मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार में एक रिकॉर्ड यह भी.......दर्ज , भ्रष्टाचारी ग्रीनिज बुक में स्कूलो का नाम अंकित कराकर ही मानेंगे
शहडोल जिले में शिक्षा के मंदिर की रंगाई पुताई के अद्भुत घोटाले ओर बिल बनने के दो अलग अलग मामले दोनों पर एक दिन पहले प्राचार्य ने किए हस्ताक्षर
लोकायुक्त EOW ओर CBI से सभी स्कूलों की जांच होनी चाहिए
संजय जैन स्टेट हेड
शहडोल:- जिले में दो अलग अलग स्कूलों में फर्जी बिल के मामले सोशल मीडिया में सुर्खियां बटौर रहे है।
एक मामला
हाई स्कूल सकन्दी का है जिसमें स्कूल भवन की चमकती दीवारों से ज्यादा इसके लिए बनाए हैरत में डालने वाले अनोखे बिल के लिए चर्चा में है। जो जानकारी मिली उसके अनुसार प्रदेश के शहडोल जिले के इस सरकारी हाई स्कूल की दीवारों को मात्र चार लीटर पेंट से रंगने के लिए 168 मजदूर और 65 मिस्त्री लगाए गए यानी कुल 233 लोग इस अद्भुत रंगाई पुताई में जुटे थे। इस भ्रष्टाचार के रंग में रंगने के खेल में चार लीटर पेंट से दीवारें चमकाने का बिल बना 1 लाख 06 हजार नौ सो चौरासी रुपए का। प्राप्त खबरों के अनुसार इस भ्रष्ट करतूत का बिल भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसे देखकर हर कोई हैरान है ।
यह बिल हाई सकन्दी स्कूल तहसील ब्यौहारी के नाम से 05 मई 2025 का बना है। इस बिल पर हाई स्कूल के प्रधान अध्यापक से लेकर इस दीवार को रंगने वाले सुधाकर कंस्ट्रक्शन जो की ग्राम इन्दवार ग्राम पंचायत ओदारी तहसील ब्यौहारी जिला शहडोल में स्थित है ,और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री मैकेनिकल सामग्री गिट्टी रेट मुरूम ईट एवं समस्त भवन निर्माण मटेरियल उपलब्ध कराते हैं। इस पर प्रोपराइटर के हस्ताक्षर भी है,वहीं जिला शिक्षा अधिकारी के हस्ताक्षर से इसका भुगतान हुआ।इस घोटाले की बड़ी बात यह कि स्कूल शिक्षा विभाग के जिला शिक्षा अधिकारी ने इस बिल को पलक झपते मंजूरी भी दे दी ।
दूसरा मामला
एक और हाई स्कूल की रंगाई में जबरजस्त घोटाला!
20 लीटर पेंट से रंगने में 150 मिस्त्री और 275 मजदूर लगे, बिल बना 2 लाख 31 हजार 650 रुपए का, स्कूली शिक्षा अधिकारीयो के साथ ट्रेजरी ऑफिसर भी धांधली में शामिल...?
धांधली के इस दूसरे मामले में शहडोल जिले के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय निपानिया में रंगाई के लिए 20 लीटर पेंट इस्तेमाल किया गया, जिसमें 275 मजदूरों और 150 मिस्त्रियों को लगाना पड़ा, जिसके चलतें इस रंगाई में कुल भुगतान 2,31,650 रुपये पहुंच गया।
अनुरक्षण मद से कराए गए कार्यों का कार्य के पूर्व फोटोग्राफ्स एवं कार्य होने के बाद फोटोग्राफ्स देयक के साथ प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है। जबकि कार्य कराने के पूर्व और कार्य समाप्त के बाद देयक के साथ फोटोग्राफ्स संलग्न नहीं किया गया, ट्रेजरी ऑफिसर द्वारा बिना फोटोग्राफ्स के ही देयक पारित कर भुगतान कर दिया गया है।
यहां सुग्रीव शुक्ला, प्राचार्य हैं इनके हस्ताक्षर भी खबरों में वायरल बिल पर हैं, इस बिल भुगतान पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
उल्लेखनीय हैं कि इन दोनों मामलों में एक ही ठेकेदार सुधाकर कंस्ट्रक्शन का नाम सामने आया है। खास बात तो यह है कि दोनों बिल 5 तारीख पांचवां महीना 2025 में कटे हैं। जिसने इन कार्यों के लिए भुगतान प्राप्त किया है। बिलों पर संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्य और जिला शिक्षा अधिकारी के हस्ताक्षर और सरकारी सील भी लगी हुई है, जो कि इस मामले की गंभीरता को और बढ़ा देती है।
इस बिल पर प्राचार्य निपानिया के हस्ताक्षर 04/04/2025 अंकित की है जबकि सुधाकर कंट्रक्शन ओदारी ने बिल 05/05/2025 को बनाया याने बिल बनाने के एक महीने पहले ही प्राचार्य निपानिया ने उसे सत्यापित कर दिया था।इससे भी कई सवाल खड़े होते है वही ट्रेज़री के अधिकारी ने भी बिना जांच किए बिल का भुगतान कर दिया,इसकी भी जांच होनी चाहिए।
गांव में इतने श्रमिक कारीगर नहीं है
सबसे हैरानी की बात यह है कि जिन गांवों में यह दोनों स्कूल है वहा बिल में जो दर्शाया उतने श्रमिक ओर कारीगर ही नहीं है। आइल पेंट की दर में भी अंतर सकन्दी स्कूल के लिए ऑयल पेंट 196 रुपए प्रति लीटर क्रय किया जबकि निपानिया स्कूल के लिए क्रय आइल पेंट 400 रूपये प्रति लीटर की दर से क्रय किया गया इसकी ओर जो आयल पेंट जिस नाम से है उसकी भी जांच होनी चाहिए।
इनका कहना
जिला शिक्षा अधिकारी फूल सिंह मारपाची ने कहा कि सोशल मीडिया में वायरल बिलो के मामले में हमने जांच शुरू करवा दी है। जांच में दोषी पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विशेष उल्लेख
विदित हो कि मध्य प्रदेश सरकार ने इस बार शिक्षा के लिए आवंटन में 4 फीसदी की बढ़ोतरी की है जो अब कुल बजट में 11.26 फीसदी की बढ़ोतरी है। समृद्ध मध्यप्रदेश में वर्ष 2025-26 में स्कूल शिक्षा के लिए ₹ 36,582 करोड़ का प्रावधान, किया गया हैं वहीं प्रदेश सरकार ने समग्र शिक्षा अभियान के लिए 7134.7 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। 30 नवंबर, 2024 तक खर्च की गई धनराशि से पता चलता है कि राज्य सरकार ने पिछले बजट में प्रारंभिक शिक्षा के लिए 5,341.8 करोड़ रुपये की राशि को स्वीकृति दी थी जिसमें से सिर्फ 2457 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए और 2,262.32 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
इसी के साथ मध्यप्रदेश सरकार का संकल्प हैं शिक्षा से उजियारा। इसी के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा कल ही प्रदेश के कक्षा 12 में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक लाने वाले 94,234 मेधावी विद्यार्थियों के खातों में 25- 25 हजार रुपए लैपटॉप क्रय हेतु 235 करोड़ की प्रोत्साहन राशि का अंतरण किया हैं।
यानी कि सरकार आम जनता के टैक्स को युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए खर्च कर रहीं है परंतु शिक्षा विभाग में बैठे अधिकारी, और स्कूलों के कर्ताधर्ता किस बेहद निचले स्तर तक जाकर भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। ओर इस बढ़ोतरी को कथित तौर पर फर्जी बिलों से निपटाने में लगे है। इस तरह के एक के बाद एक घोर भ्रष्टाचार के फर्जी बिल सामने आने से आम जन को आशंका है कि दूर दराज के पिछड़े जिलों की अनेकों स्कूलों में इसी तरह के भ्रष्टाचार का माहौल होगा।
मध्य प्रदेश में देश में सबसे ज्यादा स्कूलों के मामले में दूसरे पायदान पर
केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई है यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफार्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस रिपोर्ट (यूडीआईएस ई - पीएलयूएस) के अनुसार देश में सबसे अधिक स्कूलों के मामले में मध्य प्रदेश दूसरे पायदान पर है जबकि स्कूलों की संख्या में अव्वल उत्तर प्रदेश में है।
शहडोल जिले की सकन्दी स्कूल ओर निपानिया स्कूल में बिल अनुसार खर्च बताते हुए भारी फर्जीवाड़ा किया ऐसा सोशल मीडिया पर समाचार प्रकाशित हो रहे है।
इन स्कूलों का भौतिक सत्यापन करने ओर जांच के लिए लोकायुक्त अन्वेषण ब्यूरो और CBI से प्रदेश की जितनी भी स्कूलों में आवंटन जारी किया उनके बिल रिकॉर्ड की जांच करवानी चाहिए ताकि जनता के सामने सच्चाई उजागर हो ओर कोई दोषी हो उस ओर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए।

