बड़े रेत माफिया का था डम्पर

आपको बता दे कि जिस डंपर ने टक्कर मारी थी ,वह रानापुर के शांतिलाल बसेर का था। जानकारी अनुसार वह एक सबसे बड़ा रेत माफिया है और कुछ ही वर्षों में वो एक ट्रक के मालिक से अनगिनत वाहनों और अवैध वेध संपतियों का मालिक भी बन गया  है,जिसकी चर्चा पृथक से आने वाले दिनों समाचार के माध्यम से हम करेंगे। कलेक्टर के वाहन को टक्कर लगते ही पूरा प्रशासन तत्काल हरकत में आ गया और कानूनी कार्यवाही भी अपनी जगह कर रहे है,साथ ही ED ओर CBI की तर्ज पर उसकी वैध-अवैध संपति की जांच प्रारंभ कर उसके ठिकानो को सील लगाने का कार्य भी कर लिया।

ताजा पहला मामला-सजेली रेलवे फाटक के पास का

जबकि 2025 के जून माह में मंगलवार देर रात भीषण हादसा हो गया था। झाबुआ के मेघनगर थाना क्षेत्र के सजेली रेलवे फाटक के पास तेज रफ्तार ट्रक वैन के ऊपर पलट गया था।हादसे में शादी से लौट रहे दो परिवारों के 9 लोगों की मौत हो गई थी और 2 लोग गंभीर रुप से घायल हो गए थे।मृतकों में 4 बच्चे, 3 महिलाएं और दो पुरुष शामिल थे। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरु किया था। टक्कर इतनी भीषण थी कि वेन पूरी तरह चकनाचूर हो गई थी।सभी मृतक शिवगढ़ महुड़ा तहसील मेघनगर जिला झाबुआ के बताए गए थे। घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे थे, वहीं ट्रक चालक मौके से फरार हो गया था।

दूसरा मामला-शहर के दिलीप गेट का

अभी तकरीबन दस दिन पहले शहर के दिलीप गेट पर शाम को खाने के रोज की तरह कुछ महिलाएं टहलने निकली थी,तब अंध गति से आ रही एक कार ने एक महिला को जोर से टक्कर मार कर मौके से फरार हो गया था। उक्त महिला 4 दिन तक दाहोद में भर्ती रही, अंततः उसकी मौत हो गयी। गौरतलब है कि घटना स्थल पर वाहन की नंबर प्लेट भी गिर गयी थी। जबकि प्राप्त  जानकारी अनुसार कलेक्टर वाहन की दुर्घटना वाले दिन यानी सोमवार तक भी वाहन और वाहन मालिक तक पहुचने प्रशासन में असफल रहा है। कलेक्टर वाहन दुर्घटना ने मात्र टक्कर लगी थी, जिसमे किसी को भी जान माल का कोई भी नुकसान नही हुआ था । उल्लेखनीय है कि डम्पर मालिक के खिलाफ कानूनी कार्यवाही तो अपनी जगह हो रही वह तो ठीक है, लेकिन  ED ओर CBI की तर्ज पर उसकी वैध-अवैध संपति की जांच प्रारंभ कर उसके ठिकानो को सील लगाने का कार्य करना कहा तक उचित है?

क्या मामला रफा दफा कर दिया गया?

उल्लेखनिय है कि सिर्फ मुआवजा देकर प्रशासन पीड़ित परिवारों को भूल गया है। प्रदेश सरकार की मंत्री ओर अन्य पक्ष-विपक्ष के नेता जरूर मृतक परिवार को ढांढस बंधाने गए थे।जबकि न तो प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा परिवारों को मिलने नहीं गया और ना ही उक्त ट्रक चालक की लापरवाही से भयानक हादसा हुआ था उसके मालिक के खिलाफ कोई भी कार्यवाही शायद ही की गयी। कलेक्टर के वाहन को ठोकने पर  क्या पूरा प्रशासन बदले की भावना से कार्यवाही करने पर उतारू हो गया है...? जबकि 9 लोगो की मौत पर प्रशासन खामोश रहा था। मृतक गरीब आदिवासी परिवारों के थे,इसलिए मात्र मुआवजा देकर, शायद मामला रफा दफा कर दिया गया.? 

सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन की नाक के नीचे तो नही चल रहा, रेत का अवैध कारोबार?

अभी 5 दिन पहले पेटलावद में दो  रेत के अवैध डम्पर भरकर आए थे। गौरतलब है कि इसकी सूचना स्थानीय पत्रकारों ने एसडीएम ,तहसीलदार, सहित थाना प्रभारी को फोन करके संज्ञान में भी ला दिया था। इसके बावजूद भी तुरन्त कोई कार्यवाही नही हुई थी,इसका क्या मतलब है? यह हमे बताने की शायद ही जरूरत है क्योंकि यह जो पब्लिक है कि वह सब जानती है किसी ने कोई कार्यवाही नहीं की तो पत्रकारों ने इस बात के समाचार भी प्रकाशित किये थे। सूचना के बाद भी प्रशासन की इस तरह की कार्यशैली को देखते हुए, प्रश्न तो खड़ा ही होता है कि कि क्या जिला प्रशासन की नाक के नीचे  रेत का अवैध कारोबार  तो नही चल रहा है?