आदेशो का अपमान ही करना जिसकी फितरत हो ,तो ऐसी सीएमओ के खिलाफ अब तक कार्यवाही क्यो नही हुई.....?
किसका सरंक्षण मिल रहा सीएमओ को...? या कही नेताओ का दबाव तो नहीं.....?
झाबुआ/पेटलावद। संजय जैन-सह संपादक। झाबुआ जिले की मूल निवासी सीएमओ आशा जितेंद्र भंडारी झाबुआ जिले की बेटी है। उनको अजजा वर्ग का होने से आरक्षण का भी लाभ मिला ही होगा, जिससे उनका सीएमओ पद के लिए चयन हुआ होगा। यह अपने गृह जिले में सारी मर्यादा को भूलकर लगातार जिले को अपमानित करने का कार्य कर रही है। गौरतलब है कि शासकीय सेवा में आने वाले हर कर्मचारी और अधिकारी की एक मर्यादा होती है।जिस तरह उच्च पद पर पदासीन प्रधान मंत्री से लेकर मंत्री- विधायक की तरह शपथ लेते है कि में................. सच्ची.....रखूंगा/रखूंगी। इसके अनुसार सभी अपने कर्तव्य का पालन करते है। उसी तरह एक शासकीय सेवक भी संविधान के नियमों से बंधा हुआ है और सेवा में आने के बाद उन्हें भी इसी अनुसार अपना कार्य करना होता है। आशा मेडा,अब आशा जितेन्द्र भंडारी जब से नगरीय प्रशासन की अधिकारी बनी है,तब से लेकर आज तक इनकी के हरकतों से नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग की छबि धूमिल ही हुई है।
छवि धूमिल कुछ इस तरह से की गयी
(1) नगर परिषद बड़नगर से इनका स्थानांतरण सीएमओ से उच्च पद डिप्टी कमिश्नर के पद पर नगर निगम उज्जैन हुआ था। लेकिन इनके द्वारा शासन के आदेश का पालन न कर उसका अपमान करते शासन उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया। जब शासन-प्रशासन ने उच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखा ,तो इनका स्थगन आदेश भी खारिज हो गया था। आगे यह उनकी हठधर्मिता ही कह सकते है क्योंकि उन्होंने उज्जैन नगर निगम में जोइननिग दी ही नही। शासन ने कार्य सुविधा की दृष्टि से AE पलव्वी पाल को सीएमओ का प्रभार दे दिया। अपनी शैली नुसार सीएमओ ने अपना स्थगन आदेश खारिज होने पर, पुनः उच्च न्यायालय की डबल बेंच में अपील दायर की।जहा शासन ने अपना पक्ष मजबूत रखा तब इन मजबूरन इनको अपनी अपील वापस लेना पड़ी थी। इनकी ऐसी हरकत से शासन प्रशासन को काफी परेशान भी होना पड़ा था। तब तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह ने इस मामले में जेडीए सोमनाथ झरिया को सीएमओ के खिलाफ कार्यवाही हेतु अनुशंसा पत्र संभागायुक्त को भेजने के लिए बोला । मजेदार बात तो यह है कि इतना कुछ होने के बाद उन्होंने अपना स्थानांतरण नगर पालिका बदनावर में करवा लिया। इसकी इन हरकतों से शासन की छबि काफी धूमिल हुई और इनके खिलाफ कार्यवाही करने को मजबूर होना पड़ा था, बाद में मामला ठंडे बस्ते में क्यों चला गया यह तो शासन ही जाने...?
(2) बदनावर में जब वे सीएमओ थी, तब किसी पत्रकार ने नगर परिषद की जो सच्चाई थी उसे उजागर किया था ,जो कि उसके अधिकार क्षेत्र में ही आता था। तब सीएमओ को पत्रकार का उनके खिलाफ खबर लिखना नागवार गुजरा और पत्रकार की शिकायत अजजा आयोग भोपाल में कर दी,लेकिन पत्रकार एकता ओर सच्चाई के आगे उनका यह कृत्य नाकामयाब हो गया। इस तरह से पत्रकारिता के साथ-साथ नगरीय प्रशासन विभाग की छबि को धूमिल करने का अक्षम्य कार्य किया।
(3) प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश शासन नगरीय प्रशासन विभाग भोपाल ओर उनके आदेश क्रमांक 3669 दिनांक 25/10/ 19 प्रातः 06 बजे से 09 बजे तक अनिवार्यतः प्रातःकालीन फील्ड में सीएमओ को भ्रमण करना होता है उस आदेश का भी उन्होंने आज तक अपमान ही किया है। जब से वे पेटलावाद पदस्थ हुई है तब से अपने ससुराल राजगढ़ जो कि लगभग 50 किलो मीटर से भी अधिक है वहां से अधिकतर आना-जाना आज भी कर रही है। इन्होंने एक भी दिन प्रातः 06 बजे से 09 बजे तक शहर का भ्रमण नहीं किया ओर आदेश को अनदेखा किया। जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश में स्वच्छता अभियान चला रहे है।
(4) नगर परिषद पेटलावद से इनका स्थानांतरण नगर परिषद पिपलिया मंडी जिला मंदसौर में हुआ था, लेकिन जो अपमान करना ही अपना सम्मान समझती है इनके द्वारा पुनः उच्च न्यायालय की शरण लेते हुए शासन आदेश के खिलाफ आदेश प्राप्त किया ओर फिर स्थानांतरण को निरस्त भी करवाया ओर शासन आदेश के खिलाफ जाकर उसको न्यायालय जाकर अपमानित ही करने का कार्य किया।
(5) नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग भोपाल जो कि शासन का अभिन्न अंग है उसके कुछ नियम ओर नगरीय निकायों के संचालन के लिए अधिनियम भी बने है,उसमें कर्मचारी भर्ती तथा सेवा शर्ते वर्गीकृत नियम भी बने ओर जिस विभाग में यह बतौर अधिकारी नियुक्त हुई उस विभाग में त्रिस्तरीय व्यवस्था है।जिसके अंतर्गत नगर निगम,नगर पालिका,नगर परिषद केवल नगर निगम को छोड़कर नगर पालिका ओर परिषद के लिए एक अधिनियम बना है, जिसको नगर पालिका अधिनियम कहा जाता है जो कि 1961 से लागू भी है।जिसमें आवश्यकता अनुसार समय समय ओर परिवर्तन सरकार करती रहती है। लेकिन नगर पालिका हो या नगर परिषद नगरीय प्रशासन विभाग के नियमों ओर उस के बनाए अधिनियम अनुसार संचालन होता है,उस अधिनियम में कुछ धाराएं ओर नियम भवन निर्माण अनुमति के लिए बने है उसमें से एक धारा 187 बनी है, उसका यदि वर्णन करेंगे तो खबर बहुत बड़ी बन जाएगी।खैर, कहने का मतलब इन्होंने उस धारा के अंतर्गत बने नियमों अनुसार समय पर कार्यवाही नहीं की। हमारा मानना है कि इन्होंने नगर पालिका अधिनियम का शायद निजी स्वार्थ के कारण जान बूझकर अपमान किया। उन्होंने अनजान बनकर थांदला रोड पर 8 माह से बन रहे नरसिंहदास बैरागी पिता प्रकाशचंद्र बैरागी के मल्टी फ्लैक्स सह शॉपिंग कांप्लेक्स निर्माण को अनदेखा कर दिया। उस अवैध निर्माण की छत गिरने से एक दर्दनाक हादसा हुआ,जिसमें दो श्रमिक की मृत्यु भी हो गयी तब इनकी आंखे खुली और फिर मात्र दिखावे की कार्यवाही की । हादसे के तत्काल बाद पेटलावद एसडीएम तनुश्री मीणा जो कि एक IAS अधिकारी है ने भी इस निर्माण को अवैध निर्माण माना था।इस हादसे की जांच हेतु कलेक्टर झाबुआ ने एक जांच समिति गठित की। जांच में सीएमओ को दोषी मानकर रिपोर्ट कलेक्टर को प्रस्तुत भी कर गई थी। कलेक्टर ने प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश शासन नगरीय प्रशासन विभाग भोपाल को भेजी, जो अभी तक फाइल में ही बंद है पर क्यो...?यह तो प्रशासन ही जाने।
(6) सीएमओ के खिलाफ पेटलावद में मीडिया द्वारा लगातार समाचार प्रकाशित हो रहे थे । इसके कारण बौखलाहट में सीएमओ आशा जितेन्द्र भंडारी स्वयंं के द्वारा बनाए व्हाट्सएप ग्रुप,जिसमें अधिकारी से लेकर पत्रकारगण जुड़े है। पत्रकारों को धमकाते हुए उन्होंने 7 मई को एक मेसेज ग्रुप में डाला कि "नगर परिषद व शासन के खिलाफ असत्य,झूठी व भ्रामक खबर फैलाकर नागरिकों में असंतोष पैदा करने वालो के खिलाफ नगर परिषद करेगी सख्त कार्यवाही। पुलिस में दर्ज करवायेगी एफ.आई.आर. ।
असत्य,भ्रामक व झूठी खबरें फैलाने वालों की अब खैर नहीं, जल्द होगी कार्यवाही - सीएमओ पेटलावद जिला झाबुआ"
इस तरह धमकी भरा मेसेज डालकर उन्होंने स्वतंत्र पत्रकारिता का और पत्रकारों का भी अपमान किया है।
(7) पेटलावद शहर होलकर स्टेट का अभिन्न अंग था। यहां महारानी लोकमाता अहिल्या बाई होलकर की एक प्रतिमा उनके ही द्वारा बनाए शंकर मंदिर के बगीचे में स्थानीय कुछ लोगों के द्वारा स्थापित की गई है। लोकमाता मां अहिल्या बाई होलकर की 300 वी जन्म जयंती के दिन प्रदेश में तीन दिन तक आयोजन किया गया जिसको पुलिस विभाग से लेकर नगरीय निकायों ओर अन्य विभागों ने भी मनाया ओर भोपाल में स्वयंं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक आयोजन में सम्मिलित हुए थे,लेकिन दुख तो इस बात का रहा कि माँ की पुरानी रियासत में इनकी जन्म जयंती पर कोई भी कार्यक्रम स्थानीय स्तर पर नगर परिषद के द्वारा आयोजित नहीं किया गया। यहाँ तक तो ठीक शंकर मंदिर के बगीचे में स्थापित लोकमाता मां अहिल्या बाई होलकर की स्थापित मूर्ति की साफ सफाई करने और माला भी चढ़ाना उचित नहीं समझा। उल्लेखनीय है कि सीएमओ को जयंती की जानकारी होने के बाद भी माँ की अनदेखी कर उनको उपेक्षित कर अपमान ही किया है।
(8) देश की आन-बान- शान तिरंगा जिसके रंग अलग-अलग संदेश देते है। अभी हाल ही में तिरंगे रंग का दूरउपयोग कर उन्होंने देश के साथ प्रदेश को भी शर्मसार करने का अक्षम्य कार्य कर दिय। सीएमओ ने तिरंगे के रंग को पुराने टायरों ओर वेस्ट मेटेरियल पर गलत तरीके से पुतवा दिया साथ ही सेना के टैंक की आकृति पर रंग भी उलट-पलट पुतवा दिया। उल्लखनीय है कि जिस अधिकारी को अपमान करने की आदत ही हो गई वह कैसे अपनी आदत बदल सकती है...? मजेदार बात तो यह है कि तिरंगा के रंग से पुते,देश की धरोहर सेना के सम्मान, टैंक को कचरे के ढेर के पास ही खड़ा भी कर दिया। राष्ट्रीय ध्वज का यह अपमान तो है।
संसदीय क्षेत्र से तीन मंत्री फिर भी नही हुई कार्यवाही
आखिर मध्यप्रदेश सरकार, नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग और भाजपा के नेता स्थानीय विधायक जो प्रदेश सरकार में मंत्री संसदीय क्षेत्र से और 2 मंत्री भी है,वे क्यो सीएमओ आशा जितेन्द्र भंडारी के द्वारा किए जा रहे लगातार अपमानजनक कार्यो को नजरअंदाज कर रहें है..? नगरीय प्रशासन के साथ ही भाजपा सरकार की इनके कारण धूमिल होती छवि को अनदेखा करती रहेगी...?सूत्रों से प्राप्त जानकारी नुसार भाजपा नेताओ का भी सीएमओ को वरदहस्त प्राप्त है, कही उनके दबाव में तो भाजपा सरकार लापरवाह सीएमओ आशा जितेन्द्र भंडारी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं कर , उनको सरंक्षण तो नही दे रही है...?

