कही विजयोत्सव मंत्री शाह का तो नही......? -शराब दुकान पर इंदौर विधायक का ताला.... -उन्हें तो दिखी लेकिन इन्हें दिखी ही नहीं सोनम.....
कही विजयोत्सव मंत्री शाह का तो नही......? -पुलिस भी बेलगाम... -शेडो सीएस कहलाना अब दे रहा है दर्द...... -लक्ष्मण सिंह करें तो करे क्या....? -होल्कर साइंस कॉलेज की प्राचार्य को दो सप्ताह की राहत....-मेघालय पुलिस को तो दिखी,लेकिन इंदौर पुलिस को दिखी ही नहीं सोनम.....

कही विजयोत्सव मंत्री शाह का तो नही......?
झाबुआ/इंदौर।
संजय जैन-सह संपादक। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का पचमढ़ी आना तो शायद मंत्री विजय शाह को एक तरह से शहंशाह बनाने वाला साबित हो गया है। बिरसा मुंडा जयंती पर सीएम यादव के साथ मंच साझा करने से ही लग रहा था कि मंत्री को कर्नल सोफिया मामले में दिए बयान मामले को भाजपा अपने दिलो-दिमाग से निकाल चुकी है। बाकी बचा काम पचमढ़ी आए,केंद्रीय गृहमंत्री ने तो कर ही दिया जिससे अब नेता गलत बयानबाजी नहीं कर सकेंगे। एक बार जो गलती हो जाती है उसे दोबारा नहीं करें। विजय शाह समर्थकों के लिये तो अमित शाह का यह संदेश कही एक तरह से विजयोत्सव मनाने का संकेत  तो नही है.....?

शराब दुकान पर इंदौर विधायक का ताला....
इंदौर स्कीम नंबर 71 में शराब दुकान खोले जाने के विरोध में आंदोलन कर रहे क्षेत्र के लोगों का विधायक मालिनी गौड़ ने खुल कर समर्थन किया है। वो समर्थन देने तो पहुंची ही साथ मे दुकान के कर्मचारियों को बाहर निकाल कर ताला भी जड़ दिया। अब यदि दुकान खोली तो डंडा लेकर आऊंगी,यह चेतावनी भी दे डाली।  मालिनी गौड़ के ऐसे उग्र तेवर पहली बार देख रहे क्षेत्र के लोगों ने उनकी जय-जयकार भी कर दी। 

मेघालय पुलिस को तो दिखी,लेकिन इंदौर पुलिस को दिखी ही नहीं सोनम.....
सोनम-राजा कांड में मेघालय पुलिस की कार्रवाई ने उन सब का दिल जीत लिया जो पहले  सिर पर आसमान उठाए हुए थे। अब तो यह प्रश्न उठ रहे हैं कि मेघालय में पति की हत्या करने के बाद सोनम एक पखवाड़े तक यदि इंदौर में रही,तो इंदौर पुलिस को नजर क्यों नहीं आई....? क्यो उसके कानों तक आहट नहीं पहुंची थी...? उल्लखनीय है कि इंदौर के पूर्व पुलिस अधिकारी यह कहने से भी नहीं चूक रहे है कि मेघालय पुलिस ने आलोचना की आंधी का सामना करते हुए वो सारी पड़ताल भी कर डाली,जो इंदौर पुलिस को ही करना थी।

पुलिस भी बेलगाम...
मप्र में गृह मंत्रालय भी सीएम ही संभाल रहे हैं। प्रदेश के पुलिस महकमे की लापरवाही से जुड़ी हर दिन कोई ना कोई ऐसी घटना उजागर हो ही रही है,जिसके जरिये यह महकमा यह साबित करने में लगे नजर आते हैं कि इस विभाग का दायित्व स्वतंत्र रूप से किसी को मिलना चाहिए। किंतु सीएम का अपना नेटवर्क भी इतना तगड़ा है कि जैसे ही पुलिस विभाग की उदासीनता का इन पुट मिलता है और तुरंत एक्शन हो जाता है,नहीं विश्वास हो तो कटनी कांड को ही देख लीजिये। 

शेडो सीएस कहलाना अब दे रहा है दर्द......
पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह के खास रहे त्रिशूल कंस्ट्रक्शन वाले बिल्डर राजेश शर्मा का टेंशन कम ही नहीं हो रहा है। पहले इंकम टैक्स विभाग की रेड हुई। अब एक किसान ने धोखाधड़ी की शिकायत आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो से कर दी,जिसकी एफआईआर भी हो गई है। पूर्व सीएस के वक्त शेडो सीएस के रूप में चर्चित रहे शर्मा भी जानते हैं कि अब इन मुसीबतों से आसानी से राहत मिलना नहीं है। 

बेकाबू होते तहसीलदार..........
देपालपुर तहसील के लल्लेड़ीपुरा के किसान करण सिंह वर्मा की आत्महत्या मामले ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि इंदौर जिले के तहसीलदार आरआई बेकाबू हो गए हैं। हर महीने एकाध घटना के नायक तो बन ही रहे हैं। इस मामले में तहसीलदार से ऊपर के अधिकारियों पर कौन एक्शन लेगा...?

अमन बजाज की संभावना ज्यादा.........
इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए रायशुमारी कर के पर्यवेक्षक लौट गए हैं। पहले नंबर पर अमन बजाज हैं,जिन्हें पहले जीतू पटवारी का साथ था लेकिन अभी कुछ खटास आ गई है। आम कांग्रेस कार्यकर्ता जरूर अपनी राय दे रहे हैं कि खर्चा उठाने में अमन बेहतर है,लेकिन शहर में कांग्रेस को जमीनी संघर्ष वाली ताकत पूर्व विधायक अश्विन जोशी दे सकते हैं।

लक्ष्मण सिंह करें तो करे क्या....?
राहुल गांधी द्वारा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की घोड़ों की तीन श्रेणी में बांटे जाने के बाद पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह को 6 साल के लिए पार्टी से बाहर करने के बाद उन्होंने अब नई कांग्रेस खड़ी करने का मन बनाया है।  राजनीति में नेता को चौबीस घंटे सजग रहना पड़ता है,जबकि लक्ष्मण सिंह शाम तक ही सक्रिय रह पाते हैं। उन्हें याद नहीं कि ऐसा प्रयास पूर्व सीएम अर्जुन सिंह और माधवराव सिधिया भी कर चुके थे,लेकिन कुछ समय बाद ही,वे कांग्रेस में लौट आए थे। लक्ष्मण सिंह आखिर किस रथ पर सवार होंगे....? क्योंकि भाजपा सांसद रोडमल नागर ने पहले ही कह दिया है कि भाजपा  में उनके होने का कोई मतलब ही  नहीं है। गौरतलब है कि भाजपा से अलग होकर साध्वी उमा भारती ने भी अलग पार्टी बनाई थी,लेकिन वे भी घूम फिर कर वापस आ गईं थी। 


होल्कर साइंस कॉलेज की प्राचार्य को दो सप्ताह की राहत....
 होलकर साइंस कॉलेज की प्राचार्य डॉ.अनामिका जैन को शाजापुर स्थानांतरित किए जाने के शासनादेश के खिलाफ हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर के न्यायालय में चुनौती देने पर फिलहाल दो सप्ताह के लिये राहत मिल गई है। प्राचार्या ने होल्कर कॉलेज में नवाचार शुरु किए थेए लेकिन वो सारे काम ही उनके लिए मुसीबत बन गए थे। यदि बीमारी के चलते डॉण्अनामिका को इंदौर में ही रहना है तो उन्होंने प्राचार्य पद का मोह छोड़कर जहां भी सरकार पदस्थ करेए वहां आंख मूंद कर काम करना होगा।