क्या लापरवाह अधिकारियो के  खिलाफ कार्यवाही होगी?

रतलाम की तरह कही झाबुआ जिले में भी तो नहीं किया जा रहा मरीज की मौत का इंतज़ार?

झाबुआ/संजय जैन-सह संपादक। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने दमोह घटना के बाद प्रदेश के संबंधित अधिकारियों को प्रदेश में चल रहे फर्जी अस्पताल और फर्जी डिग्री धारी डाक्टरों के साथ ही झोलाछाप डॉक्टरों के चल रहे अवैध क्लीनिकों का सर्वे और जांच में फर्जी पाए जाने पर सख्त कार्यवाही हेतु निर्देशित किया था। आयुक्त चिकित्सा शिक्षा संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मध्यप्रदेश शासन भोपाल की ओर से आदेश क्रमांक 248 भोपाल दिनांक 15/7/2024 जारी किया था,उस पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई थी।अभी हाल में  21 अप्रैल 25 को प्रशासन की भरचक निंद्रा भंग हुई और आनन-फ़ानन में फिर एक नवीन आदेश सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक जिला चिकित्सालय झाबुआ के साथ ही समस्त मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जिला झाबुआ के नाम से जारी किया गया था। 

तीसरे आदेश की उड़ रही धज्जियां

अब जो तीसरा आदेश जारी हुआ है उसमें विशेष इस बात का उल्लेख किया गया है कि आपको पुनः: निर्देशित किया जाता है कि कलेक्टर के आदेशानुसार अनुविभागीय अधिकारी- राजस्व  एवं पुलिस विभाग से समन्वय स्थापित कर अवैध रूप से चिकित्सा व्यवसाय करने वाले फर्जी चिकित्सकों के विरुद्ध कार्यवाही करते हुए जानकारी प्रति सप्ताह कार्यालय में प्रस्तुत करना सुनिश्चित करे। गौरतलब है कि तीसरे आदेश को भी जारी हुए करीबन 28 दिन हो चुके है लेकिन एकाध दिखावे की कार्यवाही के अलावा जिले के राणापुर, पेटलावद,थांदला,झाबुआ, मेघनगर, रामा इत्यादि में किसी भी ब्लॉक मेडिकल अधिकारी ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के आदेश को शायद तवज्जो ही नहीं दिया है।  हमारा ऐसा मानना है की अगर सीएमएचओ के आदेश का पालन होता तो अभी तक अनगिनत कार्यवाही हो जानी थी।उल्लखनीय है कि इस बारे में कुछ भी लिखना,कुछ कारगर होगा या नही? यह तो प्रशासन ही जानें

भविष्य में किसी जान जाने से बच सकती है

आपको बता दे कि रतलाम जिले के रावटी ग्रामीण क्षेत्र में एक मासूम के साथ हुई घटना के बाद रतलाम जिला प्रशासन और विभाग तुरंत हरकत में आया था और संबंधित के खिलाफ कार्यवाही भी हुई। वैसे ही कही झाबुआ जिले में कोई घटना घटेगी तभी ही शायद जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग जागेगा और कार्यवाही करेगा क्या? झाबुआ जिले के शहर एवं ग्रामीण क्षेत्री में ऐसे असंख्य झोलाछाप अवैध रूप से बेख़ौफ क्लीनिक संचालित कर रहे है। कही स्वास्थ्य विभाग को शायद इस क्लीनिक की जानकारी होते हुए भी वे हाथ पर हाथ धरे बैठे तो नही है...? अगर समय रहते स्वास्थ्य विभाग भी जाग जाए तो,शायद भविष्य में किसी जान जाने से बच सकती है।

3 वर्ष का कारावास व जुर्माना पचास हजार रुपये  का प्रावधान

अधिनियम की धारा 7-ग के उल्लंघन में कारावास की कालावधि 3 वर्ष तक व जुर्माना पचास हजार रुपये तक का प्रावधान है। उल्लेखनीय है कि धारा 7-ग का संबंध गैर मान्यता प्राप्त चिकित्सकों से है।म.प्र उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन) अधिनियम, 1973 की धारा 3 का उल्लघंन, न्यायालय में दोषसिद्धी (Conviction) होने पर दण्डनीय भी है, जिसके प्रावधान धारा 8 में वर्णित हैं।

सबसे पहले प्रशासन सिंडिकेट के मुखियाओं को दबोच लेवे-नेताओं और रसुखदार का सहारा लेकर वे रोब झाड़ते है..
ऐसा नहीं की यह आदेश पहली बार जारी हुआ है बल्कि प्रदेश सरकार ने समय समय पर झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्यवाही हेतु आदेश निर्देश जारी किए है,लेकिन इन आदेश निर्देश का प्रदेश में कितनी तवोज्जो दी गयी है,यह तो जग जाहिर है। झोलाछाप डॉक्टर बगैर मान्यता डिग्री डिप्लोमा के बेरोकटोक धडल्ले से एलोपैथिक दवाइयों से इलाज भी कर रहे और इंजेक्शन के साथ साथ बोतले भी चढ़ा रहे है। नेताओं और रसुखदार का सहारा लेकर वे रोब झाड़ते हुए आसानी से देखे भीं जा सकते है। हमने पहले भी प्रशासन को आगाह किया था हर क्षेत्र में इन्होंने अपना सिंडिकेट बना रखा जिसका मुखिया तय मिठाई हर माह पहुचता है, जिसके चलते झोलाछापों पर कार्यवाही नही पाती हैं, सबसे पहले प्रशासन सिंडिकेट के मुखियाओं को दबोच लेवे तो सब आसानी से प्रशासन की गिरफ्त में आ जायेंगे।खैर हम तो केवल खबर लिखते है और लिखते भी रहेंगेम समाचार से सच्चाई अवगत कराना हम कलमकारो का कर्तव्य भी है। कार्यवाही करना या नहीं करना यह तो सिर्फ और सिर्फ जिला प्रशासन ओर संबंधितों के विवेक पर  ही निर्भर है।