झाबुआ/ इंदौर।संजय जैन-सह संपादक। तीन महीने बाद भी नगर निगम को एक मुश्त राशि देकर इंदौर बीआरटीएस को तोड़ने वाला कोई भी ठेकेदार अब तक नहीं मिल पाया है।अब इसे तीन टुकड़ों में तोड़ने का रास्ता निकाला गया है। जैसे जैसे इसे तोड़ने की कार्रवाई होगी, उस स्थान पर आकर्षक डिवाइडर निर्माण का भी काम भी चलता जाएगा। यह काम 90 दिन में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 

तीन टुकड़ों में तोड़ने का विकल्प रखा जिससे नगर निगम के तीन करोड़ रुपए  बचेंगे

जनकार्य विभाग ने 25 अप्रैल 2025 को टेंडर निकाला था, जिसमें इस काम को एक साल में पूरा करना था। काम पर 14 करोड़ 58 लाख रुपए खर्च का अनुमान था। नए टेंडर के मुताबिक काम तीन हिस्सों में बांट दिया गया है।निरंजनपुर चौराहे से एलआईजी चौराहे तक 3 करोड़ 80 लाख रुपए, एलआईजी चौराहे से इंदिरा गांधी चौराहे तक 3 करोड़ 89 लाख रुपए और इंदिरा गांधी चौराहे से राजीव गांधी चौराहे तक 3 करोड़ 74 लाख रुपए खर्च का अनुमान लगाते हुए टेंडर जारी किये गए है यानी कुल 11 करोड़ 43 लाख रुपए खर्च होंगे।टेंडर में बदलाव से नगर निगम के तीन करोड़ रुपए भी बचेंगे,यह टेंडर 23 जून को खुलेंगे। जिस एजेंसी का टेंडर मंजूर होगा, उसे 90 दिन में काम पूर्ण करने होगा।

पौधों को पानी के लिए अंडरग्राउंड लाइन

शहर में दूसरे डिवाइडर की तरह यहां भी हरियाली रहेगी, मगर पौधों को सींचने के लिए टैंकर से पानी देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डिवाइडर में ही पाइप लाइन डाल दी जाएगी। उससे ही पौधों को पानी मिल जाएगा। इस सड़क पर ट्रैफिक का दबाव अधिक रहता है। टैंकर से पानी डालने पर ट्रैफिक में अड़चन आती। इस समस्या का हल ढूंढने के लिए ही पाइप लाइन डालने का फैसला किया गया है।

यह डिवाइडर सबसे अलग और सुंदर होगा

राठौर का कहना था की हमारी कोशिश है कि पुराने बीआरटीएस की जगह नई सड़क सबसे सुंदर और अलग दिखे। राठौर के मुताबिक महापौर पुष्यमित्र भार्गव की मंशा के अनुरूप बीआरटीएस का बदलाव नए कंसलटेंट के साथ बैठकर ठीक से समझ भी लिया गया है। इस कार्य मे बेहतरीन से बेहतरीन क्या हो सकता है, यह भी तय किया गया जो बनने के बाद देखने भी मिलेगा। डिवाइडर में हरियाली तो खास होगी ही साथ ही सेंट्रल लाइटिंग भी देखने लायक भी होगी।

28 फरवरी को हटाई  थी सौ मीटर की रैलिंग

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इंदौर यात्रा के दौरान बीआरटीएस को अनुपयोगी बताने के तत्काल बाद ही 28 फरवरी की रात 11.30 बजे से बीआरटीएस (बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) को हटाने का काम शुरू हो गया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद रात में नगर निगम के 50 अधिकारियों-कर्मचारियों की टीम जीपीओ चौराहे पर जमा हुई थी। पहले दिन करीब 7 घंटे शनिवार सुबह 6 बजे तक काम चला था। नगर निगम की टीम ने जीपीओ से शिवाजी वाटिका की ओर करीब सौ मीटर की रैलिंग हटा दी थी।

बीआरटीएस शुरु हुआ था 2013 में

बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम की शुरुआत 2013 में हुई थी और 12 साल बाद इसे अनुपयोगी माना गया। निरंजनपुर से लेकर राजीव गांधी चौराहा तक साढ़े 11 किमी लंबा बीआरटीएस 300 करोड़ की लागत से बनाया गया था।शुरुआत में इस पर चलने वाली बसों में करीब 65 हजार यात्री नियमित सफर करते थे, जिनकी संख्या बढ़ कर करीब दो लाख यात्री हो गई थी। बीआरटीएस पर कुल 49 बसों का संचालन होता है। इनमें से 29 बस सीएनजी, बाकी डीजल बसें हैं।

पहला टेंडर तो अनुमान से बना दिया था,अब कंसलटेंटके साथ डिजाइन भी बदल दी है

डिवाइडर निर्माण के लिये जो पहला टेंडर आया था उसमें कई खामियां थीं। उसके परीक्षण पर पाया कि बगैर सोचे-समझे केवल अंदाज से टेंडर जारी कर दिया था। जांचा-परखा तो बदलाव के लिए मजबूर होना पड़ा। टेंडर ही नहीं बदला, बल्कि डिजाइन और कंसलटेंट भी बदल दिया है। पहले कंसलटेंट एसएनएस था, अब किरीट इंडिया को काम सौंपा है। इस बदलाव से नगर निगम को तीन करोड़ रुपए का फायदा हुआ है। पहले जीएसटी समेत 17  करोड़ रुपए खर्च का अनुमान था, जो अब जीएसटी समेत चौदह करोड़ रुपए पर सिमट गया है। वहीं पहले एक ही ठेकेदार काम करता, जो 365 दिन लेता। अब तीन हिस्सों में काम बांटने से तीन ठेकेदार काम करेंगे और 90 दिन में काम निपट जाएगा।बीआरटीएस वाले रोड पर तीन फ्लायओवर बनने वाले हैं। इससे डिवाइडर की लंबाई घटेगी,जितने हिस्से में डिवाइडर का काम नहीं होगा, उतना खर्च भी कम होगा।

राजेंद्र राठौर-  प्रभारी नगर निगम जनकार्य समिति,इंदौर