*झाबुआ।संजय जैन-ब्यूरो।*श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक श्री संघ के परम सौभाग्य से सोधर्म वृहत्तपागच्छापति आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय हेमेंद्र सूरीश्वर मसा. की समुदायवर्तिनी साध्वी कल्पदर्शिता श्रीजी स्थानीय राजेंद्र जैन पौषध शाला भवन में कल प्रवचन देते हुए साध्वी श्री ने कहा कि उत्तराध्ययन सूत्र के तीसरे अध्ययन में जीवन जीने की कला के बारे मे वर्णन किया गया है। वीर प्रभु ने हमको  प्रतिक्रमण करने का आवश्यक बताया है। अहिंसा का अर्थ हमने सिर्फ यह समझा है कि जीओ और जीने दो  केवल जीवों की हिंसा करना ही हिंसा नहीं है, बल्कि किसी का दिल दुखाना भी हिंसा है। यदि किसी ने आपका  बुरा किया हो तो उसे भूल जाओ,यही सच्ची क्षमापना है।

अमृत क्रिया उत्कृष्ट अनुष्ठान

कोई भी स्थिति उत्पन्न हो उसको हम तत्काल भूल जाए ,तो समझ लेना चाहिएकि सामाजिक जीवन में भले ही आपसी मतभेद  हो, किंतु आपस में एक दूसरे से संवाद करना नहीं छोड़ना है।क्षमा मांगना सरल है ,किन्तु अहम आड़े आ जाता हैं और माफी नहीं मांगने देता है।अमृत क्रिया उत्कृष्ट अनुष्ठान है जो की पांच प्रकार के अनुष्ठान में श्रेष्ठ है ।

8 दिन में 300 से अधिक आयंबिल तप

पूज्य साध्वी श्री की पावन प्रेरणा से तपस्या के दौर में प्रतिदिन 35 से 40 आयंबिल की तपस्या हो रही है।चातुर्मास प्रारंभ हुए 8 दिनों में 300 से अधिक तपस्वी ने आयंबिल तप किए। सम्पूर्ण श्रावण माह आयंबिल करवाने का लाभ धर्मचंद, ज्ञानचंद मेहता परिवार द्वारा लिया जा रहा हैं।साथ ही उपवास, एकाशना ,निवि के भी पच्चखान कई तपस्वियों द्वारा लिए जा रहे हैं।

8 उपवास के पच्चखान लिए

चातुर्मास के अंतर्गत आज 8 उपवास के पच्चखान तपस्वी पंकज कोठारी ने साध्वी जी से ग्रहण किए। 

यह थे उपस्थित

धर्मसभा में श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता श्रावक अशोक कटारिया, मनोहरलाल छाजेड़ ,कमलेश भंडारी ,राजेश मेहता, कमलेश कोठारी ,दीपक मुथा , प्रतीक मुथा, अंतिम जैन, सुभाष कोठारी ,अशोक राठौड़ ,मनोज संघवी , महेश कोठारी,  इंदरमल संघवी, उल्लास जैन,हेमेंद्र संघवी ,हेमेंद्र बाबेल, अनिल संघवी , रिंकू रूनवाल, सार्थक मेहता, अनिल राठौड़ आदि उपस्थित थे।