खाद का संकट-अभी कृषि मंत्री शिवराज है या पहले नरेंद्र सिंह तोमर थे,खाद संकट से तो जूझते ही रहे है किसान बुआई का समय नजदीक,लेकिन खाद के लिए रतजगा कर रहे किसान
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। केंद्र में चाहे अभी शिवराज सिंह चौहान कृषि मंत्री है या उनसे पहले नरेंद्र सिंह तोमर इस विभाग के मंत्री थे, मालवा-निमाड़ सहित प्रदेश के किसानों को खाद के संकट से कभी निजात नहीं मिल पाई। बारिश के चलते बिजाई (बुआई) का समय नजदीक आ गया है, लेकिन किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पा रहा है। किसान खाद के लिए लंबी लाइन के साथ रतजगा कर रहे हैं। जैसे पर्व-त्यौहार का आना तय रहता है, उसी तरह खाद संकट भी हर साल किसानों का तनाव और सरकार की परेशानी बढ़ाने वाला हो गया है। किसान इस मारामारी से परेशान हैं, किंतु सरकार का रटारटाया जवाब है कहीं कोई संकट नहीं है।
की जा रही है डीएपी की भारी कालाबाजारी
संयुक्त किसान मोर्चा के रामस्वरूप मंत्री, बबलू जाधव का कहना है कि मालवा निमाड़ अंचल में डीएपी की भारी कालाबाजारी की जा रही है। कृषि विभाग का खाद वितरण पर कोई नियंत्रण नहीं है। ग्रामीण सोसाइटी पर किसानों को खाद नहीं मिल रही है जबकि कालाबाजारी में भरपूर मात्रा में खाद उपलब्ध है । नियमानुसार कंपनी से रेलवे की रेक पर खाद उतरते ही उसको और ऑनलाइन पोर्टल पर चढ़ाया जाना चाहिए तथा इसकी जानकारी कृषि विभाग को दी जाना चाहिए। बाद में उसे कहीं भी भेजे जाने के लिए कृषि विभाग की अनुमति लिया जाना जरूरी है, लेकिन पूरे अंचल में ऐसा कहीं नहीं हो रहा है और विक्रेता अपनी मर्जी से डीएपी का परिवहन कर रहे हैं। इस संकट का मुख्य कारण इस बार सरकार द्वारा डीएपी का कम इम्पोर्ट करना है। जिसकी वजह से किसान परेशान हो रहे हैं।
जांच करेंगे तो सामने आएगी पोलपट्टी
किसान नेताओं ने इंदौर और उज्जैन संभाग के खाद वितरण की निम्न बिंदुओं पर उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है।
-अभी तक कितनी खाद आई है..? किन-किन गोदाम में रखी गई है..? तथा किन-किन व्यापारियों को वितरित की गई है...? इसकी जांच कराएं।
-कृषि विभाग भी खाद वितरण पर निगरानी रखने में असफल रहा है ।
-हरदा की तरह झाबुआ में भी खाद विक्रेताओं के यहां छापे लगाने के साथ ही हर दिन के स्टॉक-बिक्री की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
बॉक्स खबर
संकट खाद का नहीं कांग्रेस संकट में है-सीएम डॉ. मोहन यादव
.प्रदेश में खाद संकट , किसानों की परेशानी को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने जबलपुर में सरकार से ये पूछ लिया था कि क्या सरकार खाद की कालाबाजारी करवाना चाहती है..?
सिंघार के इस आरोप को नकारते हुए सीएम डॉ.मोहन यादव ने कहा था कि खाद का संकट नहीं है,बल्कि कांग्रेस में ही संकट है। कांग्रेस के नेताओं के पास मुद्दों का भी संकट है।
ये कारण है खाद संकट के
हर फसल के समय मांग बढ़ने पर समय पर आपूर्ति ना होना, वितरण में गड़बड़ी और अनियोजित स्टॉक।
-किसानों को रातभर लाइन में लगना पड़ता है, कई जगह थानों से पर्ची लेकर खाद मिलती है, उनकी मेहनत और समय दोनों बर्बाद होते हैं।
-हर साल यह आरोप लगते हैं कि प्रशासन की मिलीभगत से खाद की कालाबाजारी होती है। सरकार इसे नकारती रही है।
-मालवा निमाड़ में भी ग्रामीण सोसाइटियों पर नहीं मिल रहा है खाद।
लगता है डीलर, कंपनी के अधिकारियों की साठगांठ से एक ओर तो डीएपी कालाबाजारी से किसानों को डीएपी खाद के लिए परेशान होना पड़ रहा है, और वही दूसरी ओर डीलर, कंपनी के अधिकारियों से मिलीभगत कर कालाबाजारी कर रहे हैं । नियमानुसार कंपनी से डीएपी आने पर उसे कृषि विभाग की सूचना के बगैर कहीं नहीं भेजा जा सकता है।गत दिनों हरदा जिले में डीलर और कंपनी की मिलीभगत से भारी मात्रा में डीएपी की कालाबाजारी का मामला पकड़ा गया था । जिसमें एक ही फर्म डीलर, हैंडलर, और ट्रांसपोर्टर थी और बगैर कृषि विभाग को जानकारी दिए आसपास के सभी जिलों में डीएपी के कालाबाजारी कर रही थी।

