झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। तन के खड़ा पीपल का पेड़ अपने धार्मिक-औषधीय महत्व के कारण आस्था का केंद्र तो है और यकायक उस पर कुल्हाड़ी चले,आरे से उसका सिर, सीना और हाथ का प्रतीक मोटी टहनियां काट दी जाएं तो शेष बचा हिस्सा तो भीषण दर्द से सूख कर कांटा हो जाना चाहिए।लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है क्योंकि नगर निगम की पेड़ों के प्रति अपनी चिंता और शहर में बेहतर पर्यावरण के प्रति उनका दायित्व जो है।

जड़ों से उखाड़े जाने के बाद भी,सीखें पीपल से हिम्मत नहीं हारना

जिन रहवासियों ने इंदौर सुकलिया में यह हराभरा पीपल कटते हुए देखा था,वे भी हरियाली को नष्ट किए जाने से दुखी तो हुए थे,किंतु उन सब को भी यह जानकर अच्छा लगेगा कि टहनी विहीन पीपल के तने को यहां से जड़ सहित उखाड़ कर जनकार्य समिति के अमले ने करीब एक महीने पहले विधिविधान के साथ सांवेर रोड स्थित बीएसएफ की रेवती रेंज पहाड़ी पर उसे शिफ्ट कर दिया। जड़ से उखाड़ने के दर्द के बाद भी मुस्कुराते हुए कैसे जिया जा सकता है? पीपल का यह तना देख कर आसानी से समझा भी जा सकता है।पेड़ों की शिफ्टिंग भी उन शरणार्थी परिवारों जैसी है,जो मजबूरी में अपना सब कुछ छोड़ कर नई जगह बसने पर मजबूर तो हुए लेकिन हौंसला नहीं खोया और फिर से पनप गए। 

पीपल और बरगद को नष्ट करने पर ब्रह्म हत्या का दोष

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पीपल और बरगद को नष्ट करने पर ब्रह्म हत्या का दोष भी लगता है। ऐसे में जब कोई आवेदक ऐसे किसी पेड़ को हटाने-काटने की अनुमति मांगे त? जनकार्य समिति प्रभारी राजेंद्र राठौर ने सुकलिया स्थित इस पीपल पेड़ का जीवन बचाने पर काम किया। निगम अमले से उसकी टहनियां कटवाने के बाद चार फुट चौड़े तने को जड़ सहित निगम  वाहन में रखवाया और इसे पहाड़ी पर ट्रांसप्लांट करवा दिया था। करीब एक महीने की देखभाल का परिणाम यह रहा कि इसके तने में फूटी कोपल के बाद छोटे-छोटे पत्ते मुस्कान बिखेरने लगे हैं। 

विधिवत आवेदन सहित प्रति पेड़ 12 हजार रु.शुल्क

नगर निगम ने पेड़ काटने की अनुमति देना बंद करने के साथ जब से पेड़ स्थानांतरित करने के आवेदन स्वीकारना शुरु किया है तब से जनकार्य समिति को यह संतोष भी है कि धार्मिक महत्व वाले पेड़ों की हत्या के पाप से भी बच रहे हैं। सुदामा नगर इंदौर क्षेत्र से भी गत दिनों 25 पेड़ शिपफ्ट किए गए थे, ये सभी पेड़ भी रेवतीरेंज में पनप गए हैं। जनकार्य समिति प्रभारी राजेंद्र राठौर का कहना है कि जब नगर निगम शहर को हराभरा बनाने और पर्यावरण संरक्षण में लगा हुआ है तो पेड़ काटने की अनुमति कैसे दे सकते हैं...?हां यदि किसी रहवासी के भूखंड पर निर्माण कार्य में पेड़ बाधक बन रहे हैं तो ऐसे व्यक्ति भूखंड से पेड़ शिफ्टिंग के लिए नगर निगम में विधिवत आवेदन देंवे और प्रति पेड़ 12 हजार रु.शुल्क जमा कराएं। निगम कर्मचारी जाएंगे, विशेषज्ञ की मौजूदगी में पेड़ शिफ्टिंग की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।यदि पेड़ ट्रांसप्लांट आवेदन और शुल्क जमा कराए बिना किसी व्यक्ति द्वारा पेड़ काटे जाते हैं और ऐसी शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित व्यक्ति पर भारी जुर्माने के साथ ही वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी। 
मूले विष्णु: स्थितो नित्यं स्कन्धे केशव एव च। ... यस्याश्रय: पापसहस्त्रहन्ता भवेन्नृणां कामदुघो गुणाढ्य:। 
(अर्थ-पीपल के पेड़ की जड़ में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में भगवान हरि और फल में सभी देवता निवास करते हैं। जो व्यक्ति इसकी पूजा करता है,उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।)*